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नागपुर हिंसा का बांग्लादेश कनेक्शन: अब तक कुल 84 लोग गिरफ्तार, अफवाह फैलाने वालों पर भी गिरी गाज

क्या आप जानते हैं कि नागपुर हिंसा मामले में अब तक पुलिस ने क्या कार्रवाई की है, अब तक कुल कितने लोग गिरफ्तार किए गए हैं? इससे जुड़ा अपडेट सामने आया है। जानकारी के अनुसार 80 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी के अलावा, सोशल मीडिया पर 140 से अधिक भड़काऊ पोस्ट की पहचान की गई है।

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नागपुर हिंसा मामले में अब तक 84 लोग गिरफ्तार ।

Nagpur Violence Case: महाराष्ट्र पुलिस ने नागपुर हिंसा के सिलसिले में अब तक 84 लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। जानकारी के अनुसार अब तक कुल 10 FIR दर्ज किए गए हैं। इनमें से 4 FIR नागपुर साइबर सेल पुलिस ने दर्ज की है। आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है। बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस में विधानसभा में अफवाह फैलाए जाने की साजिश का खुलासा किया था।

नागपुर हिंसा मामले में अब तक 84 लोग गिरफ्तार

महाराष्ट्र के मंत्री योगेश कदम ने कहा कि पुलिसकर्मियों पर हमला करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा। गृह राज्य मंत्री ने संवाददाताओं को बताया कि हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और कानून का डर पैदा किया जाएगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कुल 84 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाले विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकर्ता भी शामिल हैं।

मंत्री ने कहा- मुख्य आरोपी की तलाश कर रही है पुलिस

कदम ने कहा कि दंगाइयों ने पुलिसकर्मियों पर हमला करने का दुस्साहस किया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम दिखाएंगे कि पुलिस का डर क्या होता है। उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।’’ मंत्री ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि पुलिस का मनोबल प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। कदम ने कहा, ‘‘पुलिस हिंसा के पीछे के मुख्य षड्यंत्रकारी की तलाश कर रही है।’’ मंत्री ने सोशल मीडिया पर गलत वीडियो प्रसारित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।

सोशल मीडिया पर 140 भड़काऊ पोस्ट की पहचान की गई

महाराष्ट्र साइबर ने नागपुर हिंसा को लेकर सांप्रदायिक द्वेष फैलाने के इरादे से सोशल मीडिया मंचों पर साझा किए गए 140 से अधिक आपत्तिजनक पोस्ट की पहचान की है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। एक अधिकारी ने बताया कि ये आपत्तिजनक पोस्ट फेसबुक, इंस्टाग्राम, ‘एक्स’ और यूट्यूब पर अपलोड किए गए थे। उन्होंने कहा कि ऐसी सामग्री को तत्काल हटाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम 2000 की धारा 79(3)(बी) के तहत नोटिस जारी किए गए हैं।

अधिकारी के अनुसार, आपत्तिजनक सामग्री जिन खातों से प्रसारित की गई थी, उन्हें संचालित करने वाले लोगों की वास्तविक पहचान उजागर करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 94 के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र साइबर ने नागपुर सिटी साइबर पुलिस थाने के साथ समन्वय करके नागपुर दंगों से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री (लिखित संदेश, फोटो, वीडियो, ऑडियो) प्रसारित करने में शामिल कई सोशल मीडिया खातों की पहचान की है।

बांग्लादेश से संचालित एक फेसबुक अकाउंट की पहचान

नागपुर में सोमवार को भड़की हिंसा के पहले और बाद मे सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने वालो पर नागपुर पुलिस की साइबर सेल कार्रवाई कर रही है। कई ऐसे एकाउंट्स और उनका इस्तेमाल करने वालो की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो रही है। नागपुर पुलिस की साइबर सेल ने बांग्लादेश से संचालित एक फेसबुक अकाउंट की पहचान की है, जिसने नागपुर में बड़े पैमाने पर दंगे भड़काने की धमकी दी थी।

यह खतरनाक पोस्ट एक बांग्लादेशी यूजर द्वारा किया गया था, जिसमें उसने लिखा था कि सोमवार के दंगे तो सिर्फ एक छोटी घटना थी और भविष्य में और बड़े दंगे होंगे। जांच से पता चला कि उक्त अकाउंट संचालित करने वाला व्यक्ति बांग्लादेश का निवासी है और उसने यह संदेश बांग्लादेश से पोस्ट किया था। साइबर सेल ने फेसबुक से संपर्क कर उस अकाउंट को ब्लॉक करने का अनुरोध किया है। साइबर सेल ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी असत्यापित जानकारी पर विश्वास न करें और अफवाहों को फैलाने से बचें।

पुलिस पर पथराव किया गया और फेंके गए थे पेट्रोल बम

सोमवार रात मध्य नागपुर में हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान पुलिस पर पथराव किया गया था और पेट्रोल बम फेंके गए थे। हिंसा में डीसीपी स्तर के तीन अधिकारियों सहित कुल 33 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। यह हिंसा इस अफवाह के बाद फैली कि औरंगजेब की कब्र हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान आयत वाली चादर चलाई गई थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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