पेंगुइन इंडिया को दिल्ली पुलिस का नोटिस, पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब कैसे हुई सर्कुलेट? पूछे जाएंगे सवाल
- Edited by: Nitin Arora
- Updated Feb 11, 2026, 12:14 PM IST
MM Naravane Book Row: दिल्ली पुलिस ने कहा कि स्पेशल सेल ने नोटिस के जरिए पब्लिशिंग हाउस से फॉर्मली संपर्क किया है, कई सवाल पूछे हैं और डिटेल में जवाब मांगे हैं।
पेंगुइन इंडिया को दिल्ली पुलिस का नोटिस
Penguin India Gets Delhi Police Notice: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया को एक नोटिस जारी करके पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब के सोशल मीडिया पर सर्कुलेशन पर जवाब मांगा है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। यह नोटिस इसलिए दिया गया क्योंकि किताब के स्टेटस को लेकर अलग-अलग दावे और बिना इजाजत वाले वर्जन के सर्कुलेशन में तेजी आई, जिससे पब्लिशर, पूर्व आर्मी चीफ और सीनियर पॉलिटिकल हस्तियां एक बड़े पब्लिक विवाद में फंस गईं।
पुलिस के मुताबिक, स्पेशल सेल ने नोटिस के जरिए पब्लिशिंग हाउस से फॉर्मली संपर्क किया है, कई सवाल पूछे हैं और डिटेल में जवाब मांगे हैं।
एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा, 'दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने पेंगुइन इंडिया को एक नोटिस जारी किया है। नोटिस के जरिए कई सवाल पूछे गए हैं और जवाब मांगे गए हैं।'
क्या है यह विवाद?
दरअसल, नरवणे की यादों की किताब, जिसका टाइटल 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' है, यह कैसे बाजार में आई, इसपर सवाल है और इसी से ही आगे बना विवाद है। क्या किताब के पब्लिकेशन से पहले डिजिटल और दूसरे फॉर्मेट में गैर-कानूनी तरीके से इसे सर्कुलेट किया गया हो सकता है?
पुलिस ने कहा कि मैन्युस्क्रिप्ट के बिना इजाजत के बांटने के आरोपों के कारण FIR दर्ज की गई है और मामले की जांच चल रही है।
राहुल गांधी से चर्चा शुरू
बता दें कि 2024 में पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे (रिटायर्ड) की यादों पर आधारित किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' रिलीज होने वाली थी, बुकस्टोर्स प्री-ऑर्डर ले रहे थे और पाठक इसे ऑनलाइन प्री-बुक कर रहे थे। हालांकि, लॉन्च रोक दिया गया। अब 2026 है और किताब अभी भी पब्लिश नहीं हुई है। लेकिन पिछले हफ्ते जनरल नरवणे की किताब की एक हार्डबैक कॉपी सामने आई, ब्लैक मार्केट में नहीं, बल्कि संसद में, विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हाथों में। वह जो लहरा रहे थे, वह कोई मैन्युस्क्रिप्ट नहीं थी, बल्कि किताब की एक छपी हुई हार्डकवर कॉपी थी। तभी से यह चर्चा में है।
सवाल साफ है: एक ऐसी किताब, जिसे रक्षा मंत्रालय (MoD) से मंजूरी के बिना पब्लिश नहीं किया जाना था और जिसके बारे में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि 'ऐसी कोई किताब है ही नहीं', वह राहुल गांधी तक कैसे पहुंची? आखिर यह सवाल सभी के ध्यान में आया। लेकिन ऐसा कैसे हुआ। बस इसी की जांच के तहत मामला दर्ज किया गया है।
ज्यादा जानकारी के लिए यह पढ़ें- जनरल नरवणे की किताब में ऐसा क्या, जो राजनाथ सिंह भड़के और जब बुक छपी नहीं तो राहुल गांधी को कैसे मिली? जानें- हर सवाल का जवाब
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