Manish Sisodia : मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी पर विरोध और समर्थन को लेकर पशोपेश में उलझी कांग्रेस से एक और खबर निकल कर सामने आई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय कांग्रेस और दिल्ली कांग्रेस के बीच के कन्फ्यूजन को खत्म करने के लिए आलाकमान ने अब एक फॉर्मूला निकाल लिया है। नए फॉर्मूले के तहत कांग्रेस पार्टी की राज्य इकाई यानी कि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमिटी को ये खुली छूट दे दी गई है कि वो आम आदमी पार्टी के खिलाफ़ सियासी लड़ाई जारी रखे। इसके लिए कांग्रेस ने वामदलों वाला फॉर्मूला आप के साथ भी लागू करने का फैसला किया है। इसका मतलब ये होगा कि जैसे केरल में कांग्रेस लेफ्ट के खिलाफ खड़ी रहती है लेकिन केंद्र की राजनीति में साथ वैसा ही आम आदमी पार्टी के साथ होगा। यानी कांग्रेस पार्टी भविष्य में संसद या केंद्रीय स्तर पर विपक्षी एकता के नाम पर आम आदमी पार्टी के लिए रास्ता खुला रखेगी।
विपक्षी एकता के लिए AAP मजबूरी या जरूरत, अभी तय नहीं
बिहार से जेडीयू और राजद, महाराष्ट्र से शिवसेना(उद्धव गुट) ने कांग्रेस पर दबाव डालकर मनीष सिसोदिया के खिलाफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई के मामले पर सहयोग मांगा। जिसके बाद पार्टी के मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने दिल्ली कांग्रेस कमिटी को भरोसे में लिए बिना ही ट्वीट में गिरफ्तारी का विरोध कर दिया। लेकिन इसके बाद न सिर्फ दिल्ली बल्कि पंजाब, गुजरात और गोवा की प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने नाराज़गी जाहिर करते हुए केंद्रीय कांग्रेस के स्टैंड पर प्रश्नचिन्ह लगा दिए।कांग्रेस की राज्य इकाइयों का ये तर्क था कि इसी आम आदमी पार्टी ने सोनिया-राहुल से ईडी की पूछताछ के वक़्त राष्ट्रपति को दिए जाने वाले ज्ञापन में दस्तखत करने से मना कर दिया था। इसके अलावा इन सभी राज्यों में आप से सियासी लड़ाई नहीं लड़ने पर कांग्रेस पार्टी अपना वोट बैंक भी खो देगी। तेजतर्रार कांग्रेस नेता अलका लांबा का ये मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को सातों सीट पर अकेले चुनाव लड़ना चाहिए। क्योंकि बीजेपी की बी टीम के रूप में आम आदमी पार्टी का एजेंडा कांग्रेस को कमजोर करना है।
आप के खिलाफ एक्टिव हुई दिल्ली कांग्रेस
मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी पर बीच का रास्ता निकलने के बाद दिल्ली के नेताओं ने भी राहत की सांस ली है। बुधवार को पूरे दिन कांग्रेस ने आप के खिलाफ मोर्चा खोला रखा। पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली के उपराज्यपाल से मुलाकात की और जासूसी मामले(फीडबैक यूनिट) में सिसोदिया के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की। दूसरी तरफ दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल चौधरी की अगुवाई में आम आदमी पार्टी दफ्तर का घेराव हुआ।
कांग्रेस बिना विपक्ष का सपना देखने वाली पार्टियां है बीजेपी की बी टीम: राहुल
अजय माकन प्रकरण के बाद फिलहाल कांग्रेस आलाकमान ने बीच रास्ता तो निकाला है। जहां पार्टी के पुराने नेताओं का एक बड़ा गुट हर कीमत पर 2024 में विपक्षी एकजुटता की आखिर तक कोशिश कर लेना चाहता है। वहीं एक तबका भारत राष्ट्र समिति, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के साथ आने की उम्मीद छोड़कर इन पर हमलावर है। ये वो धड़ा है जो राहुल गांधी की थॉट पॉलिटिक्स के साथ है जिसका मानना है कि कांग्रेस को अपने ही संगठन की मजबूती पर केंद्र की सत्ता पर काबिज होना चाहिए।
