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हेमंत सोरेन ने दिया मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, चंपई सोरेन बन सकते हैं झारखंड के नए CM

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 31, 2024, 10:09 PM IST

Hemant Soren Resigns: जमीन घोटाले में ईडी की पूछताछ के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने विधायकों के साथ राजभवन पहुंचे। कहा जा रहा है कि उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और चंपई सोरेन को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है।

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हेमंत सोरेन से राज्यपाल को सौंंपा इस्तीफा

Photo : ANI

Hemant Soren Resigns: झारखंड में चल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बीच खबर है कि चंपई सोरेन को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है और उन्हें राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। झारखंड के मंत्री बन्ना गुप्ता ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा, चंपई सोरेन को हमने विधायक दल का नेता चुन लिया है। हम राज्यपाल से अपील करने आए हैं कि चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जाए।

बता दें, जमीन घोटाले में ईडी ने हेमंत सोरेन से आज लगभग 7 घंटे तक पूछताछ की, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पूछताछ खत्म होने के बाद हेमंत सोरेन ईडी अधिकारियों के साथ ही राजभवन पहुंचे और राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

पहले कल्पना सोरेन का चल रहा नाम

बता दें, झारखंड के नए मुख्यमंत्री के रूप में पहले हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन का नाम आगे चल रहा था। बताया जा रहा था कि उनके नाम पर विधायकों के बीच सहमति भी बन गई थी। हालांकि, कल्पना सोरेन के नाम पर पारिवारिक कलह सामने आई और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की विधायक और पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन ने कल्पना सोरेन के नाम पर आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद चंपई सोरेन के नाम को सीएम पद के लिए आगे बढ़ाया गया।

सीता सोरने ने खड़े किए सवाल

मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर गठबंधन के विधायकों की बैठक में कल्पना सोरेन भी मौजूद थीं और मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा तस्वीरें भी साझा की गईं। इसके बाद सोरेन परिवार की बड़ी बहू सीता सोरेन ने कहा, मैं पूछना चाहती हूं कि केवल कल्पना सोरेन ही क्यों, जो विधायक भी नहीं हैं और उनके पास कोई राजनीतिक अनुभव भी नहीं है। दिवंगत दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता ने सवाल उठाया कि किस परिस्थिति में कल्पना का नाम अगले मुख्यमंत्री के तौर पर लिया जा रहा है, जबकि पार्टी में इतने सारे वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने कहा, पार्टी में कई वरिष्ठ नेता हैं, जिन्हें बागडोर सौंपी जा सकती है। अगर वे एक परिवार से चुनाव करना चाहते हैं, तो मैं सदन में सबसे वरिष्ठ हूं और लगभग 14 साल तक विधायक रही हूं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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