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पहला बंगाल विभाजन कब हुआ और उसे क्यों रद्द किया गया, जानें कब बना वर्तमान पश्चिम बंगाल

बंगाल का पहला विभाजन कब हुआ था? कैसे इस काम के जरिए अंग्रेजों ने दिखाया कि उनकी ‘फूट डालो और राज करो’ नीति कितनी असरदार है? व्यापक विरोध, स्वदेशी आंदोलन और राष्ट्रीय एकता की भावना के चलते भले ही विभाजन बाद में रद्द हो गया, लेकिन इसने समाज में एक दरार पैदा कर दी। इसके साथ ही जानिए वर्तमान पश्चिम बंगाल कब बना।

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जानें पहला बंगाल विभाजन कब और क्यों किया गया
Authored by: Digpal Singh
Updated Apr 1, 2026, 17:42 IST

भारत पर अंग्रेजों में लगभग 200 साल तक राज किया। बंगाल ही वह भूमि थी, जो सबसे पहले अंग्रेजों के कब्जे में आई और अंग्रेजों ने भारत में अपनी पहली राजधानी भी कलकत्ता (अब कोलकाता) को बनाया था। अंग्रेजों ने अपनी फूट डालो और शासन करो की नीति का पहला असफल और पहला सफल टेस्ट भी बंगाल में ही किया था। अभी पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर चुनावी सरगर्मी काफी तेज है। विधानसभा चुनाव के बहाने चलिए जानते हैं बंगाल विभाजन के जरिए अंग्रेजों ने कैसे भारत में फूट डालो और शासन करो की नीति को आगे बढ़ाया। कब पहली बार अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन किया और किन परिस्थितियों में उस निर्णय को वापस लेना पड़ा और आज का आधुनिक पश्चिम बंगाल कैसे बना?

भारत के इतिहास में पहला बंगाल विभाजन एक अहम और बहुत ही ज्यादा विवादित घटना थी। इस घटना ने न सिर्फ ब्रिटिश शासन की फूट डालो और शासन करो की नीतियों को उजागर किया, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को भी नई दिशा दी। साल 1765 के बक्सर युद्ध के बाद बंगाल पूरी तरह से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के नियंत्रण में आ गया था। उस समय का बंगाल प्रांत आज के पश्चिम बंगाल से बहुत ज्यादा बड़ा था। उस समय के बंगाल में आज का पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, बांग्लादेश और असम शामिल थे।

बंगाल का पहला विभाजन कब हुआ?

20वीं सदी की शुरुआत तक बंगाल के पूरे क्षेत्र की आबादी लगभग 8 करोड़ तक पहुंच गई थी और इसकी राजधानी कलकत्ता (अब कोलकाता) थी, जो उस समय ब्रिटिश भारत की भी राजधानी थी। इतने बड़े क्षेत्र का प्रशासन संभालना अंग्रेजों के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। विशेष तौर पर पूर्वी बंगाल के ग्रामीण इलाके विकास के मामले में काफी पिछड़े हुए थे, जहां शिक्षा, उद्योग और रोजगार की भारी कमी थी। इन्हीं वजहों का हवाला देते हुए उस समय के वायसराय लॉर्ड कर्जन ने 1905 में बंगाल विभाजन की घोषणा कर दी।

लॉर्ड कर्जन की इस योजना के तहत बंगाल को दो हिस्सों में बांट दिया गया। इसका एक पश्चिमी भाग (जिसमें मौजूदा पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा शामिल थे) और दूसरा पूर्वी बंगाल था, जिसमें मौजूदा बांग्लादेश व असम थे, जिसकी राजधानी ढाका बनाई गई। इस विभाजन के बाद पश्चिमी भाग में हिंदू बहुसंख्यक और पूर्वी भाग में मुस्लिम बहुसंख्यक आबादी हो गई।

गुरुदेव ने क्यों लिखा ‘आमार सोनार बांग्ला’ गीत?

भले ही ब्रिटिश सरकार ने इसे प्रशासनिक सुविधा का कदम बताया हो, लेकिन भारतीयों ने इसे ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति के रूप में देखा। इस निर्णय के खिलाफ बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश में व्यापक विरोध शुरू हो गया। लोगों ने अंग्रेजों के इस कदम को अपनी मातृभूमि का अपमान बताया और एकता बनाए रखने की मांग उठाई। इस विरोध आंदोलन में साहित्यकार और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने भी काफी अहम भूमिका निभाई। गुरुदेव ने ‘आमार सोनार बांग्ला’ गीत की रचना की, जिसे बाद में बांग्लादेश का राष्ट्रगान बनाया गया। टैगोर ने हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में लोगों से एक-दूसरे को राखी बांधने का आह्वान किया।

स्वदेशी आंदोलन की नींव कैसे पड़ी?

लॉर्ड कर्जन के इस फैसले से स्वदेशी आंदोलन और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार की भी शुरुआत हुई। लोगों ने ब्रिटिश सामानों का विरोध करके, देसी उत्पादों को अपनाना शुरू कर दिया। अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो नीति के खिलाफ और संयुक्त बंगाल के लिए हुए इस आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा दी। हालांकि, मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने अंग्रेजों के इस विभाजन का समर्थन भी किया, क्योंकि उन्हें लग रहा था कि इससे उनके सामाजिक और आर्थिक विकास के अवसर बढ़ेंगे।

माइटी ब्रिटिश राज झुका और बंगाल विभाजन रद्द हुआ

बंगाल विभाजन के खिलाफ जनाक्रोश लगातार बढ़ता चला गया। इस बढ़ते जनआक्रोश और राजनीतिक दबाव के चलते आखिरकार शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा। साल 1911 में आखिरकार बंगाल विभाजन को रद्द कर दिया गया। इसके साथ ही प्रशासनिक पुनर्गठन किया गया और भाषाई आधार पर नए प्रांत बनाए गए। साल 1912 में बिहार और ओडिशा को बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग कर दिया गया। 1936 में बिहार और ओडिशा को अलग-अलग राज्य बनाया गया। 1912 में असम को चीफ कमिश्नर के राज में अलग प्रशासनिक ईकाई का दर्जा दिया गया और फिर 1921 में प्रांतीय गवर्नर के अंतर्गत अलग राज्य बनाया गया। इसी दौरान ब्रिटिश भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली ट्रांसफर करने का फैसला लिया गया।

हालांकि, 1905 का बंगाल विभाजन रद्द हो गया था, लेकिन इसने हिंदू-मुस्लिम संबंधों में एक बड़ी दरार पैदा कर दी थी, इसका असर आगे चलकर देश के विभाजन तक देखने को मिला। आखिरकार 1947 में भारत के विभाजन के बाद वर्तमान पश्चिम बंगाल राज्य का गठन हुआ, जो आज भारत का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र है। इस तरह से देश के आजाद होने के साथ ही आज के आधुनिक पश्चिम बंगाल राज्य का जन्म भी हुआ, जहां अभी चुनावी रंग चढ़ा हुआ है।

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