सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें अभी भी सक्रिय, उन्हें हराना जरूरी...बोले पीएम मोदी
- Edited by: अमित कुमार मंडल
- Updated Jan 11, 2026, 02:03 PM IST
प्रधानमंत्री ने कहा, तुष्टीकरण में लिप्त लोग चरमपंथी मानसिकता वाले लोगों के सामने घुटने टेक चुके हैं। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में बाधा डालने वाली ताकतें आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। ऐसी ताकतों को हराने के लिए हमें सतर्क, एकजुट और शक्तिशाली बने रहने की जरूरत है।
सोमनाथ मंदिर में पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि स्वतंत्रता के बाद गुजरात में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें आज भी सक्रिय हैं, और भारत को उन्हें हराने के लिए सतर्क, एकजुट और शक्तिशाली बने रहने की आवश्यकता है। सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का है। उन्होंने कहा कि यह समय का चक्र है, जिसके तहत कट्टरपंथी आक्रमणकारी अब इतिहास के पन्नों में सिमट गए हैं, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी शान से खड़ा है। पीएम मोदी सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर बोल रहे थे, जो 1026 ईस्वी में महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
मंदिर दृढ़ता, आस्था और राष्ट्रीय गौरव का एक शक्तिशाली प्रतीक
पीएम मोदी ने कहा, सदियों से इसे नष्ट करने के कई बार प्रयास किए जाने के बावजूद, सोमनाथ मंदिर आज भी दृढ़ता, आस्था और राष्ट्रीय गौरव का एक शक्तिशाली प्रतीक है, जो इसे इसकी प्राचीन महिमा में पुनर्स्थापित करने के सामूहिक संकल्प और प्रयासों के कारण संभव हुआ है। पीएम मोदी ने कहा, अत्याचार और आतंक के सच्चे इतिहास को हमसे छिपाया गया और हमें सिखाया गया कि यह हमला मंदिर को लूटने का प्रयास था। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शपथ ली, तो उनके रास्ते में बाधाएं आईं।
सोमनाथ की कहानी भारत की कहानी है
प्रधानमंत्री ने कहा, तुष्टीकरण में लिप्त लोग चरमपंथी मानसिकता वाले लोगों के सामने घुटने टेक चुके हैं। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में बाधा डालने वाली ताकतें आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। ऐसी ताकतों को हराने के लिए हमें सतर्क, एकजुट और शक्तिशाली बने रहने की जरूरत है। सोमनाथ की कहानी भारत की कहानी है; विदेशी आक्रमणकारियों ने इस मंदिर की तरह कई बार भारत को नष्ट करने की कोशिश की। आक्रमणकारियों ने सोचा कि मंदिर को नष्ट करके उन्होंने जीत हासिल कर ली है, लेकिन 1000 साल बाद भी सोमनाथ का झंडा शान से लहरा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्व इतिहास में 1000 वर्षों के इस संघर्ष का कोई सानी नहीं है।
पीएम मोदी ने ‘शौर्य यात्रा’ का नेतृत्व किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘शौर्य यात्रा’ का नेतृत्व किया। इसका आयोजन गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति देने वालों के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने के लिए किया गया। उन्होंने ऐतिहासिक मंदिर में पूजा-अर्चना भी की और सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि दी जिनकी प्रतिमा मंदिर परिसर के पास स्थापित है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित इस यात्रा में 108 अश्वों की झांकी निकाली गई जो वीरता और बलिदान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए शंख सर्कल से वीर हमीरजी गोहिल सर्कल तक यात्रा मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग और श्रद्धालु एकत्र हुए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के साथ विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहन पर खड़े होकर एक किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान जनता का हाथ हिलाकर अभिवादन किया।
भगवान शिव का वाद्ययंत्र ‘डमरू’ बजाया
युवा पुजारियों का एक समूह, जिन्हें ‘ऋषि कुमार’ भी कहा जाता है, मोदी के वाहन के साथ-साथ चलते हुए भगवान शिव का वाद्ययंत्र ‘डमरू’ बजा रहा था। एक समय ऐसा भी आया जब मोदी ने खुद एक पुजारी से दो डमरू लिए और अपने वाहन पर खड़े होकर उन्हें बजाया। जम्मू कश्मीर सहित देश भर से आए कलाकारों ने मार्ग में नियमित दूरी पर बने मंचों पर अपने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए। यात्रा वीर हमीरजी गोहिल सर्कलपर समाप्त हुई, जहां से प्रसिद्ध मंदिर का मार्ग शुरू होता है। मोदी ने चौक पर स्थित हमीरजी गोहिल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की, जिन्होंने 1299 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत की सेना के आक्रमण के खिलाफ सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था।
स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ
बाद में, मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की, जिनकी प्रतिमा मंदिर परिसर के प्रवेश द्वार के पास स्थापित है। पटेल के प्रयासों के फलस्वरूप ही स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ और इसे औपचारिक रूप से 1951 में श्रद्धालुओं के लिए खोला गया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। उन्होंने मुख्य पुजारी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर में पूजा कार्यक्रम में भाग लिया। ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ भारत के उन अनगिनत नागरिकों को याद करने के लिए मनाया जा रहा है, जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए बलिदान दिया, जो आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक चेतना को प्रेरित करता रहेगा। महमूद गजनी ने करीब एक हजार साल पहले 1026 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था और इस दौरान अपना जीवन कुर्बान करने वालों की याद में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
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