देश

अग्निवीरों के परिजनों को सरकारी नौकरी देगी झारखंड सरकार, हेमंत सोरेन का बड़ा फैसला

Hemant Soren Cabinet Decision: झारखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कैबिनेट ने कुल 44 प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इसमें बिजली बिल माफी, डीए में बढ़ोतरी, आंगनबाड़ी सेविकाओं की सेवा बहाली और अग्निवीर के परिवारीजनों को सरकारी नौकरी जैसे बड़े फैसले शामिल हैं।

Image

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन।

Photo : BCCL

Hemant Soren Cabinet Decision: झारखंड सरकार ने अग्निवीर योजना को लेकर बड़ा फैसला किया है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले झारखंड निवासी अग्निवीर जवान को झारखंड पुलिस के तर्ज पर सम्मान दिया जाएगा। इसके अलावा उनके आश्रित को सरकारी नौकरी और 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।

वहीं, सोरेन सरकार ने राज्य के बिजली बकायेदारों को बड़ा तोहफा दिया है। प्रतिमाह अधिकतम 200 यूनिट तक की बिजली खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं के पहले से बकाया चले आ रहे बिल को पूरी तरह माफ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में गुरुवार शाम हुई कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। कैबिनेट सचिव वंदना डाडेल ने बताया कि राज्य में 200 यूनिट तक की बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 39 लाख 44 हजार 389 है। उनके बकाया बिल माफ करने पर करीब 3,584 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

कैबिनेट में 44 प्रस्तावों को मिली मंजूरी

झारखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कैबिनेट ने कुल 44 प्रस्तावों को मंजूरी दी जिनमें कई लोकलुभावन निर्णय शामिल हैं। कैबिनेट ने राज्य के छह जिलों धनबाद, दुमका, गोड्डा, चतरा और कोडरमा में 10 हजार 388 अतिरिक्त आंगनबाड़ी सेविकाओं को फिर से सेवा में बहाल करने की भी स्वीकृति दी है। इन्हें पोषण सखी के रूप में जाना जाता है। इन जिलों में कुपोषण दूर करने के लिए केंद्र की सहायता से चलने वाली योजना के तहत काम करने वाली इन कर्मियों की सेवा करीब एक साल पहले समाप्त हो गई थी। अब उन्हें फिर से नियुक्त कर लिया जाएगा। एक अन्य फैसले के अनुसार, राज्य के स्कूलों में मिड डे मील बनाने के लिए कार्यरत 79 हजार से ज्यादा रसोइया और सहायिकाओं को अब हर साल 10 महीने की बजाय 12 महीने का मानदेय दिया जाएगा।

डीए में भी की गई बढ़ोत्तरी

राज्य सरकार के कर्मियों के महंगाई भत्ते में नौ फीसदी की वृद्धि की गई है। अब उन्हें 230 प्रतिशत की बजाय 239 फीसदी महंगाई भत्ता प्राप्त होगा। कैबिनेट ने राज्य में कल्याण विभाग की ओर से संचालित आवासीय विद्यालयों में सीटें बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। फिलहाल इन विद्यालयों के छात्रावासों की क्षमता 16 हजार 368 छात्रों की है। अब सीटों की संख्या बढ़कर 37 हजार हो जाएगी। सरकार ने झारखंड राज्य आंदोलनकारियों को चिह्नित करने के लिए कार्यरत आयोग को एक साल का अवधि विस्तार दिया है। अब आयोग 14 जुलाई 2025 तक कार्य करेगा।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article