कर्तव्य पथ पर Brahmos से लेकर Akash और 'सूर्यास्त्र' की धाक, दिखी भारत की आन, बान और शान, दुनिया ने किया हमारी ताकत को सलाम
- Edited by: अमित कुमार मंडल
- Updated Jan 26, 2026, 01:52 PM IST
परेड में प्रदर्शित प्रमुख हथियार प्रणालियों में ब्रह्मोस (Brahmos) और आकाश हथियार प्रणाली (Akash), रॉकेट लॉन्चर 'सूर्यास्त्र' (Suryastra), मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन (Arjun Tank) और स्वदेशी रूप से निर्मित सैन्य प्लेटफार्मों और हार्डवेयर की एक श्रृंखला शामिल थी। करीब 100 सांस्कृतिक कलाकारों की परेड की शुरुआत हुई, जिसका विषय ‘विविधता में एकता’ है।
गणतंत्र दिवस 2026 परेड में दिखी भारत की आन, बान और शान
भारत ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस (77th Republic Day) पर अपनी सांस्कृतिक विविधता, आर्थिक विकास और सैन्य कौशल का भव्य प्रदर्शन किया। इसमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल की गई मिसाइलें, युद्धक विमान, नवगठित यूनिट और घातक हथियार प्रणालियां शामिल थीं। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की शोभा बढ़ाई। यह सैन्य प्रदर्शन के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण राजनयिक क्षण भी था। हालांकि इस आयोजन का विषय वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर था, लेकिन दिल्ली के हृदय में स्थित कर्तव्य पथ पर परेड में भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर को भी प्रमुखता मिली।
पारंपरिक बग्गी पर सवार होकर पहुंचीं राष्ट्रपति
परेड की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सलामी लेने के साथ हुई। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष के साथ वह पारंपरिक बग्गी पर सवार होकर कर्तव्य पथ पर पहुंची थीं। परंपरा के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, जिसके बाद राष्ट्रगान हुआ और फिर 105 एमएम लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कई अन्य केंद्रीय मंत्री, देश के शीर्ष सैन्य अधिकारी, विदेशी राजनयिक और वरिष्ठ अधिकारी इस दौरान कर्तव्य पथ पर मौजूद थे।
ब्रह्मोस और Akash और 'सूर्यास्त्र' की धाक
परेड में प्रदर्शित प्रमुख हथियार प्रणालियों में ब्रह्मोस (Brahmos) और आकाश हथियार प्रणाली (Akash), रॉकेट लॉन्चर 'सूर्यास्त्र' (Suryastra), मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन (Arjun Tank) और स्वदेशी रूप से निर्मित सैन्य प्लेटफार्मों और हार्डवेयर की एक श्रृंखला शामिल थी। करीब 100 सांस्कृतिक कलाकारों की परेड की शुरुआत हुई, जिसका विषय ‘विविधता में एकता’ है। इसके जरिए देश की एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करते हुए संगीत वाद्ययंत्रों की एक भव्य प्रस्तुति दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा सलामी लेने के साथ परेड की शुरुआत हुई। परेड का नेतृत्व परेड कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने किया जो दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग हैं।
ऑपरेशन सिंदूर का रहा जलवा
मई की शुरुआत में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना द्वारा तैनात प्रमुख हथियार प्रणालियों की प्रतिकृतियों को प्रदर्शित करने वाली त्रि-सेवा झांकी एक प्रमुख आकर्षण रही। ब्रह्मोस और एस-400 मिसाइलों जैसी हथियार प्रणालियों के उपयोग के साथ ऑपरेशन सिंदूर के संचालन को दर्शाने वाले, एक कांच के आवरण वाले एकीकृत परिचालन केंद्र ने कर्तव्य पथ पर खूब तालियां बटोरी। पहली बार परेड में भारतीय सेना के चरणबद्ध 'बैटल ऐरे फॉर्मेट' का प्रदर्शन किया गया, जिसमें एक हवाई कंपोनेंट भी शामिल था। इसमें एक उच्च गतिशीलता टोही वाहन और भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया बख्तरबंद प्रकाश विशेषज्ञ वाहन शामिल था।

गणतंत्र दिवस 2026 परेड
स्वदेशी ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर का कौशल
हवाई सहायता प्रदान करने के लिए स्वदेशी ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और इसका सशस्त्र संस्करण, रुद्र, प्रहार फॉर्मेशन में, युद्ध के मैदान को आकार देने का कौशल प्रदर्शन कर रहा था। इसके बाद लड़ाकू दस्ते टी-90 भीष्म और मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन के साथ ही अपाचे एएच-64ई और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टरों के हवाई समर्थन के साथ सलामी मंच पर दिखे। अन्य मशीनीकृत कॉलम में नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) एमके-2 के साथ बीएमपी-II इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल शामिल थे। यूरोपीय संघ की एक सैन्य टुकड़ी, जिसमें सैन्य स्टाफ का झंडा और समूह के नौसैनिक अभियान, ऑपरेशन अटलांटा और एस्पाइड्स के झंडे भी थे, परेड में शामिल थे। यूरोप के बाहर इस तरह के आयोजन में यूरोपीय संघ की यह पहली भागीदारी थी।
सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम
परेड में प्रदर्शित प्रमुख हथियार प्रणालियों में सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (URLS), ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और आकाश मिसाइल सिस्टम शामिल थे। भारतीय नौसेना के दस्ते में 144 युवा कर्मी शामिल थे, जिनका नेतृत्व लेफ्टिनेंट करण नाग्याल ने दल कमांडर के रूप में किया था। लेफ्टिनेंट पवन कुमार गांडी, लेफ्टिनेंट प्रीति कुमारी और लेफ्टिनेंट वरुण द्रेवेरिया प्लाटून कमांडर के रूप में इसमें शामिल थे। इसके बाद नौसेना की झांकी थी, जिसमें 'एक मजबूत राष्ट्र के लिए मजबूत नौसेना' विषय का एक विशद चित्रण प्रस्तुत किया गया। इसमें 5वीं शताब्दी सीई के एक सिले हुए जहाज को दर्शाया गया है, जिसे अब आईएनएसवी कौंडिन्य के रूप में नामित किया गया है।
आईएनएसवी तारिणी को दर्शाया गया
झांकी में नाविका सागर परिक्रमा-II अभियान के हिस्से के रूप में आईएनएसवी तारिणी (INSV Tarini) के परिभ्रमण मार्ग का चित्रण किया गया था। भारतीय वायु सेना की टुकड़ी में चार अधिकारी और 144 वायुसैनिक शामिल थे। इसके कमांडर स्क्वाड्रन लीडर जगदीश कुमार थे, स्क्वाड्रन लीडर निकिता चौधरी, फ्लाइट लेफ्टिनेंट प्रखर चंद्राकर और फ्लाइट लेफ्टिनेंट दिनेश सुपरन्यूमररी ऑफिसर के रूप में थे। मार्चिंग दस्ते के साथ दो राफेल जेट, दो मिग-29, दो सुखोई-30 और एक जगुआर विमान द्वारा 'स्पीयरहेड' फॉर्मेशन में एक रोमांचक फ्लाई-पास्ट किया गया, जो सिंदूर फॉर्मेशन का प्रतीक है।
डीआरडीओ ने किया LR-ASHM प्रदर्शन
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अपनी हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल एलआर-एएसएचएम (LR-ASHM) का प्रदर्शन किया। यह स्थिर और गतिशील लक्ष्यों को पकड़ने में सक्षम है और इसे विभिन्न पेलोड ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह अपनी तरह की पहली मिसाइल है जिसमें स्वदेशी एवियोनिक्स सिस्टम और हाई एक्यूरेसी सेंसर पैकेज हैं। परेड में कुल 30 झांकियां थीं। इनमें 17 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की और 13 विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सेवाओं की थी। इन झांकियों के जरिए राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती आत्मनिर्भरता के दम पर देश की तेज़ प्रगति का अनोखा संगम दिखाया गया। इस वर्ष हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से आए लगभग 2,500 सांस्कृतिक कलाकारों ने भी कर्तव्य पथ पर प्रदर्शन किया।
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