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आबकारी नीति मामले में केजरीवाल को ED का 5वां समन, 4 बार पेश नहीं हुए दिल्ली के CM

  • Written by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 31, 2024, 03:55 PM IST

ED 5th Summon to Arvind Kejriwal : केजरीवाल समन में अस्पष्टता का हवाला देकर पेश होने से बचते रहे हैं। दिल्ली के सीएम का कहना है कि ईडी किस रूप में उन्हें पूछताछ के लिए बुलाना चाहता है, उसे यह स्पष्ट करना चाहिए। पांचवें समन के बाद केजरीवाल पेश होते हैं कि यह देखने वाली बात होगी।

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ईडी के सामने पेशी से बचते रहे हैं केजरीवाल।

Photo : PTI

ED 5th Summon to Arvind Kejriwal : दिल्ली आबकारी नीति मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को समन जारी किया है। मामले में पूछताछ के लिए ईडी का यह पांचवां समन है। ईडी ने पूछताछ के लिए उन्हें दो फरवरी को बुलाया है। अब तक के चार समन में केजरीवाल जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए हैं। ईडी ने पहला समन नवंबर 2023 में जारी किया था। केजरीवाल समन में अस्पष्टता का हवाला देकर पेश होने से बचते रहे हैं।

दिल्ली के सीएम का कहना है कि ईडी किस रूप में उन्हें पूछताछ के लिए बुलाना चाहता है, उसे यह स्पष्ट करना चाहिए। पांचवें समन के बाद केजरीवाल पेश होते हैं कि यह देखने वाली बात होगी।

चौथे समन में केजरीवाल को 18 जनवरी को पेश होना था

ईडी ने अपने चौथे समन में केजरीवाल को 18 जनवरी को पेश होने के लिए कहा था। इस समन पर केजरीवाल ने कहा कि वह आरोपी नहीं हैं, इसलिए पेश नहीं हुए। इसके बाद वह पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान एवं अन्य नेताओं के साथ तीन दिन की गोवा यात्रा पर निकल गए। जांच एजेंसी ने अपने तीसरे समन में केजरीवाल को तीन जनवरी को पेश होने के लिए कहा था। इस समन को दिल्ली के सीएम ने 'अवैध' बताया। उन्होंने कहा कि वह राज्यसभा के लिए पार्टी एवं गणतंत्र दिवस की तैयारियों में व्यस्त हैं। बीत साल नवंबर एवं दिसंबर में भी केजरीवाल को समन जारी हुए थे। उन्हें दो नवंबर और 21 दिसंबर को पेश होने के लिए कहा गया था लेकिन वह पेश नहीं हुए।

क्या है आरोपआरोप है कि शराब व्यापारियों को लाइसेंस देने के लिए दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति में कुछ शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाया गया, जिन्होंने कथित तौर पर इसके लिए रिश्वत दी थी। हालांकि, आम आदमी पार्टी आरोपों का बार-बार इसका खंडन करती रही है। बाद में इस नीति को वापस ले लिया गया और दिल्ली के उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराने की सिफारिश की थी। इसके बाद ईडी ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया था।

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