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आबू रोड: ब्रह्माकुमारीज की प्रमुख प्रशासक दादी रतनमोहिनी का निधन, 10 अप्रैल को होगा अंतिम संस्कार

राजस्थान के सिरोही जिले के आबूरोड स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रमुख तथा ब्रह्माकुमारीज संस्था की मुख्य प्रशासक राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी का निधन हो गया है। वह 101 वर्ष की थीं। संस्थान के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।

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ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रमुख राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी जी का निधन

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जयपुर: राजस्थान के सिरोही जिले के आबूरोड स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रमुख तथा ब्रह्माकुमारीज संस्था की मुख्य प्रशासक राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी का निधन हो गया है। वह 101 वर्ष की थीं। संस्थान के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।

संस्थान के प्रवक्ता ने बताया, ‘ब्रह्माकुमारीज की प्रमुख 101 वर्षीय राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी नहीं रहीं। उन्होंने अहमदाबाद के एक अस्पताल में सोमवार देर रात अंतिम सांस ली।’

प्रवक्ता ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार 10 अप्रैल को सुबह किया जाएगा। चार वर्ष पूर्व दादी हृदय मोहिनी के देहावसान के बाद दादी रतनमोहिनी इस संस्था मुख्य प्रशासिका बनीं थीं। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी के निधन पर शोक जताया है।मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा, ‘करुणामयी व्यक्तित्व से परिपूर्ण दादी जी ने पूरा जीवन त्याग, तपस्या और मानवता की सेवा के लिए समर्पित किया। उनका देवलोकगमन आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।' (भाषा इनपुट के साथ)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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