अंडमान-निकोबार में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एजेंसी ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है जिनमें शामिल हैं—पूर्व सांसद और अंडमान-निकोबार स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (ANSCBL) के पूर्व चेयरमैन कुलदीप राय शर्मा, बैंक के प्रबंध निदेशक के. मुरुगन और लोन ऑफिसर के. कलैवनन।
एजेंसी का कहना है कि यह अंडमान-निकोबार का अब तक का सबसे बड़ा बैंक घोटाला है।जांच में सामने आया है कि बैंक अधिकारियों ने 100 से ज्यादा फर्जी लोन अकाउंट्स खोले। इन खातों में शेल कंपनियों (कागज़ी कंपनियों) के नाम पर करोड़ों रुपये के लोन मंजूर किए गए। इन पैसों को चुकाने की नीयत कभी थी ही नहीं। पूरा खेल सिर्फ निजी फायदे और पैसों की हेराफेरी के लिए रचा गया।
करीब 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान बैंक को हुआ। इनमें से 230 करोड़ रुपये सीधे तौर पर कुलदीप राय शर्मा और उनके करीबियों को पहुंचे।MD के. मुरुगन और लोन ऑफिसर के. कलैवनन ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर भी लोन हासिल किए। कई बार लोन मंजूरी के बदले में 5%कमीशन लिया गया। यह रकम कैश में या शेल कंपनियों के अकाउंट्स से वसूली जाती थी।
ED की कार्रवाई और छापेमारी। इस मामले में ED ने पहले भी 31 जुलाई और 1 अगस्त 2025 को 21 ठिकानों पर छापे मारे थे। अब ताज़ा कार्रवाई में तीन और जगहों पर तलाशी ली जा रही है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि लोन की बड़ी रकम को शेल कंपनियों के जरिए घुमाया गया और फिर कैश में निकालकर वरिष्ठ बैंक अधिकारियों के बीच बांटा गया। ED अधिकारियों का कहना है कि घोटाले से जुड़ी परतें अभी खुलनी बाकी हैं और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
