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दुनिया देखती रही और भारत ने स्पेसक्राफ्ट क्रैश कर सुलझा लिया था चांद का सबसे बड़ा 'रहस्य'

  • Authored by: शिशुपाल कुमार
  • Updated Aug 21, 2023, 10:13 AM IST

Chandrayaan 1: भारत ने अक्टूबर 2008 में अपना पहला मून मिशन लॉन्च किया था। इस मिशन का नाम चंद्रयान 1 था। तब तक, केवल चार देश चांद पर अपना मिशन भेजने में कामयाब रहे थे। इनके नाम थे अमेरिका, रूस, यूरोप और जापान। भारत इस लिस्ट में पांचवां था

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चंद्रयान 1 ने लगाया था चांद पर पानी का पता (फोटो- ISRO)

Chandrayaan 1: ये भारत है जनाब...दुनिया स्पेसक्राफ्ट चांद पर सुरक्षित उतार कर अपने मिशन को कामयाब मानती है, वहां खोज करती है, लेकिन भारत स्पेसक्राफ्ट क्रैश करवाकर भी दुनिया की सबसे बड़ी खोज को हासिल कर लेता है। चांद पर जो न अमेरिका को मिला, न रूस को और न ही चीन को उसे भारत ने खोज निकाला था, वो भी स्पेसक्राफ्ट को क्रैश कराकर। इसरो ने अपना ही स्पेसक्राफ्ट चांद पर जानबूझकर क्रैश कराया था।

कहानी भारत के पहले चांद मिशन की

भारत ने अक्टूबर 2008 में अपना पहला मून मिशन लॉन्च किया था। इस मिशन का नाम चंद्रयान 1 था। तब तक, केवल चार देश चांद पर अपना मिशन भेजने में कामयाब रहे थे। इनके नाम थे अमेरिका, रूस, यूरोप और जापान। भारत इस लिस्ट में पांचवां था, जिसने चांद पर अपना सफल मिशन भेजा था। भारत का पहला चांद मिशन 2009 तक चला था। यान को 8 नवंबर 2008 को चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया गया था।

चंद्रयान 1 के साथ प्रोब

चंद्रयान के साथ एक 32 किलो का प्रोब भी इसरो ने भेजा था। इस प्रोब को सफल लैंडिंग के लिए नहीं बल्कि इसरो ने क्रैश कराने के लिए चांद पर भेजा था। 17 नवंबर 2008 को इस प्रोब को इसरो से क्रैश का कमांड मिला तो यह चांद की ओर बढ़ चला।

जब क्रैश हुआ प्रोब

चंद्रयान से अलग होने के करीब 25 मिनट बाद प्रोब चांद की सतह से जा टकराया। कहने को तो यह क्रैश लैंडिंग थी, लेकिन इसे क्रैश कराकर के भी भारत इतिहास रच चुका था। प्रोब में लगे उपकरण क्रैश होने के बाद भी काम कर रहे थे और वो लगातार इसरो को डाटा भेज रहे थे।

वो महान खोज

पूरी दुनिया अपने स्पेसक्राफ्ट को लैंड कराकर कोई खोज करती है, भारत ने क्रैश कराकर वो खोज लिया, जिसे अमेरिका-जापान तक नहीं खोज पाए। यह प्रोब जब चांद की ओर बढ़ रहा था, तब इसरो के वैज्ञानिक इससे मिलने वाली डाटा को जुटाने में जुटे थे, क्योंकि इसी डाटा पर उनके अगले मिशन की सफलता निर्भर थी। इस पर हर वो एक्सपेरिमेंट किया गया जो भविष्य में उपयोगी साबित होने वाले थे। इसमें कैमरा सहित कई तरह के उपकरण लगे थे। आज इन्हीं डाटा की बदौलत चंद्रयान-3 सफलता के झंडे गाड़ रहा है, चांद पर लैंड करने की तैयारी कर रहा है। इसी प्रोब ने यह पता लगाया था कि चांद पर पानी है। इस खोज से दुनिया हैरान रह गई थी, बाद में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने भी इसकी पुष्टि की।

शिशुपाल कुमार
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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