BRICS Summit: ब्रिक्स समिट के दौरान विदेशी मेहमानों को परोसे गए खाने को लेकर सियासी विवाद जारी है। दरअसल, समिट में मेहमानों को जो शुद्ध शाकाहारी खाना परोसा गया था। इस पर कई विपक्षी नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है। विवाद के बीच एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता सिर्फ संस्कृति, धर्म और भाषाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में खान-पान की आदतें भी अलग-अलग हैं।
ओवैसी ने कहा कि देश में करीब 20 फीसदी अल्पसंख्यक शाकाहारी हैं। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता को समझने के लिए अलग-अलग समुदायों की भोजन संबंधी पसंद और परंपराओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।
'भारत की विविधता में अलग-अलग खान-पान भी शामिल'
ब्रिक्स समिट में परोसे गए भोजन को लेकर चल रही बहस पर ओवैसी ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि कितने लोगों ने वहां परोसे गए खाने को पसंद किया और कितने लोगों ने नहीं किया। हालांकि, उन्होंने इस पूरे मुद्दे को भारत की विविधता से जोड़ते हुए कहा कि देश में अलग-अलग संस्कृतियां, धर्म, भाषाएं और फूड हैबिट्स हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनयिक भारत की विविधता का जिक्र करते हुए केवल सांस्कृतिक विविधता की बात नहीं करेगा, बल्कि इसमें धार्मिक और भाषाई विविधता भी शामिल है।
चीन के साथ बातचीत पर भी उठाए सवाल
ओवैसी ने ब्रिक्स समिट के दौरान भारत और चीन के बीच हुई बातचीत को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर हुई चर्चाओं की जानकारी सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आई है। उन्होंने खास तौर पर डिजिटल करेंसी से जुड़े मुद्दे का जिक्र किया और कहा कि इसका ब्रिक्स चर्चा में कोई उल्लेख नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि चीन के साथ किन मुद्दों पर बातचीत हुई और सीमा से जुड़े सवालों पर क्या चर्चा हुई।
ओवैसी ने यह भी पूछा कि जिन इलाकों में पहले भारत की पेट्रोलिंग होती थी और अब चीन का कब्जा बताया जाता है, उनका भविष्य क्या होगा और इस संबंध में क्या बातचीत हुई।
ईरान-UAE की बातचीत को बताया सकारात्मक
एआईएमआईएम प्रमुख ने ब्रिक्स के दौरान ईरान और यूएई के एक साथ बैठकर बातचीत करने को सकारात्मक घटनाक्रम बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का साथ बैठना और बातचीत करना एक अच्छी पहल है। ओवैसी के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में देशों के बीच बातचीत और संवाद का होना महत्वपूर्ण है। खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और UAE के बीच बातचीत को उन्होंने सकारात्मक विकास के तौर पर देखा।
