Times Now Navbharat के नए शो Eye Opener में एक ऐसे अनुभवी योद्धा आए, जिसने युद्ध को देखा और समझा है। वह एक ऐसे सैनिक हैं, जो सेना की साइक्लॉजी और फिलॉसफी का गणित भी जानता है। उन्होंने 100 देशों की यात्राएं की हैं और ग्राउंड जीरो से आपके लिए वॉर रिपोर्टिंग भी की। उन्होंने युद्ध के मैदान से आपको दिखाया कि युद्ध कैसा दिखता है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध की रिपोर्टिंग की और ईरान-अमेरिका की चुनौतियां भी दिखाईं। उन्होंने इन दोनों युद्ध का ईरान पर क्या असर पड़ रहा है इसे भी समझा। Eye Opener के इस ऐपिसोड में राजपूताना राइफल्स के पूर्व सदस्य रहे रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल राजेश पवार से बात हुई। चलिए जानते हैं शो के दौरान उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश और देखतें हैं पूरा इंटरव्यू -
कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनों में हिस्सा ले चुके राजेश पवार अब भले ही सेना से रिटायर हो चुके हैं, लेकिन वह भारतीय सेना के उसूलों को जीते हैं। रिपोर्टिंग उनका पैशन है और युद्ध की रिपोर्टिंग के लिए उन्हें जाना जाता है। टाइम्स नाउ नवभारत के साथ यूक्रेन से ऑनलाइन जुड़े राजेश पवार ने इंटरव्यू की शुरुआत ही जयहिंद के साथ ही। उन्होंने बताया कि अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ युद्ध अब एक अत्यंत ही जटिल और खतरनाक मोड़ पर है।
बिना प्लानिंग के ईरान युद्ध में घुसा अमेरिका
राजेश पवार का कहना है कि अमेरिका इस युद्ध में खुस तो गया है, लेकिन अब उसे समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या करना है। उनका मानना है कि इजरायल के कहने पर ही अमेरिका इस युद्ध में शामिल हुआ है। उन्होंने बताया कि इजरायल ने अमेरिका को पुख्ता जानकारी दी कि ईरान की राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक लीडरशिप एक जगह पर इकट्ठा है और हमें उन्हें एक साथ साफ कर देना चाहिए। इस पर अमेरिका ने तुरंत हामी भर दी, लेकिन उन्होंने इसके लिए किसी तरह की प्लानिंग नहीं की। वह कहते हैं कि उन्हें यह भी अंदाजा नहीं था कि ईरान होर्मूज स्ट्रेट को बंद कर देगा, उन्होंने इसके लिए कोई प्लानिंग नहीं की थी।
ईरान युद्ध में अमेरिका के लक्ष्य?
राजेश पवार बताते हैं कि ईरान युद्ध से अमेरिका के दो प्रमुख उद्देश्य थे। इसमें से पहला था ईरान के मुल्ला शासन को हटाना और दूसरा ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को अपने कब्जे में लेना। वह कहते हैं कि अमेरिका अब इस युद्ध से निकलना चाहता है, क्योंकि घरेलू स्तर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की स्थिति ठीक नहीं है। क्योंकि अमेरिका में ट्रम्प का वोट बैंक MAGA (Make America Great Again) नहीं चाहता कि अमेरिका किसी लंबी विदेशी यात्रा में फंसे।
क्या अमेरिका के लक्ष्य पूरे हुए?
यूरोप से अमेरिका और डोनाल्ड ट्रम्प को मदद नहीं मिल रही है। वह होर्मूज स्ट्रेट को खुलवा नहीं पा रहे हैं। अब अमेरिका के लिए ऐसी स्थिति आ गई है कि वह न तो इस युद्ध में बना रह सकता है और न ही छोड़कर जा सकता है। राजेश पवार कहते हैं कि अभी अमेरिका के दोनों ही लक्ष्य पूरे नहीं हुए हैं। वह कहते हैं अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने से कुछ नहीं होगा, ईरान का शासन एक विचारधारा पर आधारित है। आज भी वहां का शासन उसी विचारधारा पर चल रहा है। वह कहते हैं कि ईरान से एनरिच्ड यूरेनियम को निकालना भी अमेरिका का लक्ष्य है। लेकिन वह जमीन के इतने नीचे है कि उसे मिसाइलों से नष्ट नहीं किया जा सकता।
वह कहते हैं ईरान के पास लगभग 460 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम होने का अनुमान है, जिसका फिलहाल कोई अता-पता नहीं है। उसे हासिल करना अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती है। इसके लिए अमेरिकी सेना को ईरान की धरती पर उतरना पड़ेगा। जब तक सेना ईरान की धरती पर नहीं उतरेगी, तब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। अगर अमेरिकी सैनिक ईरान की जमीन पर उतरे तो उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। यही कारण है कि अमेरिका युद्ध से निकलना तो चाहता है, लेकिन निकल भी नहीं पा रहा है।
क्या ईरान इस युद्ध को जीत सकता है?
राजेश पवार बताते हैं कि ईरान की भौगोलिक स्थिति उसे एक प्राकृतिक किले की तरह बनाती है। वह कहते हैं, उसके चारों ओर पहाड़ हैं और उसने पिछले 40 वर्षों से भूमिगत सुरंगों और बंकरों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया है। अभी के हालात ऐसे हैं कि इस युद्ध में ईरान को बढ़त मिलती दिख रही है। उसने अमेरिका और इजरायल को जितना नुकसान पहुंचाया है, उसका अंदाजा इन दोनों देशों को नहीं था। वह कहते हैं, अमेरिका और इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम ईरानी मिसाइलों व ड्रोन्स को रोकने में सिर्फ 50 फीसद तक ही सफल रहे हैं। इसके अलावा वह बताते हैं कि अभी तो ईरान अपने पुराने हथियारों का ही इस्तेमाल कर रहा है, उसने जो नए अत्याधुनिक हथियार बनाए हैं, उन्हें जंग में उतारा ही नहीं है, जो युद्ध में तबाही मचा सकते हैं।
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क्या ईरान युद्ध में परमाणु हथियार का इस्तेमाल हो सकता है?
हां, राजेश पवार कहते हैं कि इस युद्ध में परमाणु हथियार का इस्तेमाल तब ही हो सकता है, जब इजरायल को अपने अस्तित्व पर संकट महसूस हो। उन्होंने कहा, अगर ईरान अपनी अत्याधुनिक और सुपरसोनिक मिसाइलों से इजरायल के तेल अवीव जैसी घनी आबादी वाले शहरों को निशाना बनाता है। अगर अमेरिका युद्ध से पीछे हट जाता है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि इजरायल की तरफ से ईरान में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल हो सकता है।
ईरान युद्ध में हार किसको मिलेगी?
राजेश पवार कहते हैं कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के इस युद्ध में हार यूरोप की हो रही है। उन्होंने बताया कि हारने वाला पक्ष यूरोप है, क्योंकि गैस और ऊर्जा की आपूर्ति बाधित होने से वहां महंगाई बढ़ गई है। वह कहते हैं कि यूरोप की सबसे बड़ी गलती उनका 100 पर्सेंट ग्रीन जाना है, अब वह कोयले से बिजली नहीं बनाते। यूरोप ने रूस से गैस और तेल के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब होर्मूज स्ट्रेट बंद होने उनके लिए स्थिति और भी खतरनाक हो गई है। अगर युद्ध लंबा चला तो इस युद्ध में सबसे बड़ी हार यूरोप की होगी।
क्या इजरायल के निशाने पर पाकिस्तान है?
राजेश पवार कहते हैं कि फिलहाल तो पाकिस्तान, इजरायल के निशाने पर नहीं है। क्योंकि अभी वह ईरान की मिलिट्री ताकत को खत्म करना चाहता है। इसकी मिसाइल, हथियार और न्यूक्लियर क्षमता को पूरी तरह से समाप्त करना चाहा है। हालांकि, वह कहते हैं कि ईरान के बाद पाकिस्तान अगला निशाना हो सकता है, क्योंकि वह एकमात्र परमाणु संपन्न मुस्लिम राष्ट्र है। इसके अलावा पाकिस्तान कभी इजरायल को मान्यता भी नही देता।