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24 जून से बुलाया जा सकता है संसद का विशेष सत्र, 26 को लोकसभा स्पीकर का चुनाव

Parliament Special Session: लोकसभा चुनाव के बाद संसद का पहला सत्र 24 जून को बुलाया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, 24 और 25 जून को सांसदों का शपथ ग्रहण होगा।

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Photo : BCCL

Parliament Special Session: लोकसभा चुनाव के बाद संसद का पहला सत्र 24 जून को बुलाया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, 18वीं लोकसभा के इस विशेष सत्र में 24 और 25 जून को नवनिर्वाचित सांसदों का शपथ ग्रहण होगा। जबकि, लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव 26 जून को हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, संसद का विशेष सत्र 24 जून से 3 जुलाई तक का होगा, जिसमें कुल 8 वर्किंग डे होंगे।

बता दें, लोकसभा चुनाव में एनडीए को बहुमत मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट ने काम करना शुरू कर दिया है। पीएम मोदी ने सोमवार को कैबिनेट मंत्रियों को विभागों का बंटवारा किया था, जिसके बाद आज सभी केंद्रीय मंत्रियों ने कार्यभार संभाल लिया है।

टीडीपी ने ठोका लोकसभा स्पीकर पद पर दावा

इस बार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी बहुमत से दूर रह गई है और एनडीए के घटक दलों के समर्थन से पीएम मोदी सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। हालांकि, एनडीए में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी टीडीपी ने लोकसभा स्पीकर के पद पर अपना दावा ठोक दिया है। सूत्रों के मुताबिक, टीडीपी की इस मांग को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में विशेष सत्र के दौरान सबकी नजरें लोकसभा स्पीकर के चुनाव पर टिकी हुई हैं।

विपक्ष पर रहेगी नजर

इस बार के लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सभी को चौंका दिया है। पिछले दो लोकसभा चुनाव की तुलना में विपक्षी इंडिया गठबंधन की ताकत में इजाफा हुआ और गठबंधन के तहत उसने 234 सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष पर सबकी नजरें होंगी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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