Caste Census: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार जाति जनगणना कराएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बुधवार को राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति में यह निर्णय लिया गया जिसकी जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का संकल्प है कि आगामी जनगणना प्रक्रिया में जातिगत गणना को पारदर्शी तरीके से शामिल किया जाएगा।
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है। देशवासी जवाबी कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में बुधवार को पीएम मोदी के नेतृत्व में सीसीएस और सीसीपीए दोनों की बैठक हुई। एक बैठक में सेना को खुली छूट दी गई कि वह कब, कहां और कैसे जवाब देना चाहते हैं इसकी योजना तैयार करें तो दूसरी बैठक में जाति जनगणना सहित कई अहम फैसले लिए गए और इसे मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है।
अश्विनी वैष्णव ने जेब से पर्ची निकाल पलटी बाजी
मंत्रिमंडल बैठक की जानकारी साझा करते हुए अश्विनी वैष्णव ने आखिरी मौके पर जेब से एक पर्ची निकाल कर विपक्षी दलों की बाजी ही पलट दी। दरअसल, उन्होंने जेब से पर्ची निकालकर मंत्रिमंडल बैठक में लिए गए जाति जनगणना वाले मुद्दे के बारे में जानकारी दी जिसके बाद विपक्षी दलों के बयान आना शुरू हो गए। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव ने इसे लालू प्रसाद यादव और समाजवादियों की जीत बताई तो कांग्रेस ने 'देर आए, दुरुस्त आए' वाली टिप्पणी की।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव
सरकार ने विपक्ष से लपका मुद्दा
लंबे समय से कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष जाति जनगणना की मांग को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर था। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान अधिकांश विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था और ऐलान किया था कि अगर उनकी सरकार बनती है तो जाति जनगणना कराई जाएगी। हालांकि, केंद्र में तीसरी बार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार का गठन हुआ। इसके बावजूद विपक्षी दल शांत नहीं बैठे।
जनगणना का विषय केंद्र सरकार का है। इसके बावजूद कई राज्यों ने अपने-अपने स्तर पर जाति जनगणना कराई जिसमें बिहार, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना जैसे राज्य शामिल हैं। हालांकि, सिद्दारमैया के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार तो बुरी तरह से घिर गई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली सांसद राहुल गांधी की जिद पर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने जाति आधारित जनगणना कराई जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया।
सामने नहीं आई रिपोर्ट
बिहार की एकमात्र ऐसा राज्या है जिसकी जातिगत जनगणना की सर्वे रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में जाति जनगणना शुरू तो हुई, लेकिन अब तक सार्वजनिक नहीं हुई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
विपक्ष का दबाव या मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक ?
विपक्ष ने केंद्र सरकार के फैसले को इंडी गठबंधन की जीत करार देते हुए को कहा कि सरकार विपक्षी दलों तथा जनता के दबाव में यह निर्णय लेने की बाध्य हुई। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कांग्रेस के अहमदाबाद अधिवेशन के प्रस्ताव के कुछ अंश साझा करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘सामाजिक न्याय को लेकर यह बात कांग्रेस के हालिया प्रस्ताव में कही गई थी, जो 9 अप्रैल 2025 को अहमदाबाद में पारित हुआ था। देर आए, दुरुस्त आए।’’
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार का फैसला इंडी गठबंधन की जीत है, क्योंकि विपक्ष के दबाव में आकर भाजपा यह निर्णय लेने को बाध्य हुई। उन्होंने कहा, ‘‘जाति जनगणना का फ़ैसला 90 प्रतिशत पीडीए की एकजुटता की 100 प्रतिशत जीत है। हम सबके सम्मिलित दबाव से भाजपा सरकार मजबूरन ये निर्णय लेने को बाध्य हुई है। सामाजिक न्याय की लड़ाई में ये पीडीए की जीत का एक अति महत्वपूर्ण चरण है।’’
राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि मेरे जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते दिल्ली में हमारी संयुक्त मोर्चा की सरकार ने 1996-97 में कैबिनेट से 2001 की जनगणना में जातिगत गणना कराने का निर्णय लिया था जिस पर बाद की वाजपेयी सरकार ने अमल नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘‘देश में सर्वप्रथम जातिगत सर्वेक्षण भी हमारी 17 महीने की महागठबंधन सरकार में बिहार में ही हुआ।’’
