देश

Revolver Prabal: लॉन्चिंग के लिए तैयार देश की पहली लॉन्ग रेंज रिवॉल्वर 'प्रबल', महिलाओं के लिए काफी मुफीद; जानें इसकी हर एक बारीकी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 16, 2023, 12:08 PM IST

Revolver Prabal: महिलाओं के लिए इस रिवॉल्वर को काफी मुफीद माना जा रहा है। पीछे पीछे इसका वजन है। जानकारी के मुताबिक, बिना कारतूस इसका वजन मात्र 700 ग्राम है, जिसे महिलाएं अपने पर्स या बैग में आसानी से रख सकती हैं।

Image

Revolver Prabal

Photo : Twitter

Revolver Prabal: भारत की पहली लंबी दूरी की रिवॉल्वर प्रबल जल्द ही लॉन्च होने वाली है। जानकारी के मुताबिक, 18 अगस्त को इस रिवॉल्वर को लॉच किया जाएगा। इस खास रिवॉल्वर को एडवांस्ट वेपन्स एवं इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, कानपुर की ओर से तैयार किया गया है। इसकी खासियत इसका हल्का वजन है। 0.32 बोर वाली इस रिवॉल्वर से 50 मीटर से ज्यादा दूरी तक लक्ष्य भेदा जा सकता है।

महिलाओं के लिए इस रिवॉल्वर को काफी मुफीद माना जा रहा है। पीछे पीछे इसका वजन है। जानकारी के मुताबिक, बिना कारतूस इसका वजन मात्र 700 ग्राम है, जिसे महिलाएं अपने पर्स या बैग में आसानी से रख सकती हैं।

कंपनी का दावा सबसे अच्छी मारक क्षमता

इसे बनाने वाली कंपनी का दावा है कि प्रबल रिवॉल्वर की मारक क्षमता देश में बनी रिवॉल्वरों में सबसे अच्छी है। दरअसल, वर्तमान में बाजार में मौजूद ज्यादातर रिवॉल्वरों की मारक क्षमता 20 मीटर ही है। AWEIL के निदेशक एके मौर्य ने बताया कि यह वजन में काफी हल्की और साइड स्विंग सिलेंडर से बनी है। यानी इस रिवॉल्वर को कारतूस डालने के लिए मोड़ना नहीं पड़ेगा।

चलाने में है काफी आसान

कंपनी की ओर से बताया गया है कि यह रिवॉल्वर चलाने में भी काफी आसान है। प्रबल के ट्रिगर को खींचना काफी आसान है, जिस कारण यह महिलाओं के लिए भी काफी मुफीद है। बता दें, लाइसेंस धारक नागरिक इस रिवॉल्वर को 18 अगस्त से बुक कर सकते हैं। इसके बैरल की लंबाई 76 मिमी है, जबकि इसकी कुल लंबाई 177.6 मिमी है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article