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पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत, मनी लॉन्ड्रिंग केस में मिली जमानत

Gayatri Prajapati: मनी लॉन्ड्रिंग केस में गायत्री प्रजापत‍ि को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत म‍िली है। कोर्ट ने गायत्री प्रजापत‍ि को इस मामले में जमानत दे दी है। कोर्ट ने गायत्री प्रजापति को जमानत देते हुए कहा क‍ि इस केस में वह 8 जनवरी 2021 से ही जेल में हैं और अपराध के लिए जो अधिकतम सात साल का दंड हेाता है। इसका आधा से अधिक समय वह जेल में बिता चुके हैं।

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मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को मिली जमानत

Photo : Twitter

Gayatri Prajapati: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गायत्री प्रजापति साढ़े तीन साल से जेल में है जबकि प्रावधानों के तहत कुल सजा सात साल की ही है। लिहाजा अधिकतम सजा की आधी अवधि जेल में बिताने के आधार पर न्यायालय ने मामले में गायत्री प्रजापति को जमानत दे दी।

वहीं न्यायालय ने यह भी पाया कि मनी लॉन्ड्रिंग के उक्त मुकदमे का आधार आय से अधिक सम्पत्ति का एक मुकदमा है जिसे वर्ष 2020 में दर्ज किया गया था लेकिन चार साल बीत जाने के बावजूद यूपी विजिलेंस इस्टैब्लिश्मेंट मामले में अपनी विवेचना ही पूरी नहीं कर सका है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने गायत्री प्रजापति की याचिका पर दिया।

ईडी की ओर से जमानत याचिका का किया गया विरोध

गायत्री प्रजापति की ओर से दलील दी गई कि लोकायुक्त की सिफारिश पर 26 नवम्बर 2020 को आय से अधिक सम्पत्ति मामले में विजिलेंस ने उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया था। इसी मुकदमे के आधार पर वर्ष 2021 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गायत्री प्रजापति के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। मनी लॉन्ड्रिंग के केस में 8 फरवरी 2021 को गायत्री प्रजापति को ज्युडिशियल रिमांड पर लिया गया था। बता दें, ईडी की ओर से जमानत याचिका का विरोध किया गया। हालांकि न्यायालय ने पाया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 436 ए के तहत गायत्री प्रजापति को जमानत पाने का अधिकार है क्योंकि वह अधिकतम सजा की आधी अवधि जेल में बिता चुका है। हालांकि सामुहिक दुराचार और पॉक्सो से सम्बन्धित मामलों में मिली सजा के चलते फिलहाल गायत्री प्रजापति का बाहर निकल पाना सम्भव नहीं है।

बता दें, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सामूहिक दुष्कर्म के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को जमानत देने से शुक्रवार को इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति मोहम्मद एफए खान की पीठ ने पूर्व मंत्री को जमानत देने से मना कर दिया था। पीठ ने इस मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद 10 सितंबर को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। एक विशेष अदालत द्वारा दोषसिद्धि के खिलाफ गायत्री प्रजापति की अपील लंबित रहने के दौरान उसने जमानत याचिका दायर की थी। पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार में खनन मंत्री रहे गायत्री प्रजापति को मार्च, 2017 में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

Shashank Shekhar Mishra
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शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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