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केंद्र ने 14 मोबाइल मैसेंजर एप को किया ब्लॉक, आतंकी गतिविधियों में होते थे इस्तेमाल

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 1, 2023, 10:05 AM IST

Central blocks 14 mobile messenger apps in India: गृह मंत्रालय ने 14 मोबाइल मैसेंजर एप को देश में ब्लॉक किया गया है। इन मोबाइल मैसेंजर एप का इस्तेमाल पाकिस्तान से सूचनाएं प्राप्त करने के लिए भी किया जाता था।

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केंद्र सरकार ने 14 मोबाइल मैसेंजर एप देश में किए प्रतिबंधित

Photo : BCCL

Central blocks 14 mobile messenger apps in India: केंद्र सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला करते हुए भारत में चल रहे 14 मोबाइल मैसेंजर एप को पूरी तरह से ब्लॉग कर दिया है। यह फैसला इन मैसेंजर एप के आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल की जानकारी आने के बाद किया गया है।

Central Government blocks 14 mobile messenger apps

Central Government blocks 14 mobile messenger apps

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने 14 मोबाइल मैसेंजर एप को देश में ब्लॉक किया गया है। कहा गया है कि आतंकी इन एप का इस्तेमाल देश के सौहार्द को बिगाड़ने के लिए करते थे। वे इन एप को जरिए गलत मैसेज फैलाते थे। और तो और इन मोबाइल मैसेंजर एप का इस्तेमाल पाकिस्तान से सूचनाएं प्राप्त करने के लिए भी किया जाता था।

जम्मू-कश्मीर से भेजे जाते थे मैसेज

जानकारी के मुताबिक, प्रतिबंधित किए गए मोबाइल मैसेंजर ऐप के जरिए जम्मू कश्मीर में आतंकी ओवर ग्राउंट वर्कर को सीक्रेट मैसेज भेजते थे। वह इन ऐप्स के जरिए अपने समर्थकों और गुर्गों के साथ संवाद स्थापित करते थे। इतना ही नहीं पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से भी दिशानिर्देश प्राप्त करते थे।

नहीं मिलती थी जानकारी

केंद्र सरकार ने यह कदम सुरक्षा एजेंसियों, रक्षा मंत्रालय और खुफिया विभाग की सिफारिश के बाद उठाया है। सामने आया है कि जिन मोबाइल मैसेंजर ऐप्स को ब्लॉक किया गया है, उनके भारत में प्रतिनिधि नहीं थे। ऐसे में भारत सरकार जब इन मोबाइल एप्स से संबंधित जानकारी मांगती थी, तो उन्हें वह जानकारी नहीं मिल पाती थी। ऐसे में सरकार ने इन एप्स को ही ब्लॉक कर दिया है।

इन एप्स को किया गया ब्लॉक

केंद्र सरकार ने क्रिप्टवाइजर, एनिग्मा, सेफस्विस, विकरमे, मीडियाफायर, ब्रियर, बीजैट, नंदबॉक्स, कॉनियन, आईएमओ, एलिमेंट, सेकेंड लाइन, जंगी और थ्रेमा को ब्लॉक किया है। बता दें, इससे पहले केंद्र सरकार ने फरवरी में चीनी कनेक्शन वाले लगभग सवा सौ ऐप्स को भी बैन कर दिया था। ये ऐप लोन व बेटिंग वाले थे।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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