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कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस वी. रामसुब्रमण्यम? जिन्हें मिली NHRC की कमान

Justice V Ramasubramanian: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस साल एक जून से ये पद रिक्त था।

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NHRC के अध्यक्ष नियुक्त हुए वी. रामसुब्रमण्यम।

NHRC Chairperson: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा का एक जून को कार्यकाल पूरा होने के बाद से एनएचआरसी अध्यक्ष का पद रिक्त था।

कौन हैं जस्टिस वी. रामसुब्रमण्यम

जस्टिस वी. रामसुब्रमण्यम को एनएचआरसी की कमान सौंपी गई है। उनका जन्म 30 जून 1958 को हुआ था। रामसुब्रमण्यम ने चेन्नई के रामकृष्ण मिशन विवेकानंद कॉलेज से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया है। इसके अलावा उन्होंने मद्रास लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की है। 16 फरवरी 1983 को वे बार के सदस्य बने और मद्रास हाई कोर्ट में करीब 23 सालों तक वकालत की।

एक जून से रिक्त था अध्यक्ष का पद

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा का कार्यकाल एक जून को पूरा होने के बाद से एनएचआरसी अध्यक्ष का पद रिक्त था। उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मिश्रा ने अधिकारों की पैरवी करने वाले निकाय के आठवें अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और जून 2021 में उन्हें इसके शीर्ष पद पर नियुक्त किया गया।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक समिति ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अगले अध्यक्ष का चयन करने के लिए बैठक की थी। एनएचआरसी को नियंत्रित करने वाले कानून के अनुसार, निकाय के प्रमुख का चयन करने वाली समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं, तथा लोकसभा अध्यक्ष, गृह मंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता, राज्यसभा में विपक्ष के नेता और राज्यसभा के उपसभापति इसके सदस्य होते हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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