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जमीन से 4 मीटर ऊपर चलेगी ट्रेन, एक ट्रैक पर दौड़ेगी बुलेट, वंदे भारत, एक्सप्रेस और पैसेंजर; क्या है रेलवे का प्लान

Indian Railways: रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हमारा उद्देश्य मौजूदा संसाधनों में बेस्ट करने का है। उन्होंने कहा, मौजूदा रेलवे लाइनों पर सबसे बड़ी समस्या जानवरों के आने और अवैध रूप से लोगों के लाइन पार करने की है। ऐसे में रेलवे भविष्य में ऐसे ट्रैक तैयार करेगा, जो जमीन से 4 मीटर ऊपर होंगे।

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एलिवेटेड रेलवे ट्रैक

Photo : iStock

Indian Railways: भारतीय रेलवे नई क्रांति के लिए पूरी तरह तैयार है। देश में सेमी-हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत पटरियों पर दौड़ रही है। बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी हो रही है। इस बीच रेलवे के गलियारों से एक नई खबर निकलकर सामने आई है। आने वाले समय में रेलवे दो बड़ी योजनाओं पर काम कर रहा है, इसमें एलिवेटेड रेलवे ट्रैक बनाया जाना भी शामिल है। यानी ऐसे ट्रैक जो जमीन से 4 मीटर ऊपर होंगे। वहीं, दूसरी योजना ऐसे ट्रैक बनाने की है जिस पर बुलेट ट्रेन, हाई स्पीड, सेमी हाई स्पीड और सामान्य गति वाली सभी प्रकार की ट्रेनों को दौड़ाया जा सके।

इन दोनों योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए रेलवे ने मौसदा भी तैयार कर लिया है। एनबीटी की खबर के अनुसार, इसमें जमीन से 4 मीटर ऊपर एलिवेटेड रेलवे ट्रैक तैयार किए जाएंगे, इसके अलावा ये ट्रैक ऐसे होंगे, जिन्हें चार लाइनों के लिए हिसाब से डिजाइन किया जाएगा, जिससे कम खर्चें में इन्हीं ट्रैकों पर अधिक से अधिक ट्रेनें चलाई जा सकें।

रेलवे को क्या होगा फायदा

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हमारा उद्देश्य मौजूदा संसाधनों में बेस्ट करने का है। उन्होंने कहा, मौजूदा रेलवे लाइनों पर सबसे बड़ी समस्या जानवरों के आने और अवैध रूप से लोगों के लाइन पार करने की है। इससे ट्रेनों की स्पीड तो कम होती ही है, साथ ही अन्य तरह की परेशानियां भी होती हैं। यही कारण है कि रेलवे भविष्य में ऐसे ट्रैक तैयार करेगा, जो जमीन से 4 मीटर ऊपर होंगे। ऐसे में न तो ट्रैक पर जानवरों की समस्या रह जाएगी और न ही अवैध अतिक्रमण की। इससे ट्रेनें अपनी फुल स्पीड पर दौड़ सकेंगी, जिससे यात्रा समय को भी कम किया जा सकेगा।

मतलब ऊपर रेल और नीचे सड़क

एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे ने ऐसी योजना तैयारी की है, जिससे ऐलिवेटेट रेलवे ट्रैक के नीचे से सड़ निकाली जा सके, जिससे बस, ट्रक व अन्य तरह की गाड़ियां भी निकल सके। इसलिए एलिवेटेड रेलवे ट्रैक के बीच-बीच में ट्रैफिक के अनुसार सब-वे, रोड व पुलिया भी बनाई जानी प्रस्तावित हैं। साथ ही यह भी ध्यान में रखा गया है कि जो भी ट्रैक बनाए जाएं वे बहुउद्देशीय हों। यानी एक ही ट्रैक पर बुलेट ट्रेन से लेकर पैसेंजर ट्रेनें भी चल सकेंगे। अभी तक इस तरह के ट्रैक विदेशों में ही बने हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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