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ट्रंप की धमकी के आगे नहीं झुकेगा भारत, रूस से करीबी रहेगी बरकरार, डोभाल पहुंचे मॉस्को, जयशंकर का दौरा भी जल्द

भारत पर अमेरिकी टैरिफ में काफी बढ़ोतरी करने की ट्रंप की धमकी के बावजूद मोदी सरकार ने पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रूस के साथ भारत के रक्षा और ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने के लिए मास्को की यात्रा पर हैं।

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भारत-रूस दोस्ती होगी और मजबूत (AP)

Photo : AP

India-Russia Relations: भारत को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के यू-टर्न के बाद भारत ने भी इसका बखूबी जवाब देने की तैयार कर ली है। रूस से तेल आयात को लेकर ट्रंप के रवैये ने भारत को नई रणनीति अपनाने पर मजबूर कर दिया है। भारत ने जिस तरह से अमेरिका को जवाब दिया है उससे साफ है कि भारत, रूस से तेल आयात नहीं रोकेगा, भले ही ट्रंप और नाराज हो जाएं। ट्रंप के इस रवैये पर खुद अमेरिका में ही सवाल उठ रहे हैं। वहीं, भारत ने भी सख्त रवैया अपनाने का संकेत दिया है। मौजूदा परिदृश्य में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल मॉस्को में हैं और जल्द ही विदेश मंत्री एस जयशंकर भी रूस के दौरे पर जाएंगे।

डोनाल्ड ट्रंप ने सवालों को टाला

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को रूस से अमेरिका के यूरेनियम और उर्वरक आयात पर एक सवाल को टाल दिया। नई दिल्ली ने इस मुद्दे को उठाकर वाशिंगटन के दोहरे मानदंडों को उजागर किया था। अमेरिका, मास्को के साथ व्यापारिक संबंध रखने वाले देशों को अनुचित तरीके से निशाना बना रहा है। भारत पर अमेरिकी टैरिफ में काफी बढ़ोतरी करने की ट्रंप की धमकी के बावजूद मोदी सरकार ने पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रूस के साथ भारत के रक्षा और ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने के लिए मास्को की यात्रा पर हैं। डोभाल की यात्रा के बाद एक और उच्च-स्तरीय यात्रा विदेश मंत्री एस जयशंकर की होने की संभावना है।

डोभाल की यात्रा की योजना पहले से बनाई गई थी, लेकिन यह अधिक अहम हो गई है, क्योंकि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच रूसी तेल की खरीद को लेकर ट्रंप द्वारा नई दिल्ली से आयात पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी के बाद तनाव बढ़ गया है।

डोभाल की मास्को यात्रा

रूसी समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट के अनुसार, अजीत डोभाल भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी, रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर वरिष्ठ रूसी अधिकारियों के साथ बंद कमरे में बैठक करेंगे। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अतिरिक्त एस-400 रक्षा प्रणालियां खरीदने पर विचार कर रहा है, जिसने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सफलता में योगदान दिया था। नई दिल्ली ने कथित तौर पर रूस से Su-57 लड़ाकू विमान खरीदने में भी रुचि दिखाई है। TASS ने एक सूत्र के हवाले से बताया, भू-राजनीतिक स्थिति में मौजूदा तनाव पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा, रूसी तेल की भारत को आपूर्ति जैसे ज़रूरी मुद्दे भी इसमें शामिल होंगे।

भारत-रूस संबंधों का इतिहास

रूस के साथ भारत के राजनयिक संबंध तेल और हथियारों के व्यापार से कहीं आगे तक फैले हैं। अप्रैल 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से भारत की आज़ादी से भी पहले दोनों देशों ने जटिल जियो-पॉलिटिकल मुद्दों पर एक-दूसरे का समर्थन किया है। उदाहरण के लिए, 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान रूस, जो उस समय सोवियत संघ था, मध्यस्थता की भूमिका निभाई और 1966 में तथाकथित ताशकंद शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जहां एक शांति संधि पर हस्ताक्षर किए गए।

इसी तरह 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान रूस ने भारत का समर्थन किया जो भारत-सोवियत संबंधों में एक महत्वपूर्ण पल था। शीत युद्ध के बाद भी भारत और रूस ने अपनी भागीदारी जारी रखी। 2000 में एक रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर किए गए और बाद में 2010 में इसे उन्नत किया गया। तब से वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित किए जाते रहे हैं। भारत और रूस 2021 से 2+2 बैठकें– विदेश और रक्षा मंत्रियों के साथ संयुक्त बैठकें भी आयोजित कर रहे हैं।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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