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गौतम गंभीर को राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने फ्लैट बायर्स के साथ धोखाधड़ी मामले में निचली अदालत के आदेश पर लगाई रोक

Cricketer Gautam Gambhir: होम बायर्स (घर खरीदारों) के साथ धोखाधड़ी मामले में मजिस्ट्रेट अदालत ने गौतम गंभीर को आरोप मुक्त कर दिया था। हालांकि, सत्र न्यायालय ने उक्त आदेश को खारिज करते हुए जांच के आदेश दिए थे। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने इस आदेश को रद्द कर दिया है।

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गौतम गंभीर।

Photo : ANI

Cricketer Gautam Gambhir: पूर्व क्रिकेटर और भारतीय टीम के कोच गौतम गंभीर को फ्लैट बायर्स के साथ धोखाधड़ी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने फ्लैट खरीदारों को कथित तौर पर धोखा देने के मामले में पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर को बरी किए जाने का फैसला रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है।

बता दें, होम बायर्स (घर खरीदारों) के साथ धोखाधड़ी मामले में मजिस्ट्रेट अदालत ने गौतम गंभीर को आरोप मुक्त कर दिया था। हालांकि, सत्र न्यायालय ने उक्त आदेश को खारिज कर दिया था और गौतम गंभीर के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने सत्र न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी है।

दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने अंतरिम आदेश पारित किया तथा गंभीर की उस याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा, जिसमें उन्होंने सत्र न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें मामले में उन्हें आरोपमुक्त करने वाले मजिस्ट्रेट न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने कहा कि विस्तृत आदेश बाद में पारित किया जाएगा। बता दें, 29 अक्टूबर के अपने आदेश में, सत्र न्यायालय ने कहा था कि मजिस्ट्रेट न्यायालय के निर्णय में गंभीर के खिलाफ आरोपों पर निर्णय लेने में पर्याप्त मानसिक अभिव्यक्ति परिलक्षित होती है। इसमें कहा गया, आरोप गौतम गंभीर की भूमिका की आगे की जांच के भी योग्य हैं। सत्र न्यायालय ने मामले को मजिस्ट्रेट न्यायालय को वापस भेज दिया था, तथा उसे विस्तृत नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया था। धोखाधड़ी का मामला रियल एस्टेट कंपनियों रुद्र बिल्डवेल रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड, एच आर इंफ्रासिटी प्राइवेट लिमिटेड, यू एम आर्किटेक्चर एंड कॉन्ट्रैक्टर्स लिमिटेड और गंभीर के खिलाफ दर्ज किया गया था, जो इन कंपनियों के संयुक्त उद्यम के निदेशक और ब्रांड एंबेसडर थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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