इंडियन एयरफोर्स अब होगी पकड़ से दूर, पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के लिए DRDO ने विकसित की ये टेक्नोलॉजी, अब दुश्मन पावर और नजारों दोनों से मरेगा

India's 5th-Generation Fighter Jet: मॉर्फिंग विंग्स AMCA की एयरोडायनामिक एफिशिएंसी, स्टील्थ प्रोफाइल और मिशन फ्लेक्सिबिलिटी को काफी बढ़ा देंगे। एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि इस टेक्नोलॉजी को भारत के आने वाले अनमैन्ड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट में भी इंटीग्रेट किया जा सकता है, जिससे उन्हें बेहतर सर्वाइवेबिलिटी और स्टील्थ मिलेगी।

Authored by: नितिन अरोड़ाUpdated Dec 16 2025, 10:43 IST
<strong>Indian Air Force 5th Gen Fighter Jet: </strong>भारत का पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन से तनाव बना रहता है। इस साल भी पाकिस्तान से छोटा संघर्ष देखने को मिला, जिसमें बड़े-बड़े हथियारों का इस्तेमाल हुआ। आज के दौर में आसमानी जंग खतरनाक हो गई है। ऐसे में भारत को बढ़ती तकनीक के बीच अपने लिए पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट चाहिए। दुनिया में कई देशों के पास ये हैं और वे छठी पीढ़ी की ओर बढ़ गए हैं। जहां भारत को कई ऑफर मिल रहे हैं, अमेरिका से F-35, रूस से Su-57 और फ्रांस से राफेल। ये अपने पांचवीं पीढ़ी के जेट भारत को बेचना चाहते हैं। हालांकि, भारत 5वीं पीढ़ी का जेट खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है और इसके बजाय विमान के स्वदेशी विकास पर ध्यान दे रहा है। अब जहां भारत ने अपना खुद का 5वीं पीढ़ी का फाइटर एयरक्राफ्ट विकसित करने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने मॉर्फिंग विंग टेक्नोलॉजी का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। यह एक ऐसी क्षमता है जिस पर अभी यूरोप और अमेरिका के कुछ ही देशों को महारत हासिल है। इस सफलता से भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम में काफी तेजी आने की उम्मीद है।01 / 07

Indian Air Force 5th Gen Fighter Jet: भारत का पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन से तनाव बना रहता है। इस साल भी पाकिस्तान से छोटा संघर्ष देखने को मिला, जिसमें बड़े-बड़े हथियारों का इस्तेमाल हुआ। आज के दौर में आसमानी जंग खतरनाक हो गई है। ऐसे में भारत को बढ़ती तकनीक के बीच अपने लिए पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट चाहिए। दुनिया में कई देशों के पास ये हैं और वे छठी पीढ़ी की ओर बढ़ गए हैं। जहां भारत को कई ऑफर मिल रहे हैं, अमेरिका से F-35, रूस से Su-57 और फ्रांस से राफेल। ये अपने पांचवीं पीढ़ी के जेट भारत को बेचना चाहते हैं। हालांकि, भारत 5वीं पीढ़ी का जेट खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है और इसके बजाय विमान के स्वदेशी विकास पर ध्यान दे रहा है। अब जहां भारत ने अपना खुद का 5वीं पीढ़ी का फाइटर एयरक्राफ्ट विकसित करने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने मॉर्फिंग विंग टेक्नोलॉजी का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। यह एक ऐसी क्षमता है जिस पर अभी यूरोप और अमेरिका के कुछ ही देशों को महारत हासिल है। इस सफलता से भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम में काफी तेजी आने की उम्मीद है।

मॉर्फिंग विंग टेक्नोलॉजी क्या है?02 / 07

मॉर्फिंग विंग टेक्नोलॉजी क्या है?

मॉर्फिंग विंग्स एक फाइटर जेट को रियल टाइम में अपने पंखों का आकार और साइज बदलने की सुविधा देते हैं। यह शेप मेमोरी अलॉय (SMA) का इस्तेमाल करके संभव होता है, यह एक खास मेटल है जो गर्म करने पर फैलता है और ठंडा करने पर सिकुड़ता है। इस मैकेनिज्म से जेट लिफ्ट और मैन्यूवरेबिलिटी बढ़ाने के लिए अपने पंख फैला सकता है या मिशन के दौरान रडार पर कम दिखने और स्टील्थ को बेहतर बनाने के लिए अपने पंखों को सिकोड़ और मोड़ सकता है।

पावर और नजारों दोनों से लगेगा भय03 / 07

पावर और नजारों दोनों से लगेगा भय

DRDO के वैज्ञानिकों के अनुसार, SMA-इनेबल्ड पंख सिर्फ 0.17 सेकंड में अपना आकार बदल सकते हैं और लगभग 35 डिग्री प्रति सेकंड की स्पीड से घूम सकते हैं। अब ऐसे में एक तो ताकतवार जेट होगा और ऊपर से आसमान में जंग के दौरान यह जेट जब खुद को बदलेगा को दुश्मन की आंखें फटी रह जाएंगी।

यह टेक्नोलॉजी इतनी जरूरी क्यों?04 / 07

यह टेक्नोलॉजी इतनी जरूरी क्यों?

दुनिया भर में 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट तीन मुख्य क्षमताओं पर निर्भर करते हैं। इनमें पहला स्टील्थ और रडार से बचने के लिए उपयुक्त और दूसरा एडेप्टिव एयरोडायनामिक्स और तीसरा हाई-स्पीड एजिलिटी। मॉर्फिंग विंग टेक्नोलॉजी इन तीनों को बेहतर बनाती है। पीछे हटने वाले या आकार बदलने वाले पंखों वाला जेट दुश्मन के रडार को छोटा दिखता है, जिससे उसे पहचानना मुश्किल हो जाता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका (F-35), रूस (Su-57), और चीन (J-35) जैसे देशों के पास भी ऐसी ही हाई-एंड टेक्नोलॉजी हैं, लेकिन कुछ ही देशों ने एडवांस्ड मॉर्फिंग स्ट्रक्चर में महारत हासिल की है। अब जहां इस सफलता के साथ, भारत ऐसे नेक्स्ट-जेनरेशन सिस्टम पर काम करने वाले खास ग्रुप में शामिल हो गया है।05 / 07

संयुक्त राज्य अमेरिका (F-35), रूस (Su-57), और चीन (J-35) जैसे देशों के पास भी ऐसी ही हाई-एंड टेक्नोलॉजी हैं, लेकिन कुछ ही देशों ने एडवांस्ड मॉर्फिंग स्ट्रक्चर में महारत हासिल की है। अब जहां इस सफलता के साथ, भारत ऐसे नेक्स्ट-जेनरेशन सिस्टम पर काम करने वाले खास ग्रुप में शामिल हो गया है।

AMCA को बढ़ावा—भारत का भविष्य का 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर06 / 07

AMCA को बढ़ावा—भारत का भविष्य का 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर

AMCA प्रोग्राम—जिसे DRDO और ADA ने मिलकर डेवलप किया है। इसका मकसद भारत का पहला 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर बनाना है, जिसमें सुपरक्रूज क्षमता, इंटरनल वेपन बे, एडवांस्ड स्टील्थ शेपिंग, AI-असिस्टेड एवियोनिक्स जैसी खासियतें होंगी।

भारत ने तेजस फाइटर प्रोग्राम के जरिए पहले ही अपनी स्वदेशी क्षमता साबित कर दी है। अब, मॉर्फिंग विंग टेक्नोलॉजी से देश अपनी लंबी अवधि की हवाई युद्ध की तैयारी को मजबूत कर रहा है और विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता कम कर रहा है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह सफलता प्रतिद्वंद्वी देशों, खासकर चीन और पाकिस्तान के लिए परेशानी का सबब बनेगी, क्योंकि भारत ग्लोबल 5th-जेनरेशन स्टैंडर्ड्स के बराबर पहुंचने के करीब आ रहा है।07 / 07

भारत ने तेजस फाइटर प्रोग्राम के जरिए पहले ही अपनी स्वदेशी क्षमता साबित कर दी है। अब, मॉर्फिंग विंग टेक्नोलॉजी से देश अपनी लंबी अवधि की हवाई युद्ध की तैयारी को मजबूत कर रहा है और विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता कम कर रहा है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह सफलता प्रतिद्वंद्वी देशों, खासकर चीन और पाकिस्तान के लिए परेशानी का सबब बनेगी, क्योंकि भारत ग्लोबल 5th-जेनरेशन स्टैंडर्ड्स के बराबर पहुंचने के करीब आ रहा है।

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