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ननकाना साहिब पर पाकिस्तान का झूठ हुआ बेनकाब, भारत ने नहीं किया कोई हमला; जानिए सारा सच

Fake News of Pakistan: पाकिस्तान का झूठ एक बार फिर बेनकाब हो गया है। सरकार ने पाकिस्तान में ननकाना साहिब पर भारत के हमले के झूठे दावों, अन्य गलत सूचनाओं को खारिज किया। इसके साथ ही सरकार ने कहा है कि ये दावे फर्जी हैं। प्रामाणिक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।

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बार-बार झूठ फैला रहा है पाकिस्तान।

सरकार ने भारत द्वारा पाकिस्तान में ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर ड्रोन हमला किए जाने के दावों को शनिवार को खारिज कर दिया। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की ‘फैक्ट चेक’ इकाई ने कहा, 'सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि भारत ने ननकाना साहिब गुरुद्वारे पर ड्रोन हमला किया है। यह दावा पूरी तरह से फर्जी है।'

ननकाना साहिब पर पाकिस्तान का झूठ हुआ बेनकाब

सरकार ने कहा कि इस तरह की सामग्री भारत में सांप्रदायिक नफरत पैदा करने के लिए प्रसारित की जा रही है। ननकाना साहिब सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक का जन्मस्थान है और यह गुरुद्वारा सिखों के लिए एक पूजनीय स्थल है।

सरकार ने उन कुछ ‘सोशल मीडिया पोस्ट’ को भी 'फर्जी' बताकर खारिज कर दिया जिनमें दावा किया गया था कि एक भारतीय पायलट को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में उसके लड़ाकू विमान से निकाला गया और एक महिला वायुसेना पायलट को पाकिस्तान में पकड़ लिया गया।

भारतीय सैनिकों को रोते हुए दिखाने वाले वीडियो का सच

सरकार ने इन दावों को भी खारिज कर दिया कि पाकिस्तान द्वारा किए गए साइबर हमले में भारत का पावर ग्रिड निष्क्रिय हो गया है तथा मुंबई-दिल्ली हवाई मार्ग अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। सरकार ने कहा, 'ये दावे फर्जी हैं।' उसने कहा कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने दिल्ली और मुंबई उड़ान सूचना क्षेत्रों के भीतर हवाई यातायात सेवा (एटीएस) मार्गों के 25 खंडों को परिचालन संबंधी कारणों से अस्थायी रूप से बंद किया है।

सरकार ने कहा कि भारतीय सैनिकों को रोते हुए दिखाने वाला पुराना वीडियो वास्तव में एक निजी कोचिंग संस्थान के युवाओं का है जो सेना में अपने चयन का जश्न मना रहे थे। पीआईबी फैक्ट चेक इकाई ने कहा कि संबंधित वीडियो 27 अप्रैल को इंस्टाग्राम पर अपलोड किया गया था और इसका सेना से कोई संबंध नहीं है। उसने कहा, 'वीडियो में एक निजी रक्षा कोचिंग संस्थान के छात्र भारतीय सेना में अपने चयन का जश्न मनाते दिख रहे हैं। वीडियो में दिख रहे युवा अपनी भर्ती की खबर पाकर खुशी से कथित तौर पर भावुक हो गए थे।'

जयपुर एयरपोर्ट के पास विस्फोट के दावों को किया खारिज

सरकार ने विदेशी मीडिया के एक वर्ग द्वारा प्रसारित, शुक्रवार को श्रीनगर हवाई अड्डे के आसपास 10 विस्फोटों की खबरों को भी खारिज कर दिया। उसने जयपुर हवाई अड्डे के पास विस्फोटों के अलग-अलग दावों को भी खारिज कर दिया। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'ये दावे फर्जी हैं। प्रामाणिक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।'

पीआईबी फैक्ट चेक इकाई ने यह भी कहा कि भारतीय सेना की चौकियों को नष्ट करने के सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे झूठे हैं और इस संबंध में साझा किया गया वीडियो 2020 का है। उसने कहा, 'यह वीडियो पुराना है और यह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद की किसी गतिविधि से संबंधित नहीं है। वीडियो को मूल रूप से 15 नवंबर, 2020 को यूट्यूब पर अपलोड किया गया था।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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