देश

केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी के खिलाफ केरल पुलिस ने दर्ज किया मामला, एंबुलेंस का दुरुपयोग करने का आरोप

Suresh Gopi News: केरल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने एम्बुलेंस में यात्रा की, जिसका इस्तेमाल केवल मरीजों को ले जाने के लिए किया जाना चाहिए।

Image

केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी।

Suresh Gopi News: केरल पुलिस ने केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी के खिलाफ एम्बुलेंस का दुरुपयोग करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। त्रिशूर ईस्ट पुलिस ने आईपीसी की धारा 279 और मोटर वाहन अधिनियम की धारा 179,288,192 के तहत सुरेश गोपी और दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एफआईआर में कहा गया है कि केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने एम्बुलेंस में यात्रा की, जिसका इस्तेमाल केवल मरीजों को ले जाने के लिए किया जाना चाहिए।

यह मामला सीपीआई के जिला नेता सुमेश केपी की शिकायत पर दर्ज किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अप्रैल में हुआ त्रिशूर पूरमम उत्सव में सुरेश गोपी ने एम्बुलेंस में यात्रा कर उसका गलत इस्तेमाल किया था। वहीं, विपक्षी कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ ने आरोप लगाया था कि लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी उम्मीदवार सुरेश गोपी के पक्ष में महौल बनाने के लिए रणनीति के तहत काम किया गया था।

सुरेश गोपी ने आरोपों का किया था खंडन

विपक्ष की ओर से एंबुलेंस के गलत इस्तेमाल के आरोप का केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने खंडन किया है। उन्होंने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने इस बयान को वापस लेते हुए कहा कि गुंडों द्वारा उनकी कार पर हमला किए जाने के बाद उन्हें एम्बुलेंस में यात्रा करनी पड़ी, जिससे उनके पैर घायल हो गए।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article