मॉर्फिंग विंग्स एक फाइटर जेट को रियल टाइम में अपने पंखों का आकार और साइज बदलने की सुविधा देते हैं। यह शेप मेमोरी अलॉय (SMA) का इस्तेमाल करके संभव होता है, यह एक खास मेटल है जो गर्म करने पर फैलता है और ठंडा करने पर सिकुड़ता है। इस मैकेनिज्म से जेट लिफ्ट और मैन्यूवरेबिलिटी बढ़ाने के लिए अपने पंख फैला सकता है या मिशन के दौरान रडार पर कम दिखने और स्टील्थ को बेहतर बनाने के लिए अपने पंखों को सिकोड़ और मोड़ सकता है।
DRDO के वैज्ञानिकों के अनुसार, SMA-इनेबल्ड पंख सिर्फ 0.17 सेकंड में अपना आकार बदल सकते हैं और लगभग 35 डिग्री प्रति सेकंड की स्पीड से घूम सकते हैं। अब ऐसे में एक तो ताकतवार जेट होगा और ऊपर से आसमान में जंग के दौरान यह जेट जब खुद को बदलेगा को दुश्मन की आंखें फटी रह जाएंगी।
दुनिया भर में 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट तीन मुख्य क्षमताओं पर निर्भर करते हैं। इनमें पहला स्टील्थ और रडार से बचने के लिए उपयुक्त और दूसरा एडेप्टिव एयरोडायनामिक्स और तीसरा हाई-स्पीड एजिलिटी। मॉर्फिंग विंग टेक्नोलॉजी इन तीनों को बेहतर बनाती है। पीछे हटने वाले या आकार बदलने वाले पंखों वाला जेट दुश्मन के रडार को छोटा दिखता है, जिससे उसे पहचानना मुश्किल हो जाता है।
AMCA प्रोग्राम—जिसे DRDO और ADA ने मिलकर डेवलप किया है। इसका मकसद भारत का पहला 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर बनाना है, जिसमें सुपरक्रूज क्षमता, इंटरनल वेपन बे, एडवांस्ड स्टील्थ शेपिंग, AI-असिस्टेड एवियोनिक्स जैसी खासियतें होंगी।