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'एयरपोर्ट बना तो पहाड़ियों-घोंसलों को पहुंचेगा नुकसान', ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर रमेश ने राजनाथ सिंह को लिखा पत्र

ग्रेट निकोबार मेगा संरचना परियोजना (Great Nicobar project) पर आपत्ति जताते हुए रमेश ने कहा कि 'इसके गंभीर एवं पर्यावरण पर चरणबद्ध प्रभाव पड़ेगा।' कांग्रेस नेता ने सरकार पर पर्यावरण के व्यापक आकलन मानकों का नजरंदाज करने का आरोप लगाया। अपने इस पत्र में रमेश ने 16 मई, 2026 की अपनी चिट्ठी का भी जिक्र किया है।

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश।

Photo : ANI

Great Nicobar project : ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का विरोध कांग्रेस लगातार कर रही है। अब पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर गांधी नगर-शास्त्री नगर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पर दोबारा विचार करने की अपील की है। यह एयरपोर्ट ग्रेट निकोबार आइलैंड पर बनना है। रमेश का कहना है कि एयरपोर्ट का निर्माण होने पर यहां पारिस्थितकीय से जुड़ी कई तरह की दिक्कतें होंगी और वहां के समाज पर इसका बुरा असर होगा।

    पर्यावरण पर चरणबद्ध प्रभाव पड़ेगा-रमेश

    ग्रेट निकोबार मेगा संरचना परियोजना पर आपत्ति जताते हुए रमेश ने कहा कि 'इसके गंभीर एवं पर्यावरण पर चरणबद्ध प्रभाव पड़ेगा।' कांग्रेस नेता ने सरकार पर पर्यावरण के व्यापक आकलन मानकों का नजरंदाज करने का आरोप लगाया। अपने इस पत्र में रमेश ने 16 मई, 2026 की अपनी चिट्ठी का भी जिक्र किया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि इस चिट्ठी में उन्होंने परियोजना की वजह से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव कम करने वाले उपाय के बारे में सलाह दी है। रमेश का कहना है कि पर्यावरण पर उनके सुझावों को अपनाकर रणनीतिक लक्ष्यों को भी हासिल किया जा सकता है।

    'रनवे का विस्तार करने के बारे में सोचा जा सकता है'

    कांग्रेस नेता ने कहा है कि ग्रेट निकोबार आइलैंड के गांधी नगर-शास्त्री नगर इलाके में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने की जगह कैंपबेल बे के आईएनएस बाज पर मौजूद रनवे का विस्तार करने के बारे में विचार किया जा सकता है। रमेश का कहना है कि प्रस्तावित एयरपोर्ट का निर्माण यदि होता है तो 115 मीटर ऊंचाई वाली दो वनाच्छादित पहाड़ियों को काटना पड़ेगा। यह क्षेत्र लगभग 225 एकड़ संरक्षित वन और 130 एकड़ माने गए (डीम्ड) वन क्षेत्र में फैला है, जो शोम्पेन जनजातीय समुदाय के क्षेत्र का हिस्सा है और वर्तमान में उनके उपयोग में है।

    यहां मेगापोड पक्षी के घोंसला-स्थल भी शामिल

    रमेश ने कहा कि प्रस्तावित स्थल लगभग 142 एकड़ के ऐसे क्षेत्र में है, जो द्वीपीय तटीय विनियमन क्षेत्र (आईसीआरजेड)-1ए के अंतर्गत आता है और जिसे तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) अधिसूचना, 2019 के तहत सर्वोच्च स्तर का संरक्षण प्राप्त है। इसमें कछुओं के अंडे देने वाले समुद्र तट, प्रवाल भित्तियां और संकटग्रस्त निकोबार मेगापोड पक्षी के घोंसला-स्थल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए एक खाड़ी को भरना होगा और खारे पानी के मगरमच्छों को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करना पड़ेगा। इसके अलावा, प्रस्तावित स्थल पर दो गांव स्थित हैं, जहां 234 पूर्व सैनिक परिवार रहते हैं और उन्हें हाल के वर्षों में तीसरी बार विस्थापन झेलना पड़ेगा।

    अछूते और प्राकृतिक वन क्षेत्र में स्थित है यह स्थल

    रमेश ने यह भी कहा कि यह स्थल एक लगभग अछूते और प्राकृतिक वन क्षेत्र में स्थित है, जिसके आसपास अत्यंत संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रस्तावित स्थल का कोई गंभीर और व्यवस्थित पर्यावरणीय प्रभाव आकलन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार को एक महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र, स्थानिक पक्षी क्षेत्र और दो अंतरराष्ट्रीय पक्षी प्रवासन मार्गों के संगम क्षेत्र के रूप में मान्यता प्राप्त है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि गलाथिया बे स्थित प्रस्तावित हवाई अड्डे को 30 मार्च 2022 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने द्वि-उद्देश्यीय (सिविल एवं सैन्य) हवाई अड्डा घोषित किया था। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय को इस संबंध में कोई टिप्पणी करने में छह वर्ष से अधिक समय लग गया और वह भी केवल मौखिक तथा गुमनाम स्रोतों के माध्यम से।

    'हम लालच नहीं, हरियाली को चुनते हैं’

    राहुल गांधी ने इस महीने की शुरुआत में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की अपनी अप्रैल के अंत में हुई यात्रा पर आधारित 16 मिनट से अधिक अवधि का एक वीडियो भी जारी किया था। उन्होंने लोगों से एक याचिका पर हस्ताक्षर करने की अपील करते हुए कहा था- 'हम लालच नहीं, हरियाली को चुनते हैं।’

    Alok Rao
    आलोक कुमार रावauthor

    19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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