कब और कैसे होगी जाति गणना? जनगणना 2027 में ओबीसी को लेकर विवाद के बीच गृह मंत्रालय ने बताया पूरा रोडमैप
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Jan 27, 2026, 09:34 PM IST
गृह मंत्रालय ने कहा कि जनगणना 2027 से जुड़ी पूरी जानकारी 12 दिसंबर 2025 को जारी प्रेस नोट के जरिए पहले ही सार्वजनिक की जा चुकी है। इसके बावजूद कुछ लोग जानबूझकर जनगणना,खासकर जाति गणना को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्रालय ने दोहराया कि जनगणना 2027 दो चरणों में होगी और जाति से संबंधित विवरण दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना के दौरान जुटाए जाएंगे।
जाति जनगणना।
2027 में कराई जाने वाली जनगणना के तहत दूसरे चरण में जाति गणना भी कराई जाएगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान जारी कर इस बारे में विस्तार से जानकारी दी। मंत्रालय ने बताया कि देशभर में जनसंख्या गणना का यह दूसरा चरण फरवरी 2027 से शुरू होगा। हालांकि, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फबारी वाले गैर-समकालिक क्षेत्रों में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में ही पूरी कर ली जाएगी।
गृह मंत्रालय ने बताया पूरा रोडमैप
गृह मंत्रालय ने कहा कि जनगणना 2027 से जुड़ी पूरी जानकारी 12 दिसंबर 2025 को जारी प्रेस नोट के जरिए पहले ही सार्वजनिक की जा चुकी है। इसके बावजूद कुछ लोग जानबूझकर जनगणना,खासकर जाति गणना को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्रालय ने दोहराया कि जनगणना 2027 दो चरणों में होगी और जाति से संबंधित विवरण दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना के दौरान जुटाए जाएंगे।
मंत्रालय के अनुसार,पहले चरण को हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना कहा जाता है,जबकि दूसरा चरण वास्तविक जनसंख्या गणना का होता है। इससे पहले, सरकार ने 22 जनवरी को पहले चरण के लिए पूछे जाने वाले 33 सवालों को अधिसूचित किया था, जो 1 अप्रैल से शुरू होगा।
पहले चरण में क्या होगा?
राजपत्र अधिसूचना में भारत के महापंजीयक मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि पहले चरण में मकान की बनावट, घर में रहने वाले विवाहित जोड़ों की संख्या, परिवार के मुखिया का लिंग, अनाज की खपत, बुनियादी और आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता, वाहनों के प्रकार जैसे सवाल पूछे जाएंगे। इसके साथ ही यह जानकारी भी ली जाएगी कि परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य श्रेणी से संबंधित है या नहीं।
हाउसलिस्टिंग की प्रक्रिया राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा तय 30 दिनों की अवधि में 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच पूरी की जाएगी। इसके अलावा, हाउसलिस्टिंग शुरू होने से ठीक पहले 15 दिनों तक स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।
विपक्ष कर रहा सवाल
इस बीच,समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा की जाति जनगणना कराने की कोई मंशा नहीं है और वह पीडीए पिछड़े,दलित और अल्पसंख्यक समुदाय को गुमराह कर रही है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’पर कहा कि अधिसूचना में जाति के लिए अलग कॉलम तक नहीं है और जाति जनगणना भाजपा का 'जुमला'भर है।
वहीं,कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि हाउसलिस्टिंग के प्रश्नों में केवल अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति या अन्य श्रेणियों का उल्लेख है,जबकि ओबीसी और सामान्य वर्ग का स्पष्ट जिक्र नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे सरकार की व्यापक और निष्पक्ष जाति जनगणना को लेकर मंशा पर सवाल खड़े होते हैं और इस मुद्दे पर सरकार को राजनीतिक दलों,राज्यों और नागरिक संगठनों से संवाद करना चाहिए।
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