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बनारस के लिए खुशखबरी! विश्वनाथ मंदिर में स्थानीय लोगों के लिए अगल गेट; जानें खास बातें

Good News: बनारस के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थानीय लोगों के लिए अलग गेट का इंतजाम किया जाएगा। जिसकी व्यवस्था जल्द शुरू होगी। बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए अलग द्वार की मांग पिछले कुछ समय से स्थानीय लोग तेजी से उठाते रहे हैं।

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काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी।

Kashi Vishwanath Mandir: काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बाबा विश्वनाथ धाम आने वाले भक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी को देखते हुए काशीवासियों के लिए अलग से दर्शन की व्यवस्था की जा रही है।

काशीवासियों के लिए की जा रही खास व्यवस्था

काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि जल्द ही काशीवासियों के लिए बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए नई व्यवस्था शुरू होने जा रही है। मंदिर प्रशासन की ओर काशीवासियों के लिए एक अलग गेट और लाइन शुरू करने पर मंथन किया जा रहा है। मंदिर समिति की बैठक में जल्द ही फैसला किया जाएगा।

आईडी कार्ड देखकर लोगों को दी जाएगी एंट्री

काशी के लोगों के लिए बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए अलग द्वार की मांग पिछले कुछ समय से तेज हो चुकी है। लोगों की मांग है कि काशी के लोगों के लिए बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने के लिए अलग से एक द्वार हो, जहां से आईडी कार्ड देखकर लोगों को एंट्री दी जाए। गौरतलब है कि काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि देखने को मिल रही है। बाबा के दरबार में सुगमता और बढ़ी हुई सुविधाओं के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं।

इस साल कितने श्रद्धालुओं ने किए बाबा के दर्शन?

जानकारी के अनुसार 1 जनवरी से 31 मई 2024 तक 2,86,57,473 भक्तों ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। साल 2023 में इस समय सीमा के दौरान 1,93,32,791 लोगों ने दर्शन किए थे। पिछले साल के मुकाबले इस साल 93,24,682 श्रद्धालु अधिक पहुंचे हैं।

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक KVM

बता दें, प्रधानमंत्री मोदी ने 2021 में काशी विश्‍वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण किया था। काशी कॉरिडोर बनने के बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को गलियों और संकरे रास्तों से गुजरना नहीं पड़ता है। श्रद्धालु गंगा घाट से कॉरिडोर के रास्ते सीधे बाबा विश्‍वनाथ मंदिर में बाबा के दर्शन करने आते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर (KVM) भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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