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IVF ट्रीटमेंट की उम्र 21 से 50, तो 58 साल की सिद्धू मूसेवाला की मां ने कैसे दिया बच्चे को जन्म? स्वास्थ्य मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 20, 2024, 02:32 PM IST

IVF Treatment of Sidhu Moosewala Mother: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से आईवीएफ के कानून का हवाला देकर कहा गया है कि एसिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नॉलजी(रेगुलेशन) एक्ट 2021 के तहत इसके लिए निर्धारित की गई उम्र 21-50 साल है। जबकि खबरों के अनुसार चरण कौर की उम्र 58 साल में आईवीएफ के माध्यम से बेटे को जन्म दिया है।

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हाल ही में सिद्धू मूसेवाला के घर गूंजी थी किलकारी (Instagram)

IVF Treatment of Sidhu Moosewala Mother: दिवंगत पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला माता-पिता चरण कौर और बलकौर सिंह के घर हाल ही में किलकारी गूंजी थी। चरण कौर 58 साल की उम्र में दोबारा मां बनीं , उन्होंने बेटे को जन्म दिया था। हालांकि, अब यह दंपति मुसीबत में घिरती नजर आ रही है। दरअसल, IVF के माध्यम से हुए इस बच्चे को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।

पहले मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने आरोप लगाया था कि पंजाब सरकार उनसे बच्चे की वैधता के बारे में पूछताछ कर रही है और उन्हें प्रताड़ित कर रही है। अब सामने आया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पंजाब सरकार से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 58 साल की उम्र में चरण कौर IVF के माध्यम से बच्चे को जन्म कैसे दे सकती हैं?

IVF ट्रीटमेंट की उम्र 21 से 50 साल

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से लिखे गए पत्र में आईवीएफ के कानून का हवाला देकर कहा गया है कि एसिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नॉलजी(रेगुलेशन) एक्ट 2021 के तहत इसके लिए निर्धारित की गई उम्र 21-50 साल है। जबकि खबरों के अनुसार चरण कौर की उम्र 58 साल में आईवीएफ के माध्यम से बेटे को जन्म दिया है। पत्र में कहा गया है कि पंजाब सरकार इस पर अपना जवाब मंत्रालय को भेजें।

बलकौर सिंह ने लगाए थे गंभीर आरोप

इससे पहले मंगलवार को बलकौर सिंह ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक वीडियो जारी किया था। इसमें उन्होंने भगवंत मान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, दो दिन पहले हमारे घर में वाहेगुरू की कृपा से हमारा शुभदीप (सिद्धू मूसेवाला) वापस आया था, लेकिन आज सुबह से मैं बहुत परेशान हूं। सरकार मुझसे पूछ रही है कि यह बच्चा वैध है या नहीं। उन्होंने कहा, मैं सरकार, विशेषकर मुख्यमंत्री भगवंत मान से अनुरोध करना चाहता हूं कि आज थोड़ा तरस खाओ, कम से कम मेरी पत्नी का ट्रीटमेंट तो पूरा हो जाने दो। उन्होंने कहा, मैं यहीं का हूं और आप मुझे पूछताछ के लिए जहां भी बुलाएंगे, मैं आ जाऊंगा और सभी कानूनी दस्तावेज मुहैया कराऊंगा। उन्होंने कहा, मैंने पूरी तरह से कानून का पालन किया है, अगर आपको फिर भी यकीन नहीं है तो आप एफआईआर दर्ज करके मुझे जेल भेज सकते हो। मैं विश्वास दिलाता हूं कि मैं सारे लीगल दस्तावेज दिखाकर फिर भी बरी होकर निकलूंगा।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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