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इस कांग्रेस नेता की पत्नी के पाकिस्तानी सेना से 'अच्छे संबंध'; CM हिमंत ने किसके लिए किया ये सनसनीखेज दावा?

कांग्रेस नेता और सांसद गौरव गोगोई के खिलाफ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। सीएम हिमंत ने दावा किया है कि गौरव गोगोई की पत्नी के पाकिस्तानी सेना से 'अच्छे संबंध' हैं। आखिर उन्होंने ये दावा क्यों किया और क्या कुछ कहा, आपको इस रिपोर्ट में सबकुछ बताते हैं।

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गौरव गोगोई की पत्नी पर हिमंत बिस्वा सरमा ने लगाए सनसनीखेज आरोप।

Himanta Biswa Sarma Slams Congress: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न के पाकिस्तानी सेना के साथ 'अच्छे संबंध' हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सरमा ने दावा किया कि कोलबर्न ने भारत और पाकिस्तान के बीच 19 बार यात्रा की थी और पड़ोसी देश में पाकिस्तानी सेना के अधिकारी उनके साथ रहे।

गौरव गोगोई की पत्नी को लेकर सीएम ने किया सनसनीखेज दावा

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, 'उन्होंने पाकिस्तान में काम किया और फिर एक गैर-सरकारी संगठन में काम करने के लिए दिल्ली आईं, लेकिन उन्हें पाकिस्तान से वेतन मिलता रहा।' सरमा ने दावा किया कि गोगोई ने भी 'आधिकारिक नहीं, व्यक्तिगत तौर पर' पाकिस्तान का दौरा किया और वहां 15 दिन तक रहे। मुख्यमंत्री ने कहा, 'उनकी (गोगोई) पत्नी साथ गई थीं, लेकिन वह सात दिन बाद वापस आ गईं, जबकि गोगोई सात दिन और वहीं ठहरे। उन्हें बताना चाहिए कि उन्होंने 15 दिनों तक पाकिस्तान में क्या किया।'

'क्या उन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनकी सेना की मदद की?'

सरमा ने कहा, 'यह पता लगाया जाना चाहिए कि उन्होंने पाकिस्तान में क्या किया और क्या उन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनकी सेना की मदद की। यह यात्रा क्यों हुई इसे प्रमाणित किया जाना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पाकिस्तान जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन वह वहां आधिकारिक रूप से गए थे। अगर गोगोई आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के तौर पर वहां जाते, तो हम सवाल नहीं उठाते, लेकिन वह वहां निजी तौर पर गए थे और हम जानना चाहेंगे कि उस देश में उनका स्वागत किसने किया।'

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख और भारत में उसके सहयोगियों के बीच संबंधों की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जांच पूरी कर ली है और 'हमारे पास सबूत हैं कि वह (गोगोई) वाघा-अटारी सीमा के रास्ते गए थे।' उन्होंने कहा कि हालांकि, हमें विवरण को प्रमाणित करने के लिए वैधानिक प्रावधानों को पूरा कर होगा और इसके लिए समय की आवश्यकता है, लेकिन हमने यह प्रक्रिया शुरू कर दी है और 10 सितंबर तक हम इसे पूरा कर लेंगे। सरमा ने दावा किया कि एसआईटी 'आवश्यक स्थानों पर गई थी... लेकिन साक्ष्य एकत्र करने की एक प्रक्रिया होती है'।

'90 युवाओं को पाकिस्तानी दूतावास भी ले गए थे गौरव गोगोई'

सरमा ने दावा किया कि कांग्रेस सांसद ने इजराइल यात्रा के दौरान बताया था कि उनका पासपोर्ट खो गया है और इससे 'मूल्यवान विवरण का नुकसान' हुआ है। सरमा ने कहा कि पाकिस्तान से लौटने के बाद गोगोई 90 युवाओं को पाकिस्तानी दूतावास भी ले गए थे और उनमें से कई ने बाद में दावा किया कि उन्हें पहले नहीं बताया गया था कि उन्हें वहां ले जाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया, 'यह युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के उद्देश्य से किया गया।'

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनके परिवार में केवल गोगोई ही भारतीय नागरिक हैं और उन्होंने अपने दो बच्चों की भारतीय नागरिकता छोड़ दी है। उन्होंने कहा, 'जब हमें दस्तावेजी साक्ष्य मिल जाएंगे तो हम उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे और जब मामला केंद्रीय एजेंसी को सौंप दिया जाएगा तो जांच के लिए अधिक गुंजाइश होगी।' उन्होंने कहा, 'असम सरकार के पास इस मामले पर सीमित अधिकार हैं और वह एक निश्चित बिंदु तक ही जांच कर सकती है।' हालांकि गोगोई की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, लेकिन कांग्रेस नेता ने पूर्व में सरमा पर अपने परिवार, पत्नी और बच्चों को इस मामले में घसीटकर राजनीति करने का आरोप लगाया था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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