दिल्ली : सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) ने भारतीय सेना को 450 लोइटरिंग म्यूनिशन (Nagastra 1R) की आपूर्ति पूरी कर दी है। कंपनी के मुताबिक, यह भारतीय सेना को एक ही खेप में की गई इस तरह की सबसे बड़ी आपूर्ति है। सेना ने आपातकालीन खरीद प्रक्रिया के तहत कड़े परीक्षणों के बाद नागास्त्र-1आर का ऑर्डर दिया था।
कंपनी के अनुसार, इस प्रणाली के तकनीकी परीक्षण में चार कंपनियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन सभी परिचालन मानकों को प्रदर्शित करने में केवल SDAL सफल रही। इसके बाद भारतीय सेना ने इस प्रणाली की खरीद का ऑर्डर दिया।
कम दूरी के ऑपरेशन के लिए नागास्त्र-1आर पर्याप्त
नागास्त्र-1आर को सेना की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यह कम दूरी के अभियानों में काम आने वाला लोइटरिंग म्यूनिशन है, जिसे कामिकाजे अटैक मोड में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें मिशन को बीच में रोकने और सिस्टम को वापस प्राप्त करने यानी एबॉर्ट एवं रिकवरी का विकल्प भी दिया गया है।
लोइटरिंग म्यूनिशन ऐसे हथियार होते हैं, जो लक्ष्य क्षेत्र के आसपास कुछ समय तक मंडराने के बाद निर्धारित लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं। कामिकाजे मोड में ये लक्ष्य पर सीधे हमला करते हैं। कंपनी के मुताबिक, नागास्त्र-1आर के प्रदर्शन का मूल्यांकन कई लाइव ट्रायल के जरिए किया गया। इन परीक्षणों में लक्ष्य पर निशाना लगाने की सटीकता सहित विभिन्न परिचालन मानकों को परखा गया।
SDAL ने दावा किया कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्षों के संदर्भ में स्वदेशी रूप से विकसित यह प्रणाली लागत के लिहाज से किफायती विकल्प है। कंपनी का कहना है कि इसकी लागत कम होने के बावजूद सटीकता और गुणवत्ता से समझौता नहीं किया गया है।
नागास्त्र की खासियत
नागास्त्र एक तरह का आत्मघाती ड्रोन है। यह सामान्य ड्रोन से अलग तरीके से काम करता है। इसे ‘कामिकेज’ मोड में तैयार किया गया है, यानी यह दुश्मन के ठिकाने पर सीधे हमला करता है और टकराने के बाद खुद भी नष्ट हो जाता है। इस ड्रोन में GPS सिस्टम लगा है, जो उसे लक्ष्य तक पहुंचने और सटीक निशाना लगाने में मदद करता है। नागास्त्र हवा में कुछ समय तक मंडरा सकता है और सही लक्ष्य मिलने पर उस पर हमला कर सकता है।
इसकी एक खासियत इसकी कम लागत है। इसके साथ इस्तेमाल होने वाले लॉन्चर सिस्टम को दोबारा उपयोग किया जा सकता है, जिससे खर्च कम रखने में मदद मिलती है। नागास्त्र प्रणाली का परीक्षण लद्दाख और झांसी के पास बबीना समेत कई जगहों पर किया गया है।
