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एयरलाइंस को धमकी भरे कॉल करके जिसने फैलाया दहशत, उस जगदीश उईके को पुलिस ने दबोचा

Jagdish Uikey: देशभर की एयरलाइंस को धमकी भरे कॉल करके दहशत फैलाने वाले जगदीश उईके को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जगदीश को नागपुर पुलिस ने उस वक्त दबोचा, जब वो मनीष नगर में था। इस दौरान उसका मोबाइल-लैपटॉप जब्त कर लिया गया। हाल ही में उसने देवेंद्र फडणवीस से मिलने की शर्त रखी थी।

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जगदीश उइके को नागपुर पुलिस ने किया गिरफ्तार।

देशभर में एयरलाइन को धमकी भरे कॉल करके दहशत फैलाने वाले शख्स को नागपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस शख्स को नागपुर पुलिस ने नागपुर के मनीष नगर से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किये गए शख्स का नाम जगदीश उइके है, इसकी उम्र 35 वर्ष है, जो गोंदिया जिले का रहने वाला है। नागपुर पुलिस ने इस शख्स को नागपुर में ही गिरफ्तार किया है, जब वो दिल्ली से नागपुर पंहुचा था।

किन दिग्गजों को ई-मेल कर रहा था जगदीश?

जगदीश उईके ने जनवरी महीने से लेकर अब तक कई स्थानों में बम रखने और विस्फोट की जानकारी मेल के द्वारा दी थी, इतना ही नहीं 25 अक्टूबर से 30 अक्टूबर के बीच 30 स्थान पर विस्फोट करने की धमकी वाले भी मेल जगदीश ने किये थे। आरोपी जगदीश उईके ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, महासंचालक रेलवे सुरक्षा दल, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सहित राजनीतिक नेताओं और आला अधिकारियों को ईमेल भेजे था, पुलिस ने ईमेल भेजने वाले युवक की पहचान उसके IP एड्रेस से की, जिसमें सामने आया था कि ये मेल जगदीश उइके नाम के व्यक्ति ने ही भेजे है और पुलिस लगातार उसको ट्रेस कर रही थी।

देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करने की थी शर्त

धमकी देने वाले इस व्यक्ति ने मेल में ही देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करने की शर्त भी रखी थी, उसने कहा था कि वह देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करके विस्फोट के संबंधित जानकारी बताएगा। जगदीश के ईमेल के अनुसार आतंकवादी संगठन जैसे मोहम्मद के निशाने पर 6 विमानतल है, इसके अलावा इंडिगो, विस्तारा, स्पाइसजेट, एयर इंडिया जैसी कंपनियों के 31 विमान का अपहरण किया जाएगा। लगातार धमकी भरे ईमेल आने से न सिर्फ नागपुर पुलिस बल्कि देशभर की सुरक्षा जांच एजेंसी हरकत में आ गई थी। सभी एयरपोर्ट पर तैनात CISF को अधिक सतर्क रहने को कहा गया था।

कुछ दिन पहली दिल्ली स्थित पीएमओ गया था जगदीश

खास बात ये है कि जगदीश अपने मेल में जगह को कोड में बताया करता था जैसे कि मार्केट के लिए वो M का उपयोग करता था। रेलवे के लिए R, एयरलाइन के लिए A जैसे नाम का उपयोग करता था। इस बीच ये भी जानकारी सामने आयी है की जगदीश उईके ने 28 अक्टूबर को दिल्ली का दौरा किया था और 28 अक्टूबर को वो PMO विभाग में भी गया था, जहां उसने कुछ दस्तावेज डिस्पैच किये थे।

पुलिस को बार बार नई कहानी बता रहा है आरोपी

नागपुर पुलिस के DCP लोहित मतानी ने बताया है कि जगदीश उईके ने एक किताब भी लिखी है जो "आतंकवाद" को लेकर है, ये किताब अमेज़न में भी उपलब्ध है और अभी तक जगदीश उईके के किसी भी आतंकी संगठन से साठगांठ के कोई सबूत नहीं मिले है, लेकिन उसने जिस लैपटॉप और मोबाइल से मेल किया है वो पुलिस ने जरूर जब्त किया है। हालांकि पुलिस का मानना है कि जगदीश उईके ने किसी भी जगह को उड़ाने के लिए ये सब नहीं किया था, बल्कि उसने पब्लिसिटी पाने के लिए ये सब स्टंट किया था।

फिलहाल जगदीश नागपुर की साइबर पुलिस की हिरासत में है और पुलिस लगातार उससे पूछताछ कर जानकारी जुटा रही है। वहीं जगदीश उईके पुलिस को लगातार बार बार नई कहानी पुलिस को बता रहा है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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