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तबीयत बिगड़ने के बाद भी कक्षा 7 की छात्रा को स्कूल में जबरन रोका, घर पर हुई मौत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 17, 2023, 05:49 PM IST

Faridabad Crime News: ​आराध्या के परिजनों ने बताया कि उनकी बेटी की तबीयत सुबह से ठीक नहीं थी। उसे हल्का बुखार था और बार-बार उल्टी हो रही थी। उन्होंने बताया कि आराध्या ने अपनी क्लास टीचर को इस बारे में बताया था और वॉशरूम जाने के लिए पूछा था। इसके बावजूद उसे परीक्षा में बिठाया गया।

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Faridabad Crime News

Photo : iStock

Faridabad Crime News: हरियाणा के फरीदाबाद जिले से स्कूल प्रशासन की लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां स्कूल प्रशासन की लापरवाही के कारण कक्षा 7वीं की छात्रा की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि छात्रा बीमार थी, इसे बावजूद शिक्षकों ने उसे मैथ टेस्ट के लिए स्कूल में बिठाए रखा, जिस कारण उसकी मौत हो गई।

छात्रा के परिजनों का कहना है कि उन्होंने बुधवार सुबह क्लास टीचर को सूचित किया था कि उनकी बेटी आराध्या खंडेलवाल की तबीयत ठीक नहीं है। इसके बावजूद उसे गणित की परीक्षा पूरी होने तक स्कूल में बिठाया गया और इसके बाद अस्पताल जाने की अनुमति दी गई।

आराध्या को सुबह से हो रही थी उल्टी

आराध्या के परिजनों ने बताया कि उनकी बेटी की तबीयत सुबह से ठीक नहीं थी। उसे हल्का बुखार था और बार-बार उल्टी हो रही थी। उन्होंने बताया कि आराध्या ने अपनी क्लास टीचर को इस बारे में बताया था और वॉशरूम जाने के लिए पूछा था। इसके बावजूद उसे परीक्षा में बिठाया गया। उन्होंने बताया कि आराध्या को पूरे दिन बेचैनी महसूस हो रही थी और उसे पसीना आ रहा था।

घर आने के बाद बिगड़ी तबीयत

आराध्या के पिता अभिलाष खंडेलवाल ने बताया कि स्कूल से घर आने के बाद उनकी बेटी ने नींबू पानी मांगा। हालांकि, एक घंटे बाद उसने उल्टी कर दी, जिसके बाद हम लोगों ने उसे डॉक्टर को दिखाया, लेकिन गुरुवार शाम करीब छह बजे उसे फिर से उल्टियां होने लगीं, जब उसे अस्पताल लेकर पहुंचे तो डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

स्कूल ने पल्ला झाड़ा

इस मामले में स्कूल प्रशासन ने खुद की तरफ से किसी भी प्रकार की लापरवाही से पल्ला झाड़ लिया है। प्रिंसिपल का कहना है कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन आराध्या के स्कूल से घर लौटने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ी। उन्होंने कहा, हम सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करेंगे और जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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