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Exclusive: धुरंधर-2 में दिखाया गया किरदार और अतीक अहमद, कहानीकार मनोज राजन त्रिपाठी की बेबाक बात

Eye Opener के इस एपिसोड में लेखक मनोज राजन त्रिपाठी ने इतिहास, राजनीति और समाज पर बेबाक विचार रखे। इस ऐपिसोड की शुरुआत में ही बात फिल्म Dhurandhan-2 और उसके एक अहम किरदार पर बात हुई, जिसे असल में अतीक अहमद बताया जा रहा है। उन्होंने अतीक अहमद को एक राक्षस बताया और उसके काले कारनामों से परत-दर-परत परदा उठाया।

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Exclusive: धुरंधर-2 में दिखाया गया किरदार और अतीक अहमद, कहानीकार मनोज राजन त्रिपाठी की बेबाक बात
Authored by: Dr Rama Solanki
Updated Mar 29, 2026, 12:53 IST
Edited by: Digpal Singh
Updated Mar 29, 2026, 12:53 IST
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Eye Opener के इस ऐपिसोड में एक ऐसे लेखक और साहित्यकार के साथ बातचीत जो कहानी बुनता है, किस्से सुनाता है। इतिहास के पन्नों से किरदार को खींच लाता है, मजेदार बात ये है कि वो किरदार आपसे सीधे बातें करते हैं। यह किरदार आपको बताते हैं कि हां, हमने इतिहास को देखा है। किस्सों की चाशनी गुनगुनाने वाले यह साहित्यकार हैं मनोज राजन त्रिपाठी। हालांकि, वे स्वयं को साहित्यकार नहीं, एक 'नानी' की तरह कहानीकार मानते हैं। बातों-बातों में वह बताते हैं कि अब नानी और नानी की कहानियां गायब हो गई हैं, पोसमपा जैसे बचपन के वो खेल गायब हो गए हैं। उनका मानना है कि आज की युवा पीढ़ी को वह गांधी जी के बारे में नहीं पढ़ा सकते, क्योंकि वह पीढ़ी गांधी जी के बारे में सुनना ही नहीं चाहती। वह कहते हैं कि जो पीढ़ी गांधी पर मीम्स देखती है, उन्हें इतिहास समझाने के लिए 'मुन्ना भाई' जैसे तरीका अपनाना पड़ता है, ताकि वह गंभीर विषय को समझ सकें। मनोज राजन त्रिपाठी ने टाइम्स नाउ नवभारत के साथ इस इंटरव्यू में दिल खोलकर बात की, चलिए उसी इंटरव्यू के कुछ अंश पढ़ते हैं और पूरा इंटरव्यू भी देखते हैं -

अतीक अहमद और धुरंधर 2 पर बात

अब जब सिनेमा पर 'धुरंधर 2' धमाल मचा रही है तो इसी फिल्म में एक किरदार है, जो मनोज राजन की किताब से मिलता जुलता है। मनोज की किताब राजू पाल हत्याकांड से लेकर अतीक अहमद तक उनकी किताब '52 Days' की 52 दिन की कहानी पर मनोज राजन ने और प्रकाश डाला। वह फिल्म धुरंधर-2 में दिखाए गए किरदार और अतीक अहमद के बीच के संबंधों और वास्तविक इतिहास का विस्फोटक खुलासा करते हैं। उनके अनुसार फिल्म के जिस किरदार आतिफ को दिखाया गया है, वह अतीक अहमद की सच्चाई है, जिसका ISI और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से संबंध है।

अतीक ने माना उसके ISI से संबंध हैं

वह प्रश्न पूछने के अंदाज में कहते हैं कि आप सबको अतीक के ISI और लश्कर के संबंधों के बारे में फिल्म रिलीज होने के बाद क्यों याद आया? फिर वह बताते हैं अतीक का आपराधिक इतिहास 1975 से शुरू हुआ था, वह कई बार विधायक और सांसद रहा, लेकिन इतने दशकों तक उस पर किसी की नजर नहीं गई। सुरक्षा एजेंसियों और पत्रकारों ने भी उसके राष्ट्रविरोधी संबंधों को उजागर क्यों नहीं किया। उन्होंने बताया कि अतीक अहमद ने अपनी मौत वाले दिन धूमनगंज पुलिस की पूछताछ में पहली बार कुबूल किया था कि उसके ISI से संबंध हैं।

पाकिस्तान से होती थी हथियारों की सप्लाई

वह बताते हैं कि कैसे ड्रोन ड्रॉपिंग के जरिए पाकिस्तान से हथियारों की आपूर्ति होती थी, जो पंजाब के गुरदासपुर बॉर्डर पर गिरते थे। बॉर्डर से देश के सबसे बड़े हथियार सप्लायर इरफान खुर्जेवाला के जरिए यह हथियार अतीक तक पहुंचते थे। फिल्म में आतिफ को (26/11 के आरोपी) मेजर इकबाल से बात करते हुए और नकली नोटों का धंधा करते हुए भी दिखाया गया है।

राक्षस था अतीक अहमद

वह अतीक अहमद को राक्षस करार देते हैं और उसके किए जघन्य अपराधों का सिलसिलेवार विवरण भी देते हैं, जिसमें राजूपाल हत्याकांड, मदरसे में बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार, अपने गुरू चांद बाबा की हत्या, अपनी रिश्तेदार अलकमा की हत्या आदि। वह बताते हैं कि उसने विधायक राजू पाल को 5 किमी तक दौड़ाकर गोलियों से भूना था। वह कहते हैं अतीक इतना क्रूर था कि लोगों की खाल तक उतरवा लेता था।

देखें पूरा इंटरव्यू

उमेश पाल की हत्या से CM योगी को संदेश

वह बताते हैं कि उनकी किताब में उमेश पाल की हत्या से लेकर अतीक की मौत की योजना और उसकी हत्या तक की पूरी कहानी है। वह कहते हैं कि उमेश पाल की हत्या सिर्फ एक मर्डर नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लॉ एंड ऑर्डर को अतीक की खुली चुनौती थी, खुला संदेश था कि 'गब्बर इज बैक।' अतीक ने उमेश पाल की हत्या को इस तरह से अंजाब दिया कि सीसीटीवी में कैद हो गया, ताकि उसका खौफ दोबारा कायम हो सके।

अतीक की हत्या LIVE:

वह बताते हैं कि अतीक की हत्या किस तरह से टीवी कैमरों के सामने हुई। वह अतीक की हत्या को टीवी इतिहास की पहली LIVE हत्या बताते हैं। वह इसकी तुलना तालिबान द्वारा किए गए अहमद शाह के कत्ल से करते हैं, जहां हत्यारे पत्रकार बनकर आए थे। वह बताते हैं कि अतीक जो कभी खौफ का दूसरा नाम था, वह योगी आदित्यनाथ के सख्त शासन और एनकाउंटरों से डरकर ही साबरमती जेल भाग गया था।

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