'निर्मला सीतारमण ने आर्थिक सर्वेक्षण पढ़ा भी है या नहीं...', पूर्व वित्त मंत्री ने Budget 2026 को लेकर उठाए गंभीर सवाल
- Edited by: अनुराग गुप्ता
- Updated Feb 1, 2026, 06:41 PM IST
Budget 2026: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने केंद्रीय बजट को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर तंज कसा और पूछा कि सरकार और वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण पढ़ा भी है या नहीं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
Budget 2026: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने रविवार को केंद्रीय बजट को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि उनका भाषण तथा बजट आर्थिक रणनीति और आर्थिक राजनीतिक दूरदर्शिता की कसौटी पर खरा नहीं उतरते। पूर्व वित्त मंत्री ने यह कटाक्ष भी किया कि सीतारमण ने या तो आर्थिक सर्वेक्षण को नहीं पढ़ा या फिर उसे जानबूझकर दरकिनार कर दिया।
कांग्रेस नेता ने क्या कुछ कहा?
समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, चिदंबरम ने कहा, ''आज संसद में वित्त मंत्री के भाषण में जो कुछ सुनने को मिला उससे अर्थशास्त्र का हर छात्र अवश्य ही स्तब्ध रह गया होगा। बजट केवल वार्षिक राजस्व और व्यय का बयान भर नहीं होता। मौजूदा परिस्थितियों में बजट भाषण को उन प्रमुख चुनौतियों पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण पेश करना चाहिए, जिनका ज़िक्र कुछ दिन पहले जारी किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में किया गया था।''
चिदंबरम ने सीतारमण पर कसा तंज
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ''मुझे संदेह है कि सरकार और वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण पढ़ा भी है या नहीं। अगर उन्होंने पढ़ा है, तो ऐसा लगता है कि उन्होंने उसे पूरी तरह से दरकिनार करने का फैसला कर लिया है।"
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, ''अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, सकल स्थिर पूंजी निर्माण (लगभग 30 प्रतिशत) का कम स्तर और निजी क्षेत्र की निवेश करने में हिचकिचाहट, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रवाह को लेकर अनिश्चित दृष्टिकोण और पिछले कई महीनों से विदेशी निवेश का बाहर जाना, राजकोषीय समेकन की बेहद धीमी गति, राजकोषीय घाटा बढ़ना, लाखों एमएसएमई का बंद होना, युवाओं में बेरोज़गार, बढ़ता शहरीकरण और शहरी क्षेत्रों (नगरपालिकाओं और नगर निगमों) में बिगड़ता बुनियादी ढांचे जैसी कई चुनौतियां हैं।''
'वित्त मंत्री ने नहीं दिया कोई समाधान'
चिदंबरम ने दावा किया कि इनमें से किसी भी मुद्दे का वित्त मंत्री के भाषण में कोई समाधान पेश नहीं किया गया। उनके अनुसार, लेखाजोखा मानकों से भी देखें तो 2025-26 में वित्त प्रबंधन का यह एक बेहद खराब लेखा-जोखा था। चिदंबरम ने कहा, ''राजस्व प्राप्तियां 78,086 करोड़ रुपये कम रहीं, कुल व्यय 1,00,503 करोड़ रुपये कम रहा। राजस्व व्यय 75,168 करोड़ रुपये कम रहा और पूंजीगत व्यय में 1,44,376 करोड़ रुपये की कटौती की गई (केंद्र 25,335 करोड़ रुपये और राज्य 1,19,041 करोड़ रुपये)। इस दयनीय प्रदर्शन की व्याख्या करने के लिए एक शब्द तक नहीं कहा गया।''
उन्होंने कहा कि वास्तव में, केंद्र का पूंजीगत व्यय 2024-25 में जीडीपी के 3.2 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 3.1 प्रतिशत रह गया है। चिदंबरम ने कहा, ''बजट भाषण की सबसे गंभीर आलोचना यह है कि वित्त मंत्री योजनाओं, कार्यक्रमों, मिशन, संस्थानों, पहल, कोष, समितियों आदि की संख्या बढ़ाते जाने से थकती नहीं हैं। मैंने इसको लेकर कम से कम 24 की गिनती की है। मैं आपकी (पत्रकार) कल्पना पर छोड़ता हूं कि इनमें से कितने अगले साल तक भुला दिए जाएंगे और गायब हो जाएंगे।''
उनका कहना था, ''आयकर अधिनियम, 2026 के पारित होने के महीनों बाद, जो एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा, वित्त मंत्री ने कुछ दरों में छेड़छाड़ की है। यद्यपि अनेक छोटे-छोटे परिवर्तनों के प्रभाव की सावधानीपूर्वक जांच की जानी होगी। यह याद रखना चाहिए कि लोगों के विशाल बहुमत का आयकर या आयकर दरों से कोई सरोकार नहीं है।''
चिदंबरम ने मोदी सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता ने कहा, ''बजट भाषण और बजट, आर्थिक रणनीति और आर्थिक राजनीतिक दूरदर्शिता की कसौटी पर खरे नहीं उतरते।'' बजट में तमिलनाडु की कथित अनदेखी से जुड़े सवाल पर चिदंबरम ने कहा कि वित्त मंत्री ने बार-बार तमिलनाडु को खारिज किया है और राज्य में भाजपा की कोई हैसियत भी नहीं है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि मोदी सरकार किसी के दबाव में चाहबहार के मुद्दे पर झुक गई।
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