JNU Graffiti War: जामिया मिलिया इस्लामिया के बाद अब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में भी दीवारों पर लिखे गए विवादास्पद नारों और 'ग्रेफिटी' को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। कैंपस की दीवारों पर 'फ्री उमर खालिद', 'नक्सलबाड़ी जिंदाबाद' और अन्य राजनीतिक नारे देखे गए हैं, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आ गया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके बाद दीवारों पर 'अखंड भारत' के नारे दिखाई दिए हैं।
पूरा विवाद और दीवारों पर क्या लिखा मिला?
जामिया यूनिवर्सिटी में हाल ही में छात्रसंघ चुनाव की मांग और प्रदर्शन के दौरान 'फ्री कश्मीर' व 'फ्री शरजील इमाम' जैसे नारे मिलने के बाद, अब जेएनयू परिसर में भी इसी तरह की नारेबाजी सामने आई हैं। जेएनयू की दीवारों पर पूर्व जेएनयू छात्र और जेल में बंद उमर खालिद की रिहाई की मांग करते हुए 'Free Umar Khalid' और 'Long Live Naxalbari' (नक्सलबाड़ी जिंदाबाद) जैसे नारे लिखे गए। इसके अलावा 'आरएसएस गो बैक' (RSS Go Back) और 'वीसी गो बैक' जैसे संदेश भी दीवारों पर उकेरे गए।
'अखंड भारत' और वैचारिक टकराव
वामपंथी और अन्य छात्र समूहों के बीच चल रहे इस वैचारिक संघर्ष के दौरान कैंपस में विभिन्न संदेशों और नारों के जरिए दीवारों पर बयानबाजी तेज हो गई है, जिसे छात्र हलकों में 'ग्रेफिटी वॉर' कहा जा रहा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की JNU इकाई ने इन घटनाओं पर कड़ी आपत्ति जताई है और वामपंथी छात्र संगठनों पर कैंपस का शैक्षणिक माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया है।
एबीवीपी का आरोप है कि सोशल मीडिया और कैंपस से सामने आई तस्वीरों में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के सदस्य हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर के चित्र के पास आपत्तिजनक बातें लिखते हुए दिखाई दे रहे हैं। ABVP के JNU अध्यक्ष मयंक पंचाल और सचिव प्रवीण पियूष ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर राष्ट्रीय व्यक्तित्वों का अपमान करना और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे कृत्यों में शामिल लोगों की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
JNU प्रशासन की प्रतिक्रिया
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पूरे मामले का कड़े शब्दों में संज्ञान लिया है। JNU के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कैंपस की शांति और शैक्षणिक माहौल को खराब करने वाले किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस बात की भी जांच की जा रही है कि ये नारे किसने और कब लिखे। हालांकि, शुरुआती जांच में यह बात भी सामने आई है कि घटना स्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरों के तार कटे हुए मिले हैं, जिससे आरोपियों की पहचान करने में तकनीकी बाधा आ रही है।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब देश के प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों (जैसे जामिया और जेएनयू) में छात्र राजनीति, छात्रसंघ चुनावों की बहाली और विभिन्न वैचारिक मुद्दों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन लगातार तेज हो रहा है। JNU में इस ताजा दीवार लेखन और नारों के बाद राजनीतिक और छात्र संगठनों के बीच सरगर्मी काफी बढ़ गई है।
