Gyanesh Kumar News : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विभिन्न पहलुओं पर चुनाव आयुक्तों में मतभेद होने का खुलासा करने वाली अपनी सनसनीखेज रिपोर्ट के एक दिन बाद इंडियन एक्सप्रेस ने 24 सितंबर को एक और बड़ा दावा किया। अखबार का दावा है कि SIR प्रक्रिया के तहत गोवा में जब अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होना था, उससे चार दिनों पहले 17 फरवरी को राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) ने दिल्ली स्थित ECI को ई-मेल भेजा था। बीते सात दिनों में इस तरह का यह आठवां ई-मेल था। रिपोर्ट के मुताबिक इस ई-मेल में ऐसे 97 वोटरों के नाम थे जिनकी वैधता एवं पात्रता की जांच गोवा के ही निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (EROs) ने की थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई प्रक्रिया वाली जांच में ये मतदाता वैध एवं पात्र मिले थे।
इस ई-मेल में कहा गया था कि मतदाता सूची से इन मतदाताओं को बाहर करने के पूर्व के फैसलों को बदला जाना है लेकिन EROs ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर के जरिए इन फैसलों को बदल नहीं पाए। वजह यह थी कि ऐसा करने की अनुमति देने वाला नियंत्रण दिल्ली के पास था। रिपोर्ट के मुताबिक गोवा की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 21 फरवरी को हुआ और अखबार ने सभी 97 नामों की जांच की। जांच में सभी नाम 20 सितंबर तक मतदाता सूची में नहीं थे। इंडियन एक्सप्रेस की यह रिपोर्ट आने के बाद विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार पर हमलावर है।
गोवा के CEO ने सात दिनों में आठ बार ई-मेल किया
इस दूसरी रिपोर्ट के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर सवाल किए। इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए रमेश ने कहा कि ECINet सॉफ्टवेयर द्वारा मतदाता सूची से बाहर किए गए वैध वोटर्स को दोबारा शामिल करने के लिए गोवा के CEO ने सात दिनों में आठ बार ECI को ई-मेल किया। गोवा के मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (EROs) ने इस बात की पुष्टि की थी कि हटाए गए नाम वैध मतदाता थे। इस अनुरोध के बावजूद भी ई-मेल्स को नजरंदाज करते हुए मतदाताओं के नाम हटाए गए। रमेश ने कहा कि एक प्रमुख दैनिक समाचार पत्र ने बीते दिन 23 सितंबर को एक सनसनीखेज खुलासा किया। इस खुलासे से यह जाहिर हुआ कि 'मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ने चुनाव आयोग की ईमानदारी, विश्वसनीयता एवं सक्षमता को पूरी तरह से खत्म कर दिया।' अब यह दूसरी रिपोर्ट है जो कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाती है।
'सभी राज्यों में करीब 12 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए'
कांग्रेस नेता ने कहा कि 'पूरी SIR प्रक्रिया ECINet सॉफ्टवेयर को सौंप दी गई है, जिसके कारण SIR का तीसरा चरण बेहद खराब स्थिति में पहुंच गया है। इसके तहत दिल्ली में 54% मतदाताओं और सभी राज्यों में करीब 12 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं या उन्हें चिन्हित किया गया है। एक अवैध और केंद्रीकरण वाले कदम के तहत EROs की ECINet सॉफ्टवेयर तक पहुंच सीमित कर दी गई। जनप्रतिनिधि एक्ट 1950 के अनुसार, मतदाता सूची पर वैधानिक अधिकार ERO के पास होता है। दो चुनाव आयुक्तों ने इस उल्लंघन को लेकर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर चिंता जताई।'
वोट चोरी पर राहुल की बात सही-जयराम
उन्होंने कहा, 'एक अन्य कथित अवैध कदम के तहत Form 6 के जरिए नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया को और कठिन बना दिया गया है। Gen Z को मतदाता सूची से बाहर रखने की कोशिश की जा रही है। हर नया सबूत इस बात की और पुष्टि करता है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी करीब दो वर्षों से, हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद से, जो कहते आ रहे हैं, वह सही है। चुनाव प्रक्रिया से पूरी तरह समझौता किया गया है और उसे दूषित कर दिया गया है। यह ज्ञानेश कुमार द्वारा भारतीयों को मताधिकार से वंचित करने की रणनीति 'मोदी-मेथड ऑफ डिसइंफ्रांचाइजिंग इंडियंस' को लागू करना है।'
कांग्रेस नेता ने कहा कि 'CEC ज्ञानेश कुमार में यदि जरा भी शालीनता और नैतिकता बची है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। इसके बाद प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को उनकी कथित 'दुष्ट मंशाओं' के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।
