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कुत्ता टहलाने के लिए स्टेडियम खाली करवाने वाली IAS पर गिरी गाज, सरकार ने किया जबरन रिटायर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 27, 2023, 06:40 PM IST

IAS Rinku Dugga compulsorily retired: दिल्ली में इस चर्चित मामले के बाद आईएएस अधिकारी रिंकू दुग्गा को अरुणाचल प्रदेश ट्रांसफर कर दिया गया था। वह यहां स्वेदशी मामलों की प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थीं। हालांकि, उनके खराब सर्विस रिकॉर्ड को देखते हुए सरकार ने उन्हें जबरन रिटायर कर दिया है।

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आईएएस रिंकू दुग्गा को सरकार ने किया जबरन रिटायर

Photo : Twitter

IAS Rinku Dugga compulsorily retired: राजधानी दिल्ली में बीते साल एक मामला काफी चर्चा में रहा था। यहां एक IAS दंपति ने अपने कुत्ते को टहलाने के लिए पूरा स्टेडियम खाली करवा दिया था। इसके बाद IAS दंपति को ट्रांसफर कर दिया गया था, लेकिन अब उनमें से एक IAS अधिकारी पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने आईएएस अधिकारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है।

बता दें, दिल्ली में इस चर्चित मामले के बाद आईएएस अधिकारी रिंकू दुग्गा को अरुणाचल प्रदेश ट्रांसफर कर दिया गया था। वह यहां स्वेदशी मामलों की प्रमुख सचिव के पद पर तैनात थीं। हालांकि, उनके खराब सर्विस रिकॉर्ड को देखते हुए सरकार ने उन्हें जबरन रिटायर कर दिया है। रिंकू दुग्गा 1994 बैच की AGMUT काडर की अधिकारी हैं।

कुत्ते के लिए खाली करवाया था स्टेडियम

गौरतलब है कि बीते साल आईएएस अधिकारी रिंकू दुग्गा और पति संजीव खिरवार दिल्ली में तैनात थे। तैनाती के दौरान IAS दंपति अपने कुत्ते के साथ त्यागराज स्टेडियम में टहलने जाया करते थे, जिस समय यह कपल स्टेडियम में होता था, सारे खेल आयोजन बंद करवा दिए जाते थे और स्टेडियम को खाली करवा लिया था। इसका वीडियो फुटेज भी समाने आया था, जिसके बाद सरकार को काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा था।

सरकार ने 3500 किमी दूर किया था तबादला

मामला सामने आने के बाद सरकार एक्शन में आ गई और आईएएस दंपति को तबादला कर दिया गया। केंद्र सरकार ने IAS अफसर संजीव खिरवार का ट्रांसफर लद्दाख और उनकी पत्नी का ट्रांसफर अरुणाचल प्रदेश कर दिया था। इस पूरे मामले पर गृह मंत्रालय ने प्रमुख सचिव से भी रिपोर्ट तलब की थी। अपनी सफाई देते हुए IAS अधिकारी संजीव खिरवार ने आरोपों को निराधार बताया था, उन्होंने कहा था कि किसी भी एथलीट को प्रैक्टिस करने से नहीं रोका जाता था और न ही स्टेडियम को खाली करवाया जाता था। बता दें, IAS संजीव खिरवार भी 1994 बैच के अधिकारी हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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