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आरजी कर केस: पुलिस हिरासत में महिला की प्रताड़ना मामले में होगी CBI जांच, कलकत्ता हाईकोर्ट ने बरकरार रखा आदेश

Kolkata RG Kar Case: दो महिला याचिकाकर्ताओं ने पुलिस हिरासत में शारीरिक यातना का आरोप लगाते हुए एकल पीठ का रुख किया था। अदालत ने जेल के एक डॉक्टर की रिपोर्ट पर गौर किया था, जिसने उनमें से एक के पैरों पर हेमाटोमा (बड़ी रक्त वाहिकाओं के बाहरी हिस्से में सूजन) के लक्षण पाए थे।

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Court Order

Kolkata RG Kar Case: कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने बुधवार उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें आर जी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की एक डॉक्टर के बलात्कार-हत्या के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तारी के बाद पुलिस हिरासत में एक महिला को कथित तौर पर प्रताड़ित करने के मामले की सीबीआई जांच का निर्देश दिया गया था।

मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवज्ञानम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि स्वतंत्र जांच कराने के एकल पीठ के आदेश में कोई खामी नहीं है और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। पश्चिम बंगाल सरकार की अपील को खारिज करते हुए अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को एकल पीठ के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया।

महिलाओं ने लगाया था शारीरिक यातना का आरोप

बता दें, दो महिला याचिकाकर्ताओं ने पुलिस हिरासत में शारीरिक यातना का आरोप लगाते हुए एकल पीठ का रुख किया था। अदालत ने जेल के एक डॉक्टर की रिपोर्ट पर गौर किया था, जिसने उनमें से एक के पैरों पर हेमाटोमा (बड़ी रक्त वाहिकाओं के बाहरी हिस्से में सूजन) के लक्षण पाए थे। दोनों याचिकाकर्ताओं के अनुरोध पर न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज ने आठ अक्टूबर को सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह उनमें से एक को पुलिस हिरासत में मिली शारीरिक यातना के आरोप की गहन जांच करे। एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने कहा कि एकल न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश न्यायसंगत और उचित था और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

रिपोर्ट में मिली विसंगतियां

अदालत ने कहा कि रमा दास को सात सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और वह डायमंड हार्बर पुलिस जिले के फाल्टा थाने की हिरासत में रही, जब तक कि अगले दिन डायमंड हार्बर अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में नहीं भेज दिया। खंडपीठ ने कहा कि डायमंड हार्बर जेल के चिकित्सा अधिकारी की रिपोर्ट में दास के दोनों पैरों में हेमाटोमा बताया गया है, जबकि डायमंड हार्बर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के जांच करने वाले डॉक्टर ने कहा कि कोई बाहरी चोट नहीं थी। अदालत ने कहा कि विसंगतियां गंभीर हैं और इसकी जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से कराने की आवश्यकता है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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