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'तो क्या अब 230 से अधिक सांसदों को करेंगे निलंबित?', जानें कांग्रेस ने क्यों उठाया ये मुद्दा; समझिए सियासत

Congress vs BJP: कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए ये सवाल किया है कि क्या अब 230 से अधिक सांसदों को निलंबित करेंगे। उन्होंने ये दावा किया कि ये सरकार 5 साल नहीं चलेगी। आपको समझाते हैं कि आखिर सरकार गठन के दूसरे ही दिन इस मुद्दे को क्यों उठाया गया और इसके पीछे की सियासत क्या है।

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कांग्रेस ने उठाया सांसदों के निलंबन का मुद्दा।

Photo : Times Now Digital

Congress Slams Modi Sarkar 3.0: नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, मंत्रियों के विभागों के बंटवारे हो गए, सभी ने अपना-अपना कार्यभार संभाल लिया, अब मोदी 3.0 फुल ऑन एक्शन मोड में नजर आ रही है। इस बीच कांग्रेस पार्टी ने नए सियासी मुद्दे को तूल दे दिया है। कांग्रेस नेता ने पिछली सरकार में विपक्षी दलों के 146 सांसदों के निलंबन के मुद्दे को तूल देते हुए सरकार और भाजपा पर तीखा तंज कसा है।

कांग्रेस ने सांसदों के निलंबन के मुद्दे को क्यों उठाया?

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए ये सवाल किया है कि क्या अब 230 से अधिक सांसदों को निलंबित करेंगे। आपको समझाते हैं कि आखिर कांग्रेस ने सरकार गठन के दूसरे ही दिन इस मुद्दे को क्यों उठाया और इसके पीछे की सियासत क्या है। दरअसल, गोगोई ने आरोप लगाया है कि संसदीय लोकतंत्र के प्रति भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दृष्टिकोण तब तक नहीं बदलेगा जब तक नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि फुटबाल के खेल की तरह संसद में इस बार विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की रक्षा पंक्ति बहुत मजबूत हो गई क्योंकि उसके पास 230 से अधिक सांसद हैं।

यहां ये समझना जरूरी है कि कांग्रेस ने सरकार गठन के तुरंत बाद इस मुद्दे को तूल क्यों दिया। दरअसल, सदन में संख्या बल अधिक होने के बाद विपक्ष इस बार मोदी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है। शुरुआत से ही वो जरा भी मौका नहीं देना चाहता, जिसके लिए उसने अभी से ही अपने सियासी चाल चलनी शुरू कर दी है।

'मोदी सरकार नहीं पूरा कर पाएगी 5 साल का कार्यकाल'

कांग्रेस नेता गोगोई ने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व शैली यह विश्वास पैदा नहीं करती कि यह सरकार पांच साल सफलतापूर्वक चल सकती है।

'पिछले साल 146 सांसदों को कर दिया था निलंबित'

असम के जोरहाट से लोकसभा सदस्य गोगोई ने कहा, 'मैं देख रहा हूं कि ‘इंडिया’ गठबंधन के 236 सांसदों की उपस्थिति में यह एक ऐसी संसद होगी जहां वे (सत्तापक्ष) विधेयकों को मनममाने ढंग से पारित नहीं करा सकते, हमें डरा नहीं सकते, हमें निलंबित नहीं कर सकते।' उन्होंने सवाल किया, 'सरकार ने (पिछले साल) 146 सांसदों को निलंबित करा दिया था। क्या वे इस बार 236 को निलंबित करेंगे?' गोगोई पिछली लोकसभा में सदन के भीतर कांग्रेस के उप नेता थे।

नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू पर क्या बोले गोगोई?

गोगोई ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि राजग की सहयोगी तेलुगू देशम पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडू और जनता दल (यू) के नेता नीतीश कुमार ने सरकार गठन में सबकुछ भाजपा पर छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि इन दोनों नेताओं के पास ‘बेहद चतुर राजनीतिक दिमाग’ है और उन्हें आंकने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए क्योंकि ‘केवल समय ही बताएगा कि कि उनके असल इरादे क्या हैं।’

'अग्निपथ योजना को हटाने की मांग करते रहेंगे'

कांग्रेस नेता ने कहा कि जब तक मोदी प्रधानमंत्री हैं तब तक उन्हें संसदीय लोकतंत्र के प्रति भाजपा के दृष्टिकोण में बदलाव की उम्मीद नहीं है। गोगोई का कहना था, 'उनके पास अपनी पार्टी के भीतर ही अपना दृष्टिकोण बदलने का लचीलापन नहीं है... प्रधानमंत्री कार्यालय कैबिनेट सहयोगियों को निर्देशित करेगा। सहयोगी दल अपने राज्यों को विशेष दर्जा देने, जाति जनगणना कराने, ‘अग्निपथ’ योजना को हटाने की मांग करते रहेंगे लेकिन मुझे नहीं लगता कि सहयोगी दलों को लेकर उनका (मोदी) दृष्टिकोण बदल जाएगा।'

उनका कहना है, 'जब तक मोदी प्रधानमंत्री हैं, मुझे नहीं लगता कि संसद के प्रति उनका दृष्टिकोण बदलने वाला है। वे अभी भी दबाव डालने, निलंबित करवाने, अयोग्य घोषित कराने, निशाना बनाने की कोशिश करेंगे। लेकिन हां, फुटबाल की तरह, जहां पहले तीन रक्षक थे, हमारी दीवार (रक्षकों की) अब बड़ी और अधिक मजबूत है।' गोगोई ने कहा, 'यह हमारी (विपक्ष की) भूमिका है और जनता हमसे यही उम्मीद करती है। जनता ने हमें इसी के लिए वोट दिया है और हम यही करने की उम्मीद करते हैं।'

'जनता ने प्रधानमंत्री मोदी को विनम्रता का पाठ पढ़ाया'

उन्होंने कहा कि इस चुनाव का सार यही है कि भारत की जनता ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘‘विनम्रता का पाठ’’ पढ़ाया है। असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई ने कहा कि चुनावों में जो आंकड़े सामने आए हैं और जो हालात हैं, उन्हें देखते हुए यह नहीं लगता कि मोदी में गठबंधन सरकार चलाने की क्षमता है।

गोगोई का कहना है, 'मोदी जी अपने मंत्रिमंडल तक को विश्वास में नहीं लेते। जब उन्होंने नोटबंदी की, तो वित्त मंत्री को पता नहीं था। जब उन्होंने अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया, तो उनके मंत्रिमंडल को पता नहीं था। जब वह ‘अग्निपथ’ लाए, तो उनके मंत्रिमंडल को पता नहीं था। इसलिए जो व्यक्ति अपने मंत्रिमंडल को भी विश्वास में नहीं ले सकता, वह राजग को कैसे विश्वास में लेगा?'

उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार के सुचारु रूप से काम करने के लिए एक खुले दिमाग, एक समावेशी दृष्टिकोण, सुनने की क्षमता और लचीला होना आवश्यक है जैसा अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के नेतृत्व में हुआ था। चुनाव में कांग्रेस के विजयी होने के दावे के विरोध में भाजपा के तर्क के बारे में पूछे जाने पर गोगोई ने कहा कि भाजपा अकेले नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के रूप में लड़ी और कांग्रेस ‘इंडिया’ गठबंधन के रूप में लड़ रही थी तथा परिणाम को उस दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

इस बार के लोकसभा चुनाव में राजग को 293 सीट तो ‘इंडिया’ गठबंधन को 234 सीट मिलीं, लेकिन निर्दलीय सांसदों विशाल पाटिल और पप्पू यादव ने भी कांग्रेस के प्रति समर्थन का ऐलान किया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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