प्रवर्तन निदेशालय ने म्यांमार से भारत में हेरोइन,ब्राउन शुगर और मेथामफेटामाइन की तस्करी से जुड़े नार्को-हवाला नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के आइजोल और इंफाल सब-जोनल कार्यालयों ने 23 अक्टूबर 2026 को मिजोरम और मणिपुर में कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया,जबकि ड्रग्स की कमाई को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे 1,424 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया।
ED ने मिजोरम में हवाला नेटवर्क से जुड़ी 17.82 करोड़ की संपत्ति भी अटैच की है। इससे पहले ₹8.19 करोड़ की संपत्ति बैंक खातों के रूप में सुरक्षित की गई थी। इस तरह कुल सुरक्षित संपत्तियों का मूल्य ₹26 करोड़ से अधिक हो गया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA),2002 के तहत की गई। छापेमारी में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और मिजोरम पुलिस ने भी सहयोग किया।
तीन ड्रग्स मामलों की जांच से खुला नेटवर्क
ईडी की जांच तीन अलग-अलग NDPS मामलों से शुरू हुई थी। एजेंसी के मुताबिक,इन मामलों की जांच में म्यांमार से ड्रग्स की सप्लाई, पूर्वोत्तर राज्यों में उनकी बिक्री और हवाला के जरिए ड्रग्स के पैसे को वापस म्यांमार भेजने के बीच कनेक्शन सामने आया। पहला मामला मिजोरम के क्रिशिव एंटरप्राइजेज से जुड़ा है। 14 मार्च 2025 को चम्फाई जिले के जोखावथार में पुलिस ने 4.722 किलोग्राम हेरोइन जब्त की थी। यह खेप म्यांमार के एक सप्लायर के लिए आइजोल ले जाई जा रही थी।
दूसरे मामले में 21 अगस्त 2025 को NCB ने मिजोरम के सेलिंग के पास NH-06A पर एक काफिले से 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट और 40 ग्राम हेरोइन जब्त की थी। जांच के अनुसार, ड्रग्स की सप्लाई म्यांमार के चिंतुआंग से हुई थी। तीसरा मामला मणिपुर के चुराचांदपुर का है। यहां 2 जुलाई 2026 को पुलिस ने 2.413 किलोग्राम ब्राउन शुगर और 31.43 लाख नकद जब्त किए थे। ED के मुताबिक, यह नकदी म्यांमार से आए ड्रग्स की बिक्री से प्राप्त रकम थी, जिसे सप्लायरों तक पहुंचाया जाना था।
म्यांमार से ड्रग्स,भारत से केमिकल की सप्लाई
जांच में भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित चम्फाई-जोखावथार कॉरिडोर को इस नेटवर्क का अहम केंद्र बताया गया है। ईडी के अनुसार, इस रास्ते का इस्तेमाल दोनों दिशाओं में होता था। एक ओर म्यांमार से तैयार ड्रग्स भारत लाए जाते थे,तो दूसरी ओर ड्रग्स की गोलियां तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल भारत से म्यांमार भेजे जाते थे।ED की जांच में सामने आया कि क्रिशिव एंटरप्राइजेज ने मार्च से नवंबर 2024 के बीच 15 खेपों में करीब 32 टन कैफीन एनहाइड्रस भेजा। इसके अलावा करीब 10 टन एल्युमिनियम क्लोराइड एनहाइड्रस की सप्लाई भी की गई। आरोप है कि ये केमिकल ऐसे छोटे मेडिकल स्टोर, जनरल स्टोर और अन्य फ्रंट कारोबारों के जरिए आगे भेजे जाते थे, जिनके पास खुद कोई मैन्युफैक्चरिंग या प्रोसेसिंग सुविधा नहीं थी। जांच एजेंसी के अनुसार, म्यांमार में मेथामफेटामाइन को मिलाकर याबा टैबलेट तैयार करने में कैफीन का इस्तेमाल किया जाता था।
दूसरी ओर,म्यांमार में तैयार हेरोइन,ब्राउन शुगर और मेथामफेटामाइन को तियाउ नदी पार कर जोखावथार के रास्ते चम्फाई लाया जाता था। इसके बाद खेपों को आइजोल और NH-06A के रास्ते असम तथा त्रिपुरा की ओर भेजा जाता था। कुछ खेपों को आगे भारत के दूसरे हिस्सों और बांग्लादेश तक पहुंचाए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
मिनी ATM के जरिए रोजाना 1 करोड़ तक की रकम ट्रांसफर
इस पूरे नेटवर्क में मणिपुर के चुराचांदपुर स्थित मिनी ATM और कस्टमर सर्विस पॉइंट (CSP) काउंटरों की भूमिका भी सामने आई है। ED के मुताबिक, आरोपी जेनगाइह्नियांग उर्फ तानियांग के जरिए ड्रग्स की बिक्री से जुटाई गई नकदी बैंकिंग सिस्टम में डाली जाती थी। आरोप है कि तानियांग चुराचांदपुर में H. Gouzalal द्वारा संचालित M/s Go Alpha Trip नाम के मिनी ATM और मनी ट्रांसफर काउंटर पर प्रतिदिन ₹1 करोड़ तक जमा कराती थी। इसके साथ लाभार्थी बैंक खातों की सूची भी दी जाती थी। जांच के अनुसार, इस काउंटर ने 2024 से जून 2026 के बीच 2,947 ट्रांजैक्शन के जरिए कुल ₹175.03 करोड़ ट्रांसफर किए। रकम का एक हिस्सा दूसरे काउंटरों और फ्रंट कंपनियों के जरिए आगे भेजा गया,ताकि पैसे के असली स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाए।
ED का आरोप है कि मिजोरम में कुछ लोगों ने अपने बैंक खाते कथित नार्को-हवाला ऑपरेटरों को 500 प्रति लाख के हिसाब से इस्तेमाल करने के लिए दिए थे। इन खातों में बड़ी रकम आती थी,जिसे कुछ ही दिनों में RTGS,NEFT और IMPS के जरिए दूसरे खातों में भेज दिया जाता था।
एजेंसी के अनुसार,जांच के लिए चुने गए सात खातों में 11.98 करोड़ आए,लेकिन इनमें से केवल ₹17 लाख नकद निकाले गए। चम्फाई की एक गृहिणी के बैंक खाते में ही ₹15.48 करोड़ जमा हुए,जबकि परिवार की मासिक आय लगभग 27,000 बताई गई।
हवाला खातों में ₹268.80 करोड़ के ट्रांजैक्शन
ED की जांच में चम्फाई के हवाला ऑपरेटरों लालरामपारी और उनके पति लल्लियांसांगा का नाम सामने आया है। लल्लियांसांगा M/s JTS Store के मालिक बताए गए हैं। एजेंसी के अनुसार,इनसे जुड़े खातों में लगभग 268.80 करोड़ जमा हुए। इसमें असम, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और दिल्ली से आए करीब 125 करोड़ नकद भी शामिल थे।जांच में कोलकाता की कथित शेल कंपनियों से हवाला ऑपरेटर लालरिंकिमा के खाते में लगभग 2.14 करोड़ और हावड़ा स्थित एक कथित शेल कंपनी से तानियांग के खाते में 10 लाख आने की बात भी सामने आई। ED के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए बड़े शहरों में ड्रग्स बेचकर कमाए गए पैसे को कई स्तरों पर ट्रांसफर करके पूर्वोत्तर के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद म्यांमार में बैठे सप्लायरों को क्यात मुद्रा में भुगतान किया जाता था। इस काम के बदले कथित ऑपरेटरों को प्रति लाख 250 से 500 तक कमीशन मिलता था।
ड्रग्स की कमाई से पांच मंजिला होटल बनाने का आरोप
ED ने चम्फाई के जिऑन वेंग इलाके में स्थित होटल JTS को अटैच किया है। यह पांच मंजिला व्यावसायिक इमारत 571.11 वर्ग मीटर जमीन पर बनी है और इसकी कीमत 17.82 करोड़ आंकी गई है। यह संपत्ति लल्लियांसांगा के नाम पर दर्ज बताई गई है। ED का आरोप है कि हवाला खातों के जरिए पहुंचाई गई रकम का इस्तेमाल इस होटल और अन्य कारोबारों तथा रियल एस्टेट में निवेश के लिए किया गया।
छह आरोपी गिरफ्तार
ED ने PMLA की धारा 19 के तहत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है-
मिजोरम से गिरफ्तार आरोपी
- थांगखुआला-चम्फाई।
- टी. चुआतुआन वानलालगखा-आइजोल
मणिपुर से गिरफ्तार आरोपी
- जेनगाइह्नियांग उर्फ तानियांग-चुराचांदपुर
- नेनगजुआतुआन वाल्टे उर्फ तुआनपी-चुराचांदपुर
- एच. गूजालाल-चुराचांदपुर
ED के मुताबिक, तानियांग और तुआनपी पहले से NDPS मामलों में न्यायिक हिरासत में थे। उन्हें संबंधित विशेष अदालत की अनुमति से औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। मिजोरम में चार अन्य आरोपियों के खिलाफ भी गिरफ्तारी की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अदालत में आवेदन की प्रक्रिया जारी है।
1,424 बैंक खाते फ्रीज, डिजिटल सबूत जब्त
छापेमारी के दौरान ED ने ड्रग्स कारोबार, हवाला लेनदेन और कथित म्यूल खातों से जुड़े 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया। इसके अलावा नकदी के लेनदेन और बैंक ट्रांसफर का हिसाब रखने वाली डायरियां, चेकबुक, डेबिट कार्ड, मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए। ED का कहना है कि Go Alpha Trip के रिकॉर्ड और मिजोरम के कई बैंक खातों में हुए ट्रांजैक्शन के मिलान से मणिपुर में जुटाई गई ड्रग्स की रकम और मिजोरम के हवाला नेटवर्क के बीच संबंध सामने आया है।एजेंसी अब मिनी ATM/CSP काउंटरों के अन्य ग्राहकों, लाभार्थी खाताधारकों,म्यांमार में रकम प्राप्त करने वालों, केमिकल के अंतिम उपयोगकर्ताओं और बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही, अपराध से अर्जित अन्य संपत्तियों का पता लगाने और उन्हें अटैच करने की कार्रवाई भी जारी है। ED के मुताबिक, इस कार्रवाई का उद्देश्य ड्रग्स तस्करी को आर्थिक मदद देने वाले नेटवर्क को तोड़ना और नशामुक्त भारत अभियान को मजबूत करना है।
