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भारत ने पाकिस्तान के इन 5 सैन्य ठिकानों पर किए हमले; जान लीजिए एक-एक के नाम

ऑपरेशन सिंदूर पर सेना और विदेश मंत्रालय ने संयुक्त रूप से प्रेस कांफ्रेंस किया। इस दौरान ये जानकारी साझा की गई कि पाकिस्तान ने देर रात मिसाइल से अटैक किया। पाकिस्तान को लगातार जवाब दिया जा रहा है। पाकिस्तान 5 सैन्य ठिकानों पर भारत ने हमले किए। आपको इस रिपोर्ट में पूरी डिटेल देते हैं।

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पाकिस्तान को भारत ने दिया करारा जवाब।

पाकिस्तान भले ही कितना भी मिमियाता रहे कि उसने भारत को क्षति पहुंचाई, ऐसा कर दिया, वैसा कर दिया, लेकिन सच किसी से छिपता नहीं है। भारतीय सेना की मार खाकर पाकिस्तान बिलबिला उठा है। यही वजह है कि जब हिंदुस्तान ने आतंक को चोट पहुंचाने के लिए पीओके में एयरस्ट्राइक की तो पाकिस्तान की सेना और हुक्मरान की सीने में दर्द उठने लगा।

आतंक के रखवाले पाकिस्तान को इस कदर मिर्ची लगी कि वो भारत के रिहायशी इलाकों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले करने की कोशिश करनी शुरू दी। मगर पाकिस्तान ये भूल गया कि कैसे हिंदुस्तान ने उसे 1971, 1999 की जंग में कहीं का नहीं छोड़ा था। शायद वो एक बार फिर मुंह की खाने के लिए बेताब हुआ जा रहा है। पाकिस्तान की करतूतों का भारत लगातार जवाब दे रहा है, इसी कड़ी में ये जानकारी सामने आई है कि भारत ने पाकिस्तान के 5 सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। आपको बताते हैं कि किन 5 सैन्य ठिकानों पर भारत ने हमले किए।

पाकिस्तान के इन 5 सैन्य ठिकानों पर भारत ने किए हमले

  1. सुकुर
  2. नूर खान
  3. रफीकी
  4. मुरीद
  5. रहीम यार खा

विदेश मंत्रालय और सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ये जानकारी साझा की गई कि पाकिस्तान 5 सैन्य ठिकानों पर भारत ने हमले किए। विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने बताया कि हमने सुकुर, नूर खान, रफीकी, मुरीद, रहीम यार खा में पाकिस्तान सैन्य ठिकानों पर हमले किए।

26 से अधिक स्थानों पर हवाई घुसपैठ की कोशिश नाकाम

कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया, 'पाकिस्तानी सेना ने पश्चिमी सीमाओं पर लगातार आक्रमक गतिविधियां जारी रखी हैं। उसने ड्रोन, लंबी दूरी के हथियार, युद्धक हथियार और लड़ाकू विमानों का उपयोग कर भारतीय सैन्य ढांचे को निशाना बनाया... अंतरराष्ट्रीय सीमा और LoC पर 26 से अधिक स्थानों पर हवाई घुसपैठ के प्रयास किए गए। भारतीय सशस्त्र बलों ने अधिकांश खतरों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया...पाकिस्तान ने पंजाब के एयरबेस को निशाना बनाने के लिए रात 1:40 बजे हाई-स्पीड मिसाइलों का इस्तेमाल किया...चिंता का विषय यह रहा कि पाकिस्तान ने लाहौर से उड़ान भरने वाले नागरिक विमानों की आड़ लेकर अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्गों का दुरुपयोग किया ताकि वो अपनी गतिविधियां छिपा सकें।'

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, 'मैंने पहले भी कई मौकों पर कहा है कि पाकिस्तान की कार्रवाइयां उकसावे और तनाव बढ़ाने वाली हैं। जवाब में भारत ने पाकिस्तान की ओर से की गई इन उकसावे और तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाइयों का जिम्मेदाराना और संतुलित तरीके से बचाव किया है और प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तानी कृत्यों का भारत ने नपे-तुले तरीके से जवाब दिया।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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