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राहुल के चेहरे पर तंज और गुस्सा दोनों, बोले-गांधी हूं सावरकर नहीं, किसी से नहीं डरता

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 25, 2023, 01:37 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी किए जाने के एक मानहानि मामले में राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई गई है। उनकी संसद सदस्यता भी रद्द कर दी गई है। इसके बाद कांग्रेस नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।

KEY HIGHLIGHTS
राहुल 'राग' के कुछ अंश
- हिंदुस्तान में लोकतंत्र पर हमला हो रहा है।
- मैंने संसद में सबूत देकर अपनी बात रखी।
- संसद में मेरे बारे में झूठ बोला गया।
- अडानी को लेकर सवाल पूछता रहूंगा।

Rahul Gandhi Press Conference: लोकसभा से अयोग्य घोषित किए जाने के बाद कांगेस नेता राहुल गांधी आज पहली बार मीडिया के सामने आए। उन्होंने प्रेसवार्ता कर कहा, हिंदुस्तान में लोकतंत्र पर हमला हो रहा है।

राहुल गांधी ने कहा, मैंने कई बार बोला है कि हिन्दुस्तान में लोकतंत्र पर आक्रमण हो रहा है। इसके हमें रोज नए-नए उदाहरण मिल रहे हैं। मैंने संसद में सबूत दिए, अडानी और PM मोदी के रिश्ते के बारे में बोला। मैंने स्पीकर को डिटेल चिट्ठी लिखी। प्वाइंट बाई प्वाइंट। मैंने कहा, अडानी जी को नियम बदल कर एयरपोर्ट दिए गए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। मेरे खिलाफ मंत्रियों ने झूठ बोला कि मैंने विदेशी ताकतों से मदद मांगी है। मैंने स्पीकर सर से कहा, संसद का नियम है कि अगर कोई सांसद पर आरोप लगाता है, तो सांसद को जवाब देने का हक है। मैंने चिट्ठी लिखी, उसका जवाब नहीं आया। मैं स्पीकर के रूम में गया। कहा, मुझे आप बोलने क्यों नहीं दे रहे हैं, वो मुस्कुराए कहा, मैं कुछ नहीं कर सकता।

मैं सवाल पूछता रहूंगा

राहुल गांधी ने कहा, मैं सवाल पूछने से पीछे नहीं हटूंगा। मैं फिर पूछता हूं कि 20 हजार करोड़ रुपये किसके हैं और अडानी का मोदी जी के साथ क्या रिश्ता है? अगर इनको लगता है कि मेरी सदस्यता रद्द करके, डराकर, धमकाकर, जेल भेजकर मुझे बंद कर सकते हैं, तो मुझे किसी चीज से डर नहीं लगता। उन्होंनें कहा, मैं हिंदुस्तान के लोकतंत्र के लिए लड़ रहा हूं, और लड़ता रहूंगा।

देखें राहुल गांधी की लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस-

राहुल 'राग' के कुछ अंश

  • सदन में अगला भाषण लिहाजा डर कर सरकार ने अयोग्य घोषित किया।
  • अगर स्थाई तौर पर अयोग्य घोषित करें तो भी सवाल पूछते रहेंगे।
  • मोदी के इशारे पर ध्यान भटकाने की कोशिश।
  • देश में लोकतंत्र पर आक्रमण हो रहा है।
  • स्पीकर से कहा कि कैंब्रिज में यह नहीं कहा कि लोकतंत्र खतरे में है।
  • संसद में सबूत देकर अपनी बात रखी।
  • संसद में मेरे बारे में झूठ बोला गया।
  • अडानी को लेकर सवाल पूछता रहूंगा।
  • देश के लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश करुंगा।
  • अयोग्यता मेरे लिए मतलब नहीं रखता, मैं डरता नहीं।
  • गांधी किसी से माफी नहीं मांगते, वो सावरकर नहीं है।

23 मार्च को सुनाई गई थी सजा

बता दें, 23 मार्च को सूरत की एक अदालत ने राहुल गांधी को मानहानि के मामले में दो साल की सजा सुनाई थी। इसके अलगे ही दिन यानी 24 मार्च को राहुल गांधी की संसद सदस्यता को रद्द कर दिया गया। इस फैसले के बाद राहुल गांधी अगले आठ साल तक चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।

कांग्रेस के साथ विपक्ष भी मुखर

राहुल गांधी को लेकर संसद के फैसले पर कांग्रेस से लेकर विपक्ष भी मुखर है। कांग्रेस ने जहां इस फैसले को लेकर भाजपा व केंद्र सरकार की आलोचना भी की है, तो विपक्षी पार्टियों का साथ भी राहुल गांधी को मिला है। आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे और तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है।

राहुल ने दी थी प्रतिक्रिया

सूरत कोर्ट द्वारा दोषी करान दिए जाने के बाद राहुल गांधी ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी थी, उन्होंने कहा था कि वह कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं। राहुल गांधी ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा था, मैं भारत की आवाज के लिए लड़ रहा हूं, मैं कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार हूं।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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