यूरोपीय संघ (EU) की कंपनियां भारत की आर्थिक संभावनाओं, निवेश माहौल और भारत-EU दीर्घकालिक साझेदारी को लेकर बेहद आश्वस्त नज़र आ रही हैं। यह बात Federation of European Business in India (FEBI) की ओर से जारी Business Sentiment Survey-2026 में सामने आई है, जिसे EU-India बिज़नेस फोरम के दौरान जारी किया गया।
EU-India शिखर सम्मेलन और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के अंतिम रूप लेने की पृष्ठभूमि में जारी इस सर्वे के मुताबिक़, यूरोपीय कंपनियां आने वाले पांच वर्षों में भारत में अपने ऑपरेशंस, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को बड़े स्तर पर विस्तार देने की योजना बना रही हैं।
सर्वे के अहम निष्कर्षों के अनुसार, करीब 95% EU कंपनियां भारत में कारोबार बढ़ाने की तैयारी में हैं, जो भारत की मीडियम-टर्म ग्रोथ को लेकर मज़बूत भरोसे को दर्शाता है। वहीं लगभग 90% कंपनियों ने भारत में अपने कारोबार को लाभकारी बताया है, जिससे यह साफ होता है कि भारत अब केवल भविष्य का बाज़ार नहीं, बल्कि EU कंपनियों के लिए एक कोर मार्केट बन चुका है।
FEBI सर्वे में यह भी सामने आया है कि EU कंपनियां भारत को न सिर्फ़ एक बड़े उपभोक्ता बाज़ार के रूप में देख रही हैं, बल्कि एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के तौर पर भी निवेश बढ़ा रही हैं। लोकल प्रोडक्शन, एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक सप्लाई चेन में गहरी भागीदारी इस रणनीति का हिस्सा है।
EU के भारत और भूटान में राजदूत और FEBI के मानद अध्यक्ष हर्वे डेल्फिन ने कहा कि EU-India FTA एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने इसे दुनिया के सबसे अहम ट्रेड समझौतों में से एक बताते हुए कहा कि यह “Mother of All Deals” लगभग 2 अरब लोगों के साझा बाज़ार और वैश्विक GDP के करीब 25% हिस्से को कवर करता है और दो-तरफ़ा व्यापार के लिए एक स्थिर और दीर्घकालिक ढांचा प्रदान करेगा।
• लगभग 95% EU कंपनियां अगले 5 वर्षों में भारत में अपने ऑपरेशंस विस्तार की योजना बना रही हैं।• 90% कंपनियां भारत में मुनाफे में, भारत EU बिज़नेस के लिए कोर मार्केट बना।
• EU–India FTA को 2 अरब आबादी और करीब 25% वैश्विक GDP को जोड़ने वाला ऐतिहासिक समझौता बताया गया।
वर्तमान में यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-EU के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 190 अरब यूरो तक पहुंच गया, जबकि 2025 तक EU का भारत में FDI स्टॉक 140 अरब यूरो रहा। भारत में करीब 6,000 यूरोपीय कंपनियां सक्रिय हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज़ और इनोवेशन इकोसिस्टम में लाखों लोगों को रोज़गार दे रही हैं।
FEBI अध्यक्ष और एयरबस इंडिया एंड साउथ एशिया के प्रेसिडेंट जुर्गन वेस्टरमायर ने कहा कि यूरोपीय कंपनियों का भारत के प्रति दीर्घकालिक भरोसा बेहद मज़बूत है, लेकिन इसके लिए नीति स्थिरता, पारदर्शी रेगुलेटरी प्रक्रियाएं, बेहतर लॉजिस्टिक्स और आसान अनुपालन बेहद ज़रूरी हैं।
वहीं FEBI के उपाध्यक्ष और श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया के सीईओ दीपक शर्मा ने कहा कि भारत तेजी से ग्लोबल प्रोडक्शन और इनोवेशन नेटवर्क का अहम केंद्र बन रहा है। EU कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने, एडवांस टेक्नोलॉजी लोकलाइज़ करने और सस्टेनेबिलिटी को सप्लाई चेन का हिस्सा बनाने पर फोकस कर रही हैं।
FEBI की सेक्रेटरी जनरल सोनिया प्रसार के मुताबिक़, यह सर्वे न सिर्फ़ बिज़नेस सेंटिमेंट दिखाता है, बल्कि रेगुलेटरी अप्रूवल, कस्टम्स और पॉलिसी इम्प्लीमेंटेशन जैसे क्षेत्रों में सुधार की ज़रूरत की ओर भी इशारा करता है, जिससे निवेश को और तेज़ किया जा सके।
2024 में लॉन्च हुआ FEBI आज भारत में काम कर रही यूरोपीय कंपनियों की एक मज़बूत साझा आवाज़ बन चुका है और EU-India व्यापार व निवेश संबंधों को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
