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थर-थर कापेंगे भारत के दुश्मन! ओडिशा में Agni-3 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण

Agni-3 Ballistic Missile: भारत ने अपनी रक्षा ताकत को और मजबूत करते हुए अग्नि-3 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, परीक्षण के दौरान अग्नि-3 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल के सभी तकनीकी व ऑपरेशनल पैरामीटर सफल रहे।

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ओडिशा में अग्नि-3 का सफल परीक्षण (फोटो साभार: PIB)

  • Agni-3 Ballistic Missile: भारत ने अपनी रक्षा ताकत को और मजबूत करते हुए अग्नि-3 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (Agni-3 Intermediate Range Ballistic Missile) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण 6 फरवरी को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किया गया। इस टेस्ट में मिसाइल ने बिल्कुल तय योजना के मुताबिक अपने मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

    क्या कुछ है खास?

    रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, परीक्षण के दौरान अग्नि-3 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल के सभी तकनीकी व ऑपरेशनल पैरामीटर सफल रहे। यह लॉन्च स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड की निगरानी में हुआ, जो भारत की महत्वपूर्ण सैन्य ताकत का जिम्मा संभालती है। शुक्रवार को किए गए इस परीक्षण से साफ है कि भारत की स्ट्रैटेजिक डिटरेंस क्षमता पूरी तरह मजबूत और भरोसेमंद है।

    अग्नि मिसाइल सिस्टम

    बता दें कि अग्नि मिसाइल सिस्टम भारतीय रक्षा प्रणाली का एक प्रमुख हिस्सा है। इससे पहले भारत ने 'अग्नि-5' बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। भारत ने बीते वर्ष अपनी अत्याधुनिक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल 'अग्नि-5' का सफल परीक्षण किया था। यह परीक्षण देश की मिसाइल क्षमता में एक बड़ी कामयाबी थी।

    5,000 KM से भी ज्यादा मारक क्षमता

    'अग्नि-5' बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण भी ओडिशा के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज, चांदीपुर से स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड की देखरेख में ही सम्पन्न हुआ था। 'अग्नि-5' मिसाइल की मार्गदर्शन प्रणाली, प्रणोदन, चरण विभाजन (स्टेज सेपरेशन), और अंतिम सटीकता (टर्मिनल एक्युरेसी) जैसे सभी पहलुओं को परखा और प्रमाणित किया गया था। 'अग्नि-5' की प्रमुख विशेषताओं की बात करें तो यह मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से भी अधिक है। यानी यह मिसाइल इतनी दूरी तक के लक्ष्य भेदने में सक्षम है।

    इसी बीच, भारतीय सेना ने अपनी एयर डिफेंस और निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए भी एक अहम कदम उठाया है। सेना ने 30 लो-लेवल लाइटवेट रडार की खरीद के लिए करीब 725 करोड़ रुपए की निविदा जारी की है। यह खरीद फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत की जा रही है, ताकि सिस्टम जल्दी से सेना में शामिल हो सकें। ये रडार खास तौर पर ड्रोन, कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों और छोटे-धीमे लक्ष्यों को पकड़ने में बेहद कारगर होंगे। आज के समय में ड्रोन से होने वाले खतरों को देखते हुए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है। इन रडारों से सीमाओं पर निगरानी और एयर डिफेंस सिस्टम पहले से ज्यादा मजबूत होगा।

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    अनुराग गुप्ता
    अनुराग गुप्ता author

    अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स ... और देखें

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