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उत्तराखंड के 'घोस्ट विलेज' में CEC राजीव कुमार ने गुजारी रात, जमा देने वाला था तापमान

CEC Rajiv Kumar : मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने उत्तराखंड के एक 'घोस्ट विलेज' में एक रात गुजारी है। जमा देने वाली ठंडक वाली रात में उनके साथ दो अधिकारी और दो पायलट थे। सूत्रों का कहना है कि सीईसी और पांच अधिकारी पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी ब्लॉक के एक छोटे से गांव रालम में रुके थे।

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उत्तराखंड के एक गांव में रुके सीईसी।

CEC Rajiv Kumar : मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने उत्तराखंड के एक 'घोस्ट विलेज' में एक रात गुजारी है। जमा देने वाली ठंडक वाली रात में उनके साथ दो अधिकारी और दो पायलट थे। सूत्रों का कहना है कि सीईसी और पांच अधिकारी पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी ब्लॉक के एक छोटे से गांव रालम में रुके थे। इस ब्लॉक के सुदूर इलाके में स्थित रालम इस समय बर्फ में ढंका हुआ है। इस गांव में 28 घर हैं जो कि अब बिल्कुल खाली हो चुके हैं। यहां के रहने वाले लोग गांव को छोड़कर दूसरी जगहों पर जा चुके हैं।

सीईसी के साथ चार लोग और थे

पिथौरागढ़ के इस गांव में कुमार, उत्तराखंड के अवर मुख्य चुनाव अधिकारी विजय कुमार, उनके निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) नवीन कुमार और दो पायलटों को इस निर्जन एवं बियांबान गांव में रुकना पड़ा। दरअसल, चुनाव के दौरान पहाड़ों के ऊंचे और दुर्गम इलाकों में स्थित मतदान केंद्रों पर मतदानकर्मियों को किस तरह की परेशानी एवं चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इसका जायजा लेने के लिए उन्होंने इन इलाकों का दौरा करने की योजना बनाई थी।

रालम में हुई आपात लैंडिंग

सीईसी की योजना आसपास के 14 गांवों का दौरा करने की थी लेकिन मौसम के खराब होने पर उनके हेलिकॉप्टर को रालम में आपात लैंडिंग करनी पड़ी। ऐसे में सीईसी की इस टीम को सब जीरो तापमान में इस गांव में ही रात गुजारनी पड़ी। अगले दिन तड़के वहां रेस्क्यू टीम गई और सीईसी और उनके साथ के लोगों को वहां से निकाला। मौसम ठीक होने पर सीईसी का हेलिकॉप्टर उन्हें लेकर मुनस्यारी तहसील मुख्यालय पहुंचा।

चमोली जिले के दुमक गांव भी गए थे CEC

सीईसी पिथौरागढ़ के जोहर वैली के अंतिम गांव मिलाम के पांच दिनों के दौरे पर थे। मिलाम ऊंचे पहाड़ों पर स्थित है। सीईसी का हेलिकॉप्टर जब मुनस्यारी से मिलाम जा रहा था, उसी समय मौसम खराब हो गया। इसके बाद दिन के करीब दो बजे उसे आपात लैंडिंग करनी पड़ी। सीईसी पहले भी पहाड़ों पर स्थित इस तरह की चुनौतीपूर्ण जगहों का दौरा कर चुके हैं। दुर्गम इलाकों में मतदान कर्मियों को पेश होने वाली चुनौतियों का अनुभव करने के लिए वह चमोली जिले के दुमक गांव भी गए थे।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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