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'सस्ता पीआर स्टंट...', चुनावी वादों को लेकर अब खड़गे ने कर दिया पीएम मोदी पर पलटवार

Mallikarjun Kharge vs Pm Modi: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, BJP में 'बी' का मतलब Betrayal (विश्वासघात) है, जबकि 'जे' का मतलब जुमला (JUMLA) है। उन्होंने कहा, आपकी सरकार के झूठ, छल, कपट, लूट और प्रचार ये पांच विशेषण हैं जो आपकी सरकार का सबसे अच्छा वर्णन करते हैं।

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Mallikarjun Kharge vs Pm Modi

Mallikarjun Kharge vs Pm Modi: कांग्रेस के चुनावी वादों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमले पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एनडीए की 100 दिन की योजना को 'सस्ता पीआर स्टंट' बताया है। खड़गे ने एनडीए सरकार पर शासन करने के लिए झूठ, छल, धोखाधड़ी, लूट और प्रचार पर निर्भर रहने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, BJP में 'बी' का मतलब Betrayal (विश्वासघात) है, जबकि 'जे' का मतलब जुमला (JUMLA) है।

खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, झूठ, छल, कपट, लूट और प्रचार ये पांच विशेषण हैं जो आपकी सरकार का सबसे अच्छा वर्णन करते हैं। 100 दिवसीय योजना के बारे में आपका ढोल पीटना एक सस्ता पीआर स्टंट था। 16 मई 2024 को आपने यह भी दावा किया था कि आपने 2047 के रोडमैप के लिए 20 लाख से अधिक लोगों से इनपुट लिया था। पीएमओ में दायर आरटीआई ने आपके झूठ को उजागर करते हुए विवरण देने से इनकार कर दिया।

क्या हुआ दो करोड़ नौकरी का वादा

कांग्रेस अध्यक्ष ने लिखा प्रति वर्ष दो करोड़ नौकरियों के वादे का क्या हुआ? भारत की बेरोजगारी दर 45 साल के उच्चतम स्तर पर क्यों है? जहां भी मुट्ठी भर नौकरियों के लिए रिक्तियां होती हैं, वहां भगदड़ क्यों देखी जाती है? सात साल में 70 पेपर लीक का जिम्मेदार कौन है? पीएसयू में हिस्सेदारी बेचकर पांच लाख सरकारी नौकरियां किसने छीनी? घरेलू बचत 50 साल के निचले स्तर पर क्यों गिर गई है? अच्छे दिनों का क्या हुआ? रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। आपकी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में 150 लाख करोड़ रुपये से अधिक उधार लिए हैं, यानी प्रत्येक भारतीय पर 1.5 लाख का कर्ज है।

आर्थिक असमानता 100 साल के उच्चतम स्तर पर है

खड़गे ने पोस्ट में आगे लिखा, आर्थिक असमानता 100 साल के उच्चतम स्तर पर है। निजी निवेश 20 साल के निचले स्तर पर है। विकसित भारत का क्या हुआ? जो कुछ भी आप बनाने का दावा करते हैं वह ताश के पत्तों की तरह ढह रहा है। महाराष्ट्र में शिवाजी की मूर्ति का उद्घाटन आपके द्वारा किया गया, दिल्ली हवाई अड्डे की छत, अयोध्या में राम मंदिर की छत और अटल सेतु में दरारें आ गईं। गुजरात (मोरबी) में पुल टूटना, जबकि बिहार में नए पुलों का गिरना आम बात है। अनगिनत रेल दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जबकि मंत्री रील पीआर में व्यस्त हैं।

चुनावी बांड से लूट BJP का वित्तीय अपराध

खड़गे ने पोस्ट में आगे लिखा, न खाऊंगा, न खाने दूंगा का क्या हुआ? हमारे पास आपके लिए केवल दो शब्द हैं। जबरन वसूली करके असंवैधानिक चुनावी बांड के माध्यम से लूट करना भाजपा का सबसे बड़ा वित्तीय अपराध है। मैं देश नहीं झुकने दूंगा का क्या हुआ? सबका साथ, सबका विकास और जय किसान, जय जवान का क्या हुआ? 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का जुमला। एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी से इनकार। 35 कृषि वस्तुओं पर जीएसटी। अग्निपथ के माध्यम से सशस्त्र बलों में स्थायी भर्ती को अस्थायी में बदलना। पीएम मोदी की गारंटी 140 करोड़ भारतीयों के साथ एक क्रूर मजाक है।

पीएम मोदी ने कांग्रेस पर कसा था तंज

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विपक्षी कांग्रेस पर करारा हमला बोला था। यह हमला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उस सलाह के बाद किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी की राज्य इकाइयों को केवल वही वादे करने चाहिए जो वित्तीय दृष्टि से संभव हो। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, कांग्रेस पार्टी को यह एहसास हो रहा है कि झूठे वादे करना तो आसान है, लेकिन उन्हें सही तरीके से लागू करना मुश्किल या असंभव है। प्रचार के दौरान वह लोगों से ऐसे वादे करते हैं, जिन्हें वे कभी पूरा नहीं कर पाएंगे। अब कांग्रेस पार्टी लोगों के सामने बुरी तरह बेनकाब हो गई है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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