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अयोग्य लाभार्थियों पर खर्च हुए करोड़ों: दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ स्कीम में मिली खामियां, CAG रिपोर्ट में हुआ खुलासा

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 9, 2023, 08:34 AM IST

CAG Report: मंगलवार को संसद में कैग की रिपोर्ट पेश की गई थी। इसमें कहा गया है कि आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के डेटाबेस में खामियां पाई गई हैं। इसके कारण अयोग्य लाभार्थियों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए।

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Photo : BCCL

CAG Report: दुनिया की सबसे बड़ी भारत की पब्लिक हेल्थ अस्योरेंस स्कीम के डाटाबेस में कई खामियां सामने आई हैं। यह बात नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में पता चली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन विसंगतियों के कारण अयोग्य लाभार्थियों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। मुख्य रूप से अपर्याप्त सत्यापन के कारण अयोग्य लाभार्थियों पर यह रकम खर्च हुई है।

बता दें, मंगलवार को संसद में कैग की रिपोर्ट पेश की गई थी। इसमें कहा गया है कि आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के डेटाबेस में खामियों में अमान्य नाम, गलत जन्मतिथि, डुप्लिकेट स्वास्थ्य आईडी और अवास्तविक पारिवारिक आकार शामिल हैं। पर्याप्त सत्यापन नियंत्रण के अभाव में, लाभार्थी डेटाबेस में त्रुटियां देखी गईं।

आधार नंबरों से हुई धांधली

संसद में पेश की गई कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर खामियां आधार नंबरों के गलत इस्तेमाल के कारण हुईं। तमिलनाडु के 36 मामलों में, 18 आधार नंबरों के खिलाफ दो पंजीकरण किए गए थे और सात आधार नंबरों के खिलाफ 4,761 पंजीकरण किए गए थे। वहीं, लाभार्थी पहचान प्रणाली (बीआईएस) में 11 से 7,49,820 लाभार्थियों तक एक ही या अमान्य मोबाइल नंबर के खिलाफ कई लाभार्थियों का पंजीकरण किया गया था।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में की गई अयोग्य लाभार्थियों की पहचान

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 से 2021 के बीच, सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना के आंकड़ों में जम्मू- कश्मीर और लद्दाख में स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा 16,865 और 335 अयोग्य लाभार्थियों की पहचान की गई थी। इसके अलावा छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपात्र परिवार PMJAY लाभार्थियों के रूप में पंजीकृत पाए गए। इन लोगों ने स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ उठाया। कैग की रिपोर्ट में सितंबर 2018 और मार्च 2021 के बीच की अवधि के आंकड़ों की जांच के बाद कहा, इन अयोग्य लाभार्थियों पर खर्च चंडीगढ़ में 0.12 लाख से लेकर तमिलनाडु में 22.44 करोड़ तक था।

अस्पतालों के पैनलीकरण और प्रबंधन में भी बड़ा अंतर

कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पताल के पैनलीकरण और प्रबंधन में बड़ा अंतर पाया गया है। कई राज्यों में बुनियादी ढांचे, उपकरण, डॉक्टरों और गैर-कार्यात्मक उपकरणों की कमी मिली है। पैनल में शामिल कुछ स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता (ईएचसीपी) समर्थन प्रणाली और बुनियादी ढांचे के न्यूनतम मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं। कई राज्यों में बुनियादी ढांचे, अग्नि सुरक्षा उपायों, बायोमेडिकल अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और अस्पताल पंजीकरण प्रमाण पत्र से संबंधित अस्पतालों के पैनल में शामिल होने के लिए अनिवार्य अनुपालन मानदंडों का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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