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पहले हनुमान से जुड़ा पोस्ट, अब पंडित वाल बयान, क्या 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के रास्ते पर हैं अखिलेश यादव

सपा मुखिया के बदले सियासी सुर इन दिनों यूपी की राजनीति में नई बहस छेड़े हुए हैं। PDA की राजनीति के साथ-साथ अब अखिलेश यादव के बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट में सनातन, आस्था और ब्राह्मण समाज को लेकर नए संकेत दिखाई दे रहे हैं।

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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव।

Photo : PTI

Akhilesh Yadav: बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव के तेवर थोड़े-थोड़े बदले नजर आ रहे हैं। भगवान हनुमान से जुड़े उनके पोस्ट और अब पंडित जी वाले बयान को 'सॉफ्ट हिंदुत्व' से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकार मान रहे हैं कि बंगाल में जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जबर्दस्त जीत हुई है, उससे सपा अध्यक्ष अंदर ही अंदर हिल गए हैं। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में वह हिंदुत्व के प्रति अपनी आस्था को बार-बार दोहरा रहे हैं। बंगाल में मुस्लिम टीएमसी को चुनते आए हैं लेकिन बताया जा रहा है कि इस बार हिंदू वोटरों ने टीएमसी से दूरी बनाई जिससे उसे हार का सामना करना पड़ा। अब ऐसा संदेश गया है कि केवल मुस्लिम वोटरों को साथ लेकर चुनाव नहीं जीता जा सकता है।

नई सोशल इंजीनियरिंग पर काम कर रही सपा

सपा मुखिया के बदले सियासी सुर इन दिनों यूपी की राजनीति में नई बहस छेड़े हुए हैं। PDA की राजनीति के साथ-साथ अब अखिलेश यादव के बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट में सनातन, आस्था और ब्राह्मण समाज को लेकर नए संकेत दिखाई दे रहे हैं। 2027 से पहलेक सपा ने नई सोशल इंजीनियरिंग पर काम शुरू कर दिया है। अखिलेश ने हाल ही में कहा कि 2012 में पंडित जी के कहने पर वह चुनाव जीते थे और अब फिर एक पंडित जी मिले हैं, अब उन्हीं के बताए रास्ते पर आगे बढ़ेंगे।'

सपा ने बदली रणनीति

अखिलेश यादव का यह बयान अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन चुका है। कुछ दिन पहले हनुमान जी से जुड़ा पोस्ट और अब पंडित जी वाला बयान सत्ता पक्ष और सियासी विश्लेषक इसे सपा की बदली रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल मानते हैं कि यह समाजवादी पार्टी की नई राजनीतिक दिशा का संकेत है। उनके मुताबिक अखिलेश यादव अब ब्राह्मण समाज को साथ लेकर चलने का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।

सपा अध्यक्ष का सनातन प्रेम सिर्फ दिखावा-भाजपा

वहीं, सपा नेता अभिषेक मिश्रा का कहना है कि समाजवादी पार्टी ने हमेशा ब्राह्मण समाज और सनातन परंपराओं का सम्मान किया है। आस्था हमारा व्यक्तिगत विषय है इसलिए हम लोग दिखावा नहीं करते लेकिन बीजेपी जानबूझकर सपा के खिलाफ सनातन विरोधी होने का नैरेटिव गढ़ती रही है। अभिषेक मिश्रा ये भी याद दिलाते हैं कि केदार नाथ मंदिर का निर्माण अखिलेश यादव ही करा रहे है। हालांकि बीजेपी इसे पूरी तरह सियासी रणनीति बता रही है। बीजेपी सांसद दिनेश शर्मा का आरोप है कि अखिलेश यादव का सनातन प्रेम सिर्फ दिखावटी है। उनका कहना है कि जब सनातन विरोध की राजनीति असर नहीं दिखा पाई तब सपा अब नरम हिंदुत्व और धार्मिक प्रतीकों के जरिए नई जमीन तलाश रही है।

फिलहाल सवाल यही है कि क्या समाजवादी पार्टी सामाजिक समीकरणों के साथ अब सांस्कृतिक और धार्मिक संतुलन की नई राजनीति गढ़ रही है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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